90 लाख की सैलरी छोड़ी, आज करोड़ों में खेल रहा हरियाणा का "लाल", माइक्रोग्रीन्स के स्टार्टअप से कर डाला कमाल
चंडीगढ़ के रहने वाले मोहित निझावन ने 90 लाख रुपए की नौकरी छोड़ दी और वे आज करोड़ों रुपए कमा रहे हैं.

Published : March 27, 2025 at 11:15 PM IST
|Updated : March 27, 2025 at 11:58 PM IST
चंडीगढ़: अगर आप घर बैठे अच्छी-खासी कमाई का आईडिया ढूंढ रहे हैं और अगर आपको खेती या गार्डनिंग में थोड़ी सी भी दिलचस्पी है तो हम आपको बताने जा रहे हैं एक ऐसा बिजनेस आईडिया जो आपकी लाइफ पूरी तरह से बदलकर रख सकता है और थोड़ी सी लगन और मेहनत के दम पर आप करोड़पति बन सकते हैं. ऐसा ही कुछ कर दिखाया है चंडीगढ़ के मोहित निझावन ने जिन्होंने 90 लाख की सैलरी वाला पैकेज छोड़ दिया और आज माइक्रोग्रीन्स खेती के दम पर करोड़ों रुपए कमा रहे हैं और सभी के लिए मिसाल बन चुके हैं.
पोषण का ख़ज़ाना, माइक्रोग्रीन्स अपनाना : साल 2020 में कोरोनाकाल के आने के बाद सभी ने बॉडी में इम्यूनिटी के महत्व को समझा है और तभी से माइक्रोग्रीन्स की डिमांड में तेज़ी आई है. तेज़ी से बदलती लाइफ स्टाइल के बीच माइक्रोग्रीन्स फॉर्मिंग का चलन तेज़ी से बढ़ा है. सब्जियों और अनाजों के छोटे पौधे की शुरुआती पत्तियां माइक्रोग्रीन्स कहलाती है जो दो हफ्ते के अंदर उगकर तैयार हो जाती है. सलाद या नाश्ते के तौर पर इनका सेवन किया जाता है. इन्हें अंकुरित आहार की तरह अनाज और सब्जियों के बीजों से उगाया जाता है. माइक्रोग्रीन्स जहां खाने में काफी स्वादिष्ट होता है, वहीं इसमें पोषक तत्वों का ख़ज़ाना छुपा होता है. इनमें अनाजों के मुकाबले करीब 40 फीसदी तक अधिक पोषक तत्व मिलते हैं. किचन गार्डन में ही आसानी से माइक्रोग्रीन्स की खेती हो जाती है. आमतौर पर गेहूं, मक्का, मूली, शलजम, सरसों, मूंग, चना, मटर, मेथी के माइक्रोग्रीन्स को उगा सकते हैं और घर में खाने के साथ इसे दूसरों की सप्लाई कर अच्छी-खासी इनकम भी जेनरेट कर सकते हैं.
90 लाख की नौकरी छोड़ी : माइक्रोग्रीन्स की खेती के जरिए चंडीगढ़ के रहने वाले मोहित निझावन ने अपनी किस्मत ही बदल डाली है. उन्होंने अपने स्कूल और कॉलेज की पढ़ाई चंडीगढ़ में पूरी की. इसके बाद उन्होंने फार्मा कंपनी में 22 साल तक काम किया. यहां पर उनका सालाना पैकेज 90 लाख रुपए का था. साल 2020 में उन्होंने अपनी जॉब छोड़ दी और माइक्रोग्रीन्स उगाने का फैसला लिया. आज वे 500 वर्ग गज की जगह में माइक्रोग्रीन्स की खेती कर रहे हैं. उनके पास 70 से ज्यादा पौधों की वैरायटी है.
परिवारवालों की झेली नाराज़गी : मोहित ने जानकारी देते हुए बताया कि वे पहले फार्मा सेक्टर में काम करते थे. जॉब के दौरान उन्होंने देखा कि कैंसर के मरीजों की संख्या काफी अधिक है. इसका इलाज भी महंगा है. अपने परिवार में भी इस बीमारी का सामना कर रहे लोगों को देख उन्होंने महसूस किया कि खराब खानपान और जीवनशैली इसकी बड़ी वजह हैं. मोहित ने बताया कि मेरी सास और साली की कैंसर से मौत हो गई. मेरे भाई को किडनी संबंधी बीमारी है. इसके अलावा कई करीबी कैंसर जैसी बीमारी से जूझ रहे थे. ये देखते हुए मैंने माइक्रोग्रीन्स पर रिसर्च किया और इसे बढ़ाने का फैसला किया.शुरुआत में मैंने कई एग्रीकल्चर वर्कशॉप में जाकर अनुभव हासिल किया.सैकड़ों किसानों के साथ बातचीत भी की. साल 2020 में नौकरी छोड़ी और अपने ही छत पर ब्रोकली, फूलगोभी, सरसों, मेथी और मूली सहित 21 तरह के बीजों से माइक्रोग्रीन्स उगाने लगे. इस बीच परिवार के लोगों की नाराज़गी का सामना भी उनको करना पड़ा. लेकिन घरवालों की नाराज़गी के बीच हिम्मत नहीं हारी और अपनी खुद की कंपनी भी बना डाली.
बिजनेस में मिला धोखा : मोहित ने बताया कि जब उन्होंने कंपनी की शुरुआत की तो चुनौतियां कम नहीं थी. उन्होंने पार्टनरशिप में कंपनी स्टार्ट की थी. लेकिन साल भर बाद उनके पार्टनर ने उन्हें धोखा दे दिया. इसके बाद बहुत बड़ी चुनौती मेरे सामने थी. इन चुनौतियों ने मुझे काफी कुछ सिखाया. धोखा खाने के बाद मैंने माइक्रोग्रीन्स के बिजनेस को दोबारा से शुरू किया और आज इसे एक प्रॉफिटेबल कंपनी के तौर पर चला रहा हूं. आज की तारीख में उत्तर भारत के अलावा मुंबई में भी हमारी कंपनी काम कर रही है, जिसमें 90 लोगों की टीम शामिल है.

