'शराब मिलने पर घर सील करना मनमाना..' पटना हाईकोर्ट ने बिहार शराबबंदी कानून को बताया 'ड्रैकोनियन'
पटना हाईकोर्ट ने शराबबंदी कानून को ड्रैकोनियन करार दिया और अधिकारियों के मनमाने अधिकारों पर चिंता जताते हुए याचिकाकर्ता को राहत दी-

Published : September 13, 2025 at 10:17 PM IST
पटना : बिहार की पटना हाईकोर्ट ने बिहार निषेध और उत्पाद शुल्क अधिनियम 2016 और नियम 2021 पर कड़ी आपत्ति जताई है. कोर्ट ने इन्हें 'ड्रैकोनियन लॉ' करार देते हुए कहा कि ये प्रावधान अधिकारियों को बेलगाम अधिकार देते हैं. इससे घरों को जब्त करने का खतरनाक ट्रेंड शुरू हो गया है.
'शराब मिलने पर घर सील करना मनमाना' : एक्टिंग चीफ जस्टिस पीबी बाजनथ्री और जस्टिस एसबी पीडी सिंह की खंडपीठ महेंद्र प्रसाद सिंह की याचिका पर सुनवाई कर रही थी. याचिकाकर्ता का घर इस वजह से सील कर दिया गया था क्योंकि उसके परिसर से शराब बरामद हुई थी. जबकि उसका कहना था कि उसे इसकी जानकारी नहीं थी. कोर्ट ने कहा कि सिर्फ कानून में शामिल होने से किसी का घर सील करना या नीलाम करना मनमाना कदम है.
अपर्याप्त दिशा-निर्देश पर चिंता : कोर्ट ने धारा 57 बी और नियम 12 बी, 13 बी और 14 को अपर्याप्त बताया. कोर्ट ने कहा कि राज्य सरकार को भले ही दिशानिर्देश बनाने की शक्ति है, लेकिन स्पष्ट गाइडलाइन के अभाव में इनका दुरुपयोग हो सकता है.
कोर्ट ने उठाए अहम सवाल : कोर्ट ने कड़ी आपत्ति जताते हुए सवाल खड़े किए कि क्या यदि किसी किराए के घर से शराब मिलती है तो क्या मकान मालिक को भी आरोपी बनाया जाएगा. यही नहीं यदि संयुक्त परिवार का एक सदस्य शराब रखे तो क्या पूरा घर सील होगा? अदालत ने ये भी पूछा कि क्या सरकारी क्वार्टर से शराब मिले तो क्या सरकार उसे नीलाम करेगी?
जुर्माने की असंगत व्यवस्था : कोर्ट ने जुर्माने की व्यवस्था को भी असंगत बताया और कहा कि न्यूनतम जुर्माना एक लाख रुपये है, चाहे 100 मिलीलीटर शराब मिले या 1 लाख लीटर. यह प्रावधान अनुचित है और अनुच्छेद 19(6) की भावना के खिलाफ है.
याचिकाकर्ता को मिली राहत : कोर्ट ने कहा कि मकान मालिक को उसकी जानकारी या मंशा के बिना पकड़ी गई शराब के लिए परेशान नहीं किया जा सकता. इसी आधार पर कोर्ट ने अधिकारियों को याचिकाकर्ता का घर तत्काल खोलने का निर्देश दिया और रिट याचिका को स्वीकार कर लिया.
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