हिसार के भाईयों का कमाल, कश्मीर की केसर कमरे में उगाकर हो गए मालामाल
हिसार के रहने वाले दो भाई कश्मीर में होने वाली केसर की खेती घर के कमरे में कर रहे हैं और पैसा कमा रहे हैं.

Published : April 4, 2025 at 7:23 PM IST
हिसार (प्रवीण कुमार) : केसर यूं तो कश्मीर की खूबसूरत वादियों में उगाई जाती है लेकिन हरियाणा के हिसार के रहने वाले दो भाईयों ने अपने घर के कमरे में ही केसर को उगा डाला है और जमकर कमाई भी कर रहे हैं.
कमरे में केसर की खेती : कहते हैं कि पूरी शिद्दत के साथ मेहनत करो तो ज़िंदगी में क्या हासिल नहीं हो सकता. इसे सच कर दिखाया है कि हिसार के आजाद नगर के दो युवा भाईयों ने जिन्होंने अपने घर के एक हिस्से को ही कश्मीर जैसा बना डाला है. दरअसल दोनों भाई अपने घर में छत के ऊपर कमरे में कश्मीर में होने वाली केसर की खेती कर रहे हैं और लाखों रुपए कमा रहे हैं. उन्हें ऐसा करते देखने वाले लोग खासे हैरान हैं.
यूट्यूब के जरिए आया आईडिया : नवीन सिंधु ने ईटीवी भारत को बताया कि यूट्यूब के जरिए उन्होंने देखा था कि गर्म देशों में भी केसर की खेती आसानी से की जा रही है. ऐसे में उस वीडियो को देखकर उन्हें हिसार के कमरे में खेती का आईडिया आया. वे साल 2018 से इसकी खेती कर रहे हैं. शुरुआती दौर में उन्होंने केसर के बीज जम्मू-कश्मीर से मंगवाए थे. घर के कमरे में उगाई गई केसर की सप्लाई देश के अलग-अलग हिस्सों के साथ ही अमेरिका, कनाडा, बांग्लादेश में भी कर रहे हैं. एक बार में तीन किलो तक केसर आसानी से उगा रहे हैं. मार्केट में फिलहाल एक किलो केसर क्वालिटी के हिसाब से साढ़े 3 लाख रुपए तक बिक रहा है. आज वे देश भर में कूरियर के जरिए भी डिमांड आने पर इसकी सप्लाई लोगों को कर रहे हैं.

शुरुआती कमाई 5 से 10 लाख : नवीन सिंधु ने बताया कि 15 फीट x 15 फीट के कमरे में भी आसानी से इसकी खेती हो जाती है. इंडोर खेती होने पर केसर की क्वालिटी बेहतर रहती है. कमरे को एयरटाइट करना जरूरी है. उन्होंने कहा कि शुरुआती कमाई ही 5 लाख से 10 लाख के बीच हो जाएगी.

एरोपोनिक तकनीक से कर रहे खेती : दोनों युवा भाई एरोपोनिक तकनीक के जरिए हिसार के कमरे में केसर की खेती कर रहे हैं. केसर की खेती के लिए जैसा वातावरण कश्मीर में रहता है, ठीक वैसा ही वातावरण दोनों ने तापमान को रेगुलेट कर हिसार के इस कमरे में केसर के पौधों को दिया है. केसर के पौधो को कमरे में उगाने के लिए मिट्टी का भी इस्तेमाल नहीं किया जा रहा है. पौधों को ह्यूमिडिटी के लिए मिस्ट(Mist) दिया जाता है. साथ ही एलईडी लाइटों का इस्तेमाल भी किया जा रहा है. दोनों भाईयों ने बताया कि 3 महीने के अंदर केसर की फसल हार्वेस्टिंग के लिए पूरी तरह से तैयार हो जाती है.

