Explainer : बिहार में ऑर्डिनेंस फैक्ट्री कॉरिडोर, देश का नया 'हथियार हब' बनेगा, जानिए कैसे?.
बिहार में ऑर्डिनेंस फैक्ट्री कॉरिडोर बनाया