सेहत का पावरहाउस माइक्रोग्रीन्स : ईटीवी भारत से खास बातचीत करते हुए मोहित ने कहा कि आज कई बीमारियां हमारी ख़राब लाइफस्टाइल के चलते हो रही है. साथ ही इसमें भोजन का एक बड़ा रोल है. मोहित ने कहा कि घर में पहुंचने वाली सब्जियां काफी लंबा सफर तय करके आती है, जिससे सब्जी का न्यूट्रिशन वैल्यू कम हो जाता है. इस दौरान सब्जियों में पानी और फाइबर के अलावा ज्यादा कुछ नहीं बचता और शरीर को ज्यादा फायदा नहीं होता है. माइक्रोग्रीन्स के फायदे गिनाते हुए मोहित ने बताया कि मेरे पहचान के एक डॉक्टर ने अपने मरीज की सेहत बिगड़ती देख मेरी तैयार की हुई माइक्रोग्रीन्स भोजन में उसे देने का फैसला लिया. वो व्यक्ति केरल में आज हेल्दी लाइफ जी रहा है. साफ है कि माइक्रोग्रीन्स के पोषक तत्वों से सेहत को काफी ज्यादा फायदा होता है.
दिल्ली से मुंबई तक डिमांड : मोहित निझावन घर पर उगाए गए माइक्रोग्रीन्स को चंडीगढ़ ही नहीं बल्कि दिल्ली, नोएडा, गुड़गांव और मुंबई के होटल-रेस्टोरेंट में भी सप्लाई करते हैं. ख़ासतौर पर उनके चेरी टोमेटो माइक्रोग्रीन्स ग्राहकों को काफी ज्यादा भाते हैं. पहले जहां उनकी लाखों में कमाई होती थी, वो आज बढ़ते-बढ़ते करोड़ों में पहुंच चुकी है. मोहित अपने बिजनेस आईडिया के जरिए सालाना 1.44 करोड़ रुपये तक की कमाई कर रहे हैं.
माइक्रोग्रीन्स उगाने की ट्रेनिंग : आज मोहित कई लोगों को माइक्रोग्रीन्स उगाने की ट्रेनिंग देकर आत्मनिर्भर बना रहे हैं. उन्होंने बताया कि माइक्रोग्रीन्स को लेकर मैं 3000 से अधिक किसानों को ट्रेनिंग दे चुका हूं. माइक्रोग्रीन्स को घर में लगाना काफी ज्यादा आसान है. एक से दो हफ्ते के अंदर ये तैयार हो जाती है. इसका सिंपल सा फंडा है, जब माइक्रोग्रीन्स चार उंगलियों के बराबर हो जाते हैं, उसी समय उसे काटकर खाना चाहिए. इस समय उन प्लांट्स में पूरा न्यूट्रीशन होता है, जो हमारे शरीर के लिए काफी ज्यादा फायदेमंद होता है.
माइक्रो प्लांट्स को डिलीवर करते हैं : मोहित ने आगे कहा कि "हमारी वेबसाइट भी है, जो मरीज की समस्या को देखते हुए माइक्रोग्रीन्स का प्लान करती है. ऐसे में जिन लोगों को जिस तरह की समस्या होती है, हम उनसे जानकारी लेने के बाद उनके घर में माइक्रो प्लांट्स को डिलीवर करते हैं. आज के समय में चंडीगढ़, दिल्ली, गुड़गांव और नोएडा जैसे बड़े शहरों में हम सप्लाई कर रहे हैं. लोगों को इसका लाभ भी मिल रहा है. यही कारण है कि लोगों में इसकी डिमांड बढ़ी है."

कैसे करें माइक्रोग्रीन्स की खेती ?: माइक्रोग्रीन्स फार्मिंग के लिए सबसे अच्छी बात ये है कि आपको इसके लिए किसी खेत की कोई जरूरत नहीं है. आप घर के किसी भी रूम में इसकी खेती आसानी से कर सकते हैं. माइक्रोग्रीन्स को उगाने के लिए ट्रे टाइप के प्लास्टिक का इस्तेमाल कर सकते हैं जिसमें 4 से 6 इंच की गहराई हो. इसके बाद आप माइक्रोग्रीन्स की खेती करने के लिए बीज को चुन लीजिए. फिर प्लास्टिक ट्रे में मिट्टी या कोकोपीट भर दीजिए. इसमें थोड़ी कंपोस्ट खाद मिला दें. फिर इसमें बीज को फैलाकर डाल दें. बीज डालने के बाद उसमें मिट्टी की एक पतली सी परत डाल दें. फिर उस पर पानी का छिड़काव करें. इसके बाद उसे कसकर ढंककर खिड़की के पास रखें, जब तक कि बीज अंकुरित न हो जाएं. 2 से 3 हफ्ते के बाद माइक्रोग्रीन्स कटाई के लिए पूरी तरह से तैयार हो जाएंगे. फिर अपनी कैंची लें और मिट्टी की रेखा के ठीक ऊपर से साग को काट लें.

