शहर खोज दुनिया में बजा प्रो. मोहनलाल का डंका, वर्ल्ड साइंटिफिक इंडेक्स में भारत में पहला स्थान
पुरातत्वविद प्रोफेसर मोहनलाल चढ़ार को विश्व की साइंटिफिक इंडेक्स ने पुरातत्व क्षेत्र में भारत में दिया पहला स्थान, एरण के रहने वाले हैं मोहनलाल चढ़ार.

By ETV Bharat Madhya Pradesh Team
Published : May 19, 2025 at 8:13 PM IST
सागर (कपिल तिवारी): पाषाण काल से आधुनिक काल तक के इतिहास को अपने में समेटे ऐतिहासिक धरोहर एरण पर शोध चल रही है. जिसे लेकर सागर यूनिवर्सिटी के छात्र और वर्तमान में इंदिरा गांधी जनजातीय विश्वविद्यालय अमरकंटक के प्राचीन भारतीय इतिहास, संस्कृति व पुरातत्व प्रोफेसर और विभागाध्यक्ष डाॅ मोहनलाल चढ़ार को बड़ी उपलब्धि हासिल हुई है. पुरातत्व के क्षेत्र में रिसर्च को लेकर जारी हुई वर्ल्ड साइंटिफिक इंडेक्स में उन्हें भारत में पहला स्थान हासिल हुआ है. खास बात ये है कि डाॅ मोहनलाल चढ़ार खुद एरण के मूल निवासी हैं और बारहवीं के बाद से लगातार एरण की पुरातात्विक धरोहर पर शोध करके एरण को विश्व पटल पर चर्चित करने में उनका अहम योगदान रहा है.
कौन है डाॅ मोहन लाल चढ़ार
डाॅ मोहनलाल चढ़ार फिलहाल इंदिरा गांधी जनजातीय विश्वविद्यालय अमरकंटक के प्राचीन भारतीय इतिहास,संस्कृति व पुरातत्व प्रोफेसर और विभागाध्यक्ष हैं. उन्होंने उच्चशिक्षा सागर यूनिवर्सिटी में हासिल की और यहीं पर प्रो. डाॅ नागेश दुबे के मार्गदर्शन में पीएचडी की. खास बात ये है कि उनका जन्म एरण में हुआ और हायर सेकेण्डरी पास करने के बाद उन्होंने प्राचीन भारतीय इतिहास, संस्कृति व पुरातत्व में उच्च शिक्षा हासिल की. डॉ मोहनलाल चढ़ार 2003 से लगातार एरण पर शोध कर रहे हैं. उनको एरण की ताम्र पाषाणकालीन संस्कृति पर जूनियर रिसर्च और दो साल बाद इसी विषय पर सीनियर रिसर्च फैलोशिप भी हासिल हुई.
2007 से 2010 तक वो सागर विश्वविद्यालय में अध्यापन करते रहे और फिर उनका चयन इंदिरा गांधी जनजातीय विश्वविद्यालय अमरकंटक में असि. प्रोफेसर के पद पर हुआ. उनके अब तक 105 रिसर्च पेपर और 14 पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं. हाल ही में 2024 में प्रकाशित रिसर्च पेपर ' एरण: द रिच कल्चरल हेरिटेज एंड लास्ट सिविलाइजेशन' के कारण वो चर्चा में आए और इसी वजह से अंतर्राष्ट्रीय स्तर की उपलब्धि हासिल हुई है.
कैसे मिला डाॅ मोहनलाल चढ़ार को देश में पहला स्थान
अपनी उपलब्धि के बारे में ईटीवी भारत से खास चर्चा में डाॅ. मोहन लाल चढ़ार ने बताया कि "वर्ल्ड लेवल रैकिंग डिजिटल प्लेटफार्म के जरिए तैयार की जाती है. इसमें साइंटिस्ट के रिसर्च के स्तर के आधार पर रिसर्च आईडी तैयार की जाती है. जिनमें वर्ल्ड लेवल रिसर्च को ही स्थान मिल पाता है. इसके अलावा एक एच इंडेक्स तैयार होता है, जिसे हाई इंडेक्स कहा जाता है. हाई इंडेक्स तब आता है, जब दुनिया भर के हजारों लोग आपकी रिसर्च को सर्च कर पढ़ रहे होते हैं. मैनें एक रिसर्च बैगा टेटू पर की है, जिसे एक महीने के भीतर दुनिया के 15-20 देशों के लोग बडे़ पैमाने पर सर्च करते हैं.

इस तरह के बहुत सारे मानक होते हैं. फिलहाल मेरे रिसर्च वर्क को भारत में एच इंडेक्स पर देखा जा रहा है. एरण पर अंग्रेजी में लिखी मेरी किताब एरण द रिच कल्चरल हेरिटेज एंड लास्ट सिविलाइजेशन एक इंडेक्स बुक है. इसमें एरण की तमाम जानकारियां मौजूद है. सागर यूनिवर्सिटी द्वारा किए गए उत्खनन की जानकारी है. इन सब आधारों पर मुझे पुरातत्व के क्षेत्र में देश में पहला स्थान हासिल हुआ है.

