दशकों बाद बदले हालात, कभी बूढ़ापहाड़ इलाके में नक्सली खौफ के कारण नहीं फहराया जाता था तिरंगा!
आज झारखंड के बूढ़ापहाड़ इलाके में आजादी का जश्न है. लेकिन दशकों पहले हालात ऐसे नहीं थे.

Published : August 14, 2025 at 4:25 PM IST
|Updated : August 14, 2025 at 9:07 PM IST
पलामूः पूरा भारत देश का 79वां स्वतंत्रता दिवस का जश्न मनाने जा रहा है और कई तरह के समारोह आयोजित हो रहे हैं. लेकिन कुछ ऐसे भी इलाके है जहां तीन दशक तक किसी भी तरह का स्वतंत्रता दिवस पर समारोह का आयोजन नहीं हुआ था. माओवादियों के प्रभाव वाले इलाके में स्वतंत्रता दिवस पर किसी भी तरह का कार्यक्रम आयोजित करना एक बड़ी चुनौती थी.
झारखंड, छत्तीसगढ़ सीमा पर मौजूद बूढ़ापहाड़ के इलाके में तीन दशक तक माओवादियों का खौफ रहा. जिसके कारण स्वतंत्रता दिवस पर किसी भी तरह का कार्यक्रम का आयोजन नहीं होता था लेकिन आज हालात बदल गए हैं. तीन वर्षों से बूढ़ापहाड़ इलाके में स्वतंत्रता दिवस के मौके पर शान से तिरंगा लहरा रहा है. इस इलाके में सीआरपीएफ और झारखंड पुलिस के जवान स्वतंत्रता दिवस समारोह का नेतृत्व करते हैं और ग्रामीणों के साथ धूमधाम से समारोह का आयोजन होता है.
2023 में पहली बार आयोजित हुआ था स्वतंत्रता दिवस समारोह
प्रतिबंधित नक्सली संगठन भाकपा माओवादी का झारखंड, बिहार और छत्तीसगढ़ सीमा पर बूढ़ापहाड़ सबसे बड़ा ट्रेनिंग सेंटर रहा. बूढ़ापहाड़ पर कब्जे के बाद सुरक्षा बलों ने सबसे पहले 23 अक्टूबर 2022 को पहली बार तिरंगा फहराया था. 27 जनवरी 2023 को झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन बूढ़ापहाड़ पर पहुंचे थे. जबकि इसी साल पहली बार बूढ़ापहाड़ के इलाके में स्वतंत्रता दिवस पर समारोह का आयोजन हुआ था. बूढ़ापहाड़ पर सुरक्षा बलों के कब्जे के बाद कई ऐसे गांव थे जहां पहली बार झंडातोलन हुआ है. जबकि बूढ़ापहाड़ से सटे इलाको में 2024 में पहली बार विधानसभा और लोकसभा का चुनाव भी हुआ.
स्वतंत्रता दिवस को लेकर खास तैयारी
बूढ़ापहाड़ के इलाके में स्वतंत्रता दिवस को लेकर खास तैयारी की गई है. यहां 2023 से लगातार समारोह आयोजित हो रहे हैं. समारोह का नेतृत्व केंद्रीय रिजर्व बल सीआरपीएफ करता है. इस दौरान बड़ी संख्या में स्कूली बच्चे सीआरपीएफ के जवानों के साथ जुलूस निकालते हैं एवं स्वतंत्रता दिवस समारोह में ग्रामीणों की भागीदारी होती है. बूढ़ापहाड़ के इलाके में 27 गांव और 89 टोला मौजूद है. इलाके के हेसातू, कुल्हि, पुंदाग, झालुडेरा, बहेराटोली समेत कई इलाकों में सीआरपीएफ के ग्रमीण मिलकर स्वतंत्रता दिवस समारोह में लेते हैं.
बूढ़ापहाड़ नक्सल मुक्त हो गया है वहां सीआरपीएफ और पुलिस मौजूद है. स्वतंत्रता दिवस को लेकर तैयारियां की जा रही है और समारोह का आयोजन होना है. इलाके में एक अच्छा माहौल भी है और पुलिस अलर्ट है. नक्सलियों खिलाफ अभियान भी चलाया जा रहा है. -सुनील भास्कर, आईजी, पलामू.
स्वतंत्रता दिवस समारोह के तैयार चल रही है लोग हर्षोल्लास से भाग ले रहे हैं. वैसे इलाके जो सुदूरवर्ती इलाकों के लिए भी तैयारी की गई है और लोग भय मुक्त होकर समारोह में भाग लेंगे. -नौशाद आलम, डीआईजी, पलामू.
माओवादी जारी करते थे फरमान
बूढ़ापहाड़ के इलाके में माओवादियों के फरमान के कारण किसी भी तरह का राष्ट्रीय समारोह का आयोजन नहीं होता था. ग्रामीण स्वतंत्रता दिवस और गणतंत्र दिवस के समारोह में भाग नहीं लेते थे. बूढ़ापहाड़ के इलाके के सोनमती देवी ने बताया माओवादियों की बात नहीं मानने उनके साथ मारपीट की जाती थी और उनके खिलाफ कार्रवाई भी की जाती. ग्रामीण इमामुद्दीन ने बताया कि इलाके में किसी भी तरह का झंडोतोलन नहीं होता था. लेकिन अब हालात बदल गए हैं आप उन्हें काफी अच्छा लग रहा है. स्वतंत्रता दिवस स्वतंत्रता दिवस पर समारोह आयोजित हो रहे हैं.
अभियान ऑक्टोपस ने बदले बूढ़ापहाड़ के हालात
बूढ़ापहाड़ का इलाका माओवादियों का सबसे बड़ा ट्रेनिंग सेंटर रहा. सितंबर 2022 में बूढ़ापहाड़ के इलाके में सुरक्षाबलों ने माओवादियों के खिलाफ अभियान ऑक्टोपस शुरू किया था. जनवरी 2023 में बूढ़ापहाड़ को पहली बार आधिकारिक तौर पर नक्सल मुक्त घोषित किया गया था. करीब 52 वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ बूढ़ापहाड़ लातेहार, गढ़वा और छत्तीसगढ़ सीमा तक फैला हुआ है. 2013 में माओवादियों ने बूढ़ापहाड़ के इलाके को अपना ट्रेनिंग सेंटर के रूप में स्थापित किया था. झारखंड में माओवादियों की सबसे बड़ी टुकड़ी इसी इलाके में सक्रिय रहती थी. बूढ़ापहाड़ पर अभियान ऑक्टोपस माओवादीयों के खिलाफ सबसे सफल अभियान माना जाता है.
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