ETV Bharat / bharat

23 साल से पेड़ के नीचे स्कूल, चबूतरे पर 5 ब्लैकबोर्ड, बिहार में शिक्षा का ये कैसा मॉडल?

बिहार के दरभंगा से आयी तस्वीर ने प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था की कलई खोलकर रख दी है. आगे पढ़ें वरुण ठाकुर की रिपोर्ट.

DARBHANGA LAVATOL PRIMARY SCHOOL
दरभंगा के स्कूल का हाल देखिए (ETV Bharat)
author img

By ETV Bharat Bihar Team

Published : July 18, 2025 at 8:27 PM IST

7 Min Read
Choose ETV Bharat

दरभंगा : 3 मार्च 2025 को जब बिहार विधानसभा में बजट पेश किया गया था, तो उस समय कहा गया 3 लाख 17 हजार करोड़ का भारी भरकम बजट है. इसमें भी सबसे बड़ा बजट शिक्षा विभाग का था. जी हां, नीतीश सरकार ने 60964.87 करोड़ रुपये का शिक्षा बजट प्रस्तावित किया. नीतीश सरकार पीठ थपथपाती है कि हम शिक्षा की ओर क्रांति ला रहे हैं, तो आइये आपको इसकी जमीनी हकीकत से रू-ब-रू करवाते हैं.

23 सालों से बिना भवन का स्कूल : बिहार के दरभंगा जिले में एक सरकारी प्राथमिक विद्यालय पिछले 23 सालों से बिना इमारत के चल रहा है. हनुमाननगर प्रखंड के गोदियारी गांव में प्राथमिक विद्यालय लावाटोल की यह कहानी न केवल शिक्षा व्यवस्था की बदहाली का उदाहरण है, बल्कि यह बच्चों के भविष्य के साथ हो रहे खिलवाड़ की गंभीर स्थिति को भी उजागर करती है.

देखें यह स्पेशल रिपोर्ट (ETV Bharat)

चबूतरे पर 5 ब्लैकबोर्ड : यह स्कूल खुले आसमान के नीचे संचालित होता है. यहां न तो क्लासरूम है, न ही ब्लैकबोर्ड और न ही बेंच. बच्चे पेड़ के नीचे बैठकर पढ़ाई करते हैं. ब्लैकबोर्ड के लिए विशाल पीपल के पेड़ के चारों ओर सीमेंट के चबूतरे पर कोटिंग की गई है.

267 बच्चों के लिए 6 शिक्षक : लावाटोल प्राथमिक विद्यालय में कुल 267 बच्चे नामांकित है. जिसमें लगभग 150 से 175 बच्चे प्रतिदिन विद्यालय आते हैं. स्कूल में कुल 6 शिक्षक हैं, जिसमें चार बीपीएससी से चयनित शिक्षक एवं दो नियोजित शिक्षक हैं. शिक्षक बारी-बारी से एक से लेकर पांच क्लास तक के बच्चों को पढ़ाते हैं.

DARBHANGA LAVATOL PRIMARY SCHOOL
बच्चों को पढ़ाते शिक्षक (ETV Bharat)

RJD से NDA सरकार तक एक जैसा हाल : जानकारी के अनुसार, 2003 में जब आरजेडी की सरकार थी, तब अति पिछड़ा क्षेत्र के बच्चों को स्कूल तक लाने के लिए लोक शिक्षा केन्द्र नामक एक प्रयास की शुरुआत की गई थी. जिसमें सरकार की सोच थी कि जो अति पिछड़ा समाज के बच्चे हैं, उन्हें शिक्षित किया जाय. फिर तीन साल बाद यानी 2006 में प्राथमिक विद्यालय में इसे मर्ज किया गया. वो अलग बात है कि हालात नहीं बदले, तभी तो शुरू से लेकर अभी तक विद्यालय का अपना भवन नहीं है.

DARBHANGA LAVATOL PRIMARY SCHOOL
पीपल के पेड़ के नीचे क्लास (ETV Bharat)

मिलता है सिर्फ आश्वासन : स्कूल के प्रधानाचार्य ने 2006 से कई बार सरकार एवं जिला प्रशासन से इमारत के लिए गुहार लगाई है, लेकिन उन्हें केवल आश्वासन मिला है. ग्रामीणों ने 2016 में सरकारी जमीन उपलब्ध कराने के लिए लोक शिकायत भी दर्ज कराई थी. हाल ही में 19 मई 2025 को प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी ने अंचल पदाधिकारी को भूमि उपलब्ध कराने के लिए पत्र लिखा है. पर हुआ वही, ढाक के तीन पात.

मंत्री मदन सहनी का है क्षेत्र : वैसे तो मिथिलांचल एनडीए सरकार की प्राथमिकता में है. पर पता नहीं यहां किसी की नजर क्यों नहीं इनायत होती है. वैसे यह इलाका जेडीयू के कद्दावर विधायक और बिहार सरकार में समाज कल्याण मंत्री मदन सहनी का है. इस स्कूल की हालत शिक्षा व्यवस्था की तस्वीर दिखाती है. जहां किताबें पेड़ के नीचे खुलती हैं, बारिश हो तो बच्चे इसे बस्ते में बंद कर घर भाग जाते हैं.

DARBHANGA LAVATOL PRIMARY SCHOOL
इस तरह पढ़ते हैं बच्चे (ETV Bharat)

स्कूल की पांचवीं की छात्रा दामिनी कुमारी ने बताया कि जब बारिश आति है तो घर जाना पड़ता है. जब बारिश छूट जाती है तो छाता लेकर आते हैं. अगर शिक्षक रहते हैं तो फिर से पढ़ाई करने बैठ जाते हैं. अगर तेज घूप रहे तो छांव में बैठकर पढ़ाई करते हैं.

''हम लोगों की भी इच्छा है कि स्कूल का अपना भवन हो. जहां हम लोग बेंच-डेस्क पर बैठकर पढ़ाई करें. हम लोग सरकार से मांग करते हैं कि जल्द से जल्द भवन बन जाय, जिसमें अच्छी से पढ़ाई कर पाएं.''- दामिनी कुमारी, छात्रा

वहीं छात्रा नंदनी कुमारी कहती है कि, मैं अभी पांचवीं की छात्रा हूं. जब से स्कूल में पढ़ाई करने आई हूं, पेड़ के नीचे जमीन पर बैठकर ही पढ़ाई कर रही हूं. कुछ दिन पहले की बात है जब हमलोग बैठकर पढ़ रहे थे, तभी मेरी सहेली के ऊपर पेड़ से डाली टूटकर गिर गया था. खतरा तो बना ही रहता है लेकिन क्या करेंगे, बस पढ़ाई अच्छे से होती है तो सबकुछ ठीक ही लगता है.

''2016 में ग्रामीणों द्वारा यहां सरकारी जमीन उपलब्ध कराने के लिए परिवाद कराया गया था. आदेश की कॉपी को लेकर जिला शिक्षा पदाधिकारी से गुहार लगाई थी. हाल ही में प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी ने अंचल पदाधिकारी को पत्र लिखा है कि लावाटोल प्राथमिक विद्यालय को भूमि उपलब्ध कराया जाय. सरकारी स्तर से भूमि उपलब्ध होना है, अब देखिए.'' - अजीत कुमार, प्रिसिंपल, हनुमान नगर प्राथमिक विद्यालय लावाटोल

DARBHANGA LAVATOL PRIMARY SCHOOL
लावाटोल प्राथमिक विद्यालय (ETV Bharat)

क्या कहते हैं DEO ? : जब ईटीवी भारत की टीम, जिला शिक्षा प्रदाधिकारी कृष्णनंनद सदा के पास पहुंची तो उन्होंने कहा कि ''आप लोगों के माध्यम से जानकारी प्राप्त हुई है. दरअसल स्कूल निर्माण के लिए दो बार फंड जा चुका है, लेकिन किसी कारणवस नहीं बन सका है. जल्द ही समुचित व्यवस्था कि जाएगी.''

पंचायत के मुखिया प्रतिनिधि ने कहा शर्मनाक : इधर, गोदियारी पंचायत के मुखिया प्रतिनिधि सुरेश प्रसाद सिंह ने कहा कि दुख और शर्म की बात है कि पेड़ के नीचे विद्यालय चल रहा है, यह नहीं होना चाहिए था. अब जमीन उपलब्ध हो रहा है. विभागीय प्रक्रिया चल रही है. सरकार से अब बस यही मांग है कि जल्द से जल्द फंड मुहैया कर दिया जाए ताकि स्कूल का भवन बन जाय.

बिहार में सरकारी विद्यालयों की कुल संख्या 81,000 (लगभग) है. यह जानकारी कई सरकारी घोषणाओं में उल्लेखित है. इन विद्यालयों को तीन श्रेणियों में विभाजित किया गया है.

  1. प्राथमिक विद्यालय (कक्षा 1-5)- 43,000 विद्यालय
  2. मध्य विद्यालय (कक्षा 1-8) - 29,000 विद्यालय
  3. माध्यमिक और उच्च माध्यमिक विद्यालय (कक्षा 9-12) - 9,360 विद्यालय

बिहार के सरकारी विद्यालयों में छात्र-शिक्षक अनुपात 32:1 है, जो राष्ट्रीय औसत 35:1 से बेहतर है. बिहार में साल 2024 और 2025 तक भवनहीन सरकारी विद्यालयों की संख्या के बारे में हाल के आंकड़े हैं वो कुछ इस प्रकार हैं.

भवनहीन विद्यालय- जून 2024 तक बिहार में 4,918 सरकारी विद्यालयों के पास अपना भवन नहीं था. ये विद्यालय दूसरे स्कूलों के साथ मर्ज करके चलाए जा रहे हैं. इनमें से 700 विद्यालय शिफ्ट सिस्टम (सुबह-शाम) में संचालित हो रहे हैं, जबकि कई एक ही कमरे में तीन-तीन कक्षाएं चला रहे हैं.

ईटीवी भारत GFX.
ईटीवी भारत GFX. (ETV Bharat)

सवाल उठना तो लाजमी है : कहा जाता है कि भारत में जुगाड़ खूब काम आता है. पर बिहार की शिक्षा व्यवस्था ही जुगाड़ से चले तो सवाल उठने लाजमी हैं. कभी पेड़ ब्लैक बोर्ड बन जाता है तो कभी एक ब्लैकबोर्ड पर तीन कक्षाएं संचालित होती हैं. ऐसे में इस तरह की तस्वीरें जरूर कचोटती है.

ये भी पढ़ें :-

बिहार में शिक्षा का हाल देखिए, 1 कमरा..1 ब्लैकबोर्ड.. 5 टीचर एक साथ पढ़ाते हैं 8 क्लास

VIDEO: हिंदी और उर्दू के लिए ब्लैकबोर्ड का बंटवारा, 'टू इन वन' पढ़ाई देखकर दांतों तले दबा लेंगे ऊंगली