मध्य भारत का बड़ा नगर और व्यापारिक राजमार्ग पर स्थित था एरण
प्रो. डाॅ मोहनलाल चढ़ार बताते हैं कि "एरण एक ऐसा पुरास्थल है, जो पाषाणकाल से हड़प्पा काल की समकालीन ग्रामीण संस्कृतियां चली आ रही है. जिसे ताम्रपाषाण कालीन संस्कृति कहा जाता है, तब से स्थित है. उसके बाद महाजनपदकाल है, जिसमें भारत में बडे़-बडे़ नगरों का उदय हुआ. उसमें चेदी महाजनपद के अंतर्गत एरण आता था. एरण और अवंति महाजनपद उस समय मध्य भारत के दो बडे़ महाजनपद थे. उस समय एरण प्रमुख नगर और प्रमुख व्यापारिक राजमार्ग पर स्थित था. जो मथुरा से लेकर यमुना नदी के किनारे मऊरानीपुर, हमीरपुर जहां बेतवा यमुना नदी में मिलती है. वहां से मऊरानीपुर से एरथ और फिर एरण, उदयपुर, विदिशा, भोपाल होते हुए होशंगाबाद नर्मदा नदी के किनारे-किनारे महेश्वर और महेश्वर से उज्जियनी से भृगुकच्छ तक जाता था.

एरण में भारत के प्राचीनतम सिक्के और कई राजवंश की थी टकसाल
डाॅ मोहनलाल चढ़ार बताते हैं कि यहां मौर्यकाल से लेकर शुंगकाल, कुषाणकाल, नाग शासकों के सिक्के मिले है. भारत के प्राचीनतम और शुरुआती सिक्के यहां मिले हैं. उसके अलावा एरण में टकसाल थी, कई राजवंशों के समय टकसाल रही है. यहां पर समुद्रगुप्त आया था और एरण को अपनी स्वभोग नगरी बनाया. कोलकाता संग्रहालय में रखे एरण अभिलेख में लिखा है कि एरण में समुद्रगुप्त आया, उसने इसे स्वभोगनगरी के रूप में स्थापित किया. यहां पर उसने विशाल विष्णु मंदिर स्थापित किया था.
अभिलेख में लिखा है कि समुद्रगुप्त अपनी पत्नी, पुत्र और पौत्रों के साथ आया था. इसका मतलब ये है कि यहां पर समुद्रगुप्त वृद्ध अवस्था में आया था. ये गुप्त साम्राज्य की सैनिक छावनी थी, क्योंकि उस समय पर शकों का आक्रमण हो रहा था. एरण की भौगोलिक स्थिति इतनी अच्छी है, कि तीन तरफ से नदी से घिरा हुआ था और एक तरफ कोटिफिकेशन वाॅल बनी हुई थी, जो 1785 तक स्थापित रही.

पाषाणकाल से आधुनिक काल की संस्कृतियों का क्रमबद्ध विकास
पूरे भारत की संस्कृतियों का क्रम अगर पाषाणकाल से आधुनिक काल तक का क्रम देखना है, तो पूरे भारत में एरण मात्र एक ऐसा पुरास्थान है. जहां संस्कृतियों का क्रमिक विकास देख सकते हैं. एरण को अब तक वर्ल्ड हैरिटेज घोषित हो जाना था, अब तक नहीं हो पाया, लेकिन अभी काफी काम चल रहा है. अभी नरसिंह की गुप्तकाल की प्रतिमा भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग को खड़ा किया है. भारत का पहला सती स्तंभ को खड़ा किया गया है. अब एरण का काफी विकास हो रहा है. आज जाकर थोड़ा संतुष्टि है कि इंटरनेट पर एरण को लेकर काफी सामग्री मौजूद है.
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अब आम आदमी एरण को जानने लगा है. सागर विश्वविद्यालय में मैंने सामाजिक विज्ञान में सर्वाधिक अंक हासिल किए थे, तो मुझे गौर सम्मान से सम्मानित किया गया था. जिसमें कहा गया था कि मोहनलाल चढ़ार को सामाजिक विज्ञान में सर्वाधिक अंक अर्जित कर विश्वविद्यालय को गौरवान्वित करने के लिए ये सम्मान दिया जा रहा था, तब मैंने संकल्प लिया कि महान डाॅ गौर के विश्वविद्यालय का मुझे गौरव माना जा रहा है, तो मैंने प्रण कर लिया था कि अगर मैं कुछ कर पाया, तो सागर यूनिवर्सिटी को और एरण को विश्व स्तर पर सम्मान दिलाऊंगा. मुझे विश्वास है कि एरण वर्ल्ड हेरिटेज में जरूर जुडे़गा.