एरोपोनिक खेती क्या होती है? : एरोपोनिक खेती (Aeroponic Farming) एक आधुनिक खेती की तकनीक है जिसमें बिना मिट्टी के पौधों की जड़ों को हवा में रखा जाता है और उन्हें पोषक तत्वों के साथ पानी धुंध (Mist) के जरिए दिया जाता है. पारंपरिक खेती में जहां काफी ज्यादा पानी की दरकार होती है, वहीं ऐरोपोनिक खेती में इसके मुकाबले कम पानी की जरूरत पड़ती है. ऐसे में ये जलसंकट वाले क्षेत्रों के किसानों के लिए ज्यादा फायदेमंद है. इस तकनीक में तापमान को भी रेगुलेट किया जाता है, जिससे फसलों की गुणवत्ता बेहतर रह सके. ऐरोपोनिक तकनीक के जरिए कम जगह में ज्यादा फसल उगाई जा सकती है. यहां तक कि आप छतों और छोटी जगहों पर भी आसानी से खेती कर सकते हैं. साथ ही मिट्टी ना होने पर कीटनाशकों की भी जरूरत नहीं पड़ती. सामान्य खेती के मुकाबले पौधे इसमें 30-50% ज्यादा तेजी से बढ़ते हैं. साथ ही मौसम के बदलाव का फसल पर असर नहीं पड़ता. अगर खर्चे की बात करें तो पूरा सेटअप करने के लिए शुरुआती खर्चा 1 लाख रुपए का होता है, जो जगह के हिसाब से बढ़ता जाता है.

असली केसर की पहचान कैसे करें ? : नवीन सिंधु ने बताया कि हालांकि आजकल मार्केट में नकली केसर भी बिक रहा है. ओरिजनल केसर की पहचान बताते हुए उन्होंने कहा कि असली केसर को साफ पानी में डालने पर उसका रंग धीरे-धीरे हल्का पीला हो जाता है. वहीं नकली केसर पानी में डालने पर तुरंत रंग छोड़ देता है. यही ओरिजिनल केसर होती है. केसर को अगर जीभ पर रखा जाए तो ये जीभ को भी पीला कर देता है. इसका टेस्ट हल्का कड़वा होता है, जबकि नकली केसर मीठा या नमकीन हो सकता है. बनावट की बात की जाए तो असली केसर आगे से मोटा और पीछे से पतला होता है, जबकि नकली केसर एक समान मोटाई का हो सकता है. ख़ुशबू में असली केसर में एक खास स्ट्रॉन्ग अरोमा होता है, जबकि नकली केसर में ख़ुशबू कम या बिलकुल ना के बराबर होती है.

केसर के फायदे : नवीन सिंधु ने बताया कि डिप्रेशन के लिए केसर काफी ज्यादा फायदेमंद होता है. साथ ही आंखों और स्किन के लिए भी केसर अच्छा रहता है. दूध में केसर मिलाकर पीते हैं तो उसकी न्यूट्रीशन वैल्यू बढ़ जाती है. साथ ही ये याददाश्त बढ़ाने में भी मदद करती है. इसके अलावा केसर इम्यून सिस्टम को स्ट्रॉन्ग बनाने में भी मदद करता है. केसर का सेवन करने से वज़न भी कंट्रोल में रहता है. साथ ही इससे पाचन तंत्र को मजबूती मिलती है. वहीं केसर से ब्लड प्रेशर को भी कंट्रोल में रखने में मदद मिलती है. केसर को हार्ट डिजीज़ के लिए फायदेमंद माना जाता है.

"लाल सोना" भी कहलाता है केसर : आपको बता दें कि कश्मीर में होने वाले केसर को लाल सोना भी कहा जाता है.एक किलो केसर की कीमत साढ़े 3 लाख रुपए तक होती है.

100 से ज्यादा युवाओं को दे चुके ट्रेनिंग : हिसार के रहने वाले दोनों भाई प्रवीण सिंधु और नवीन सिंधु पिछले 7 साल से घर के कमरे में सफलतापूर्वक केसर की खेती बड़ी ही आसानी से कर रहे हैं. वे 100 से ज्यादा युवाओं को इसकी ट्रेनिंग भी दे चुके हैं. करनाल की यूनिवर्सिटी में भी वे ट्रेनिंग देने जाते हैं. नवीन सिंधु ने होटल मैनेजमेंट की पढ़ाई की है, जबकि प्रवीण सिंधु ने बीटेक की डिग्री हासिल कर रखी है. हिसार के कमरे में केसर उगाने पर उन्हें कई बार सम्मानित भी किया जा चुका है.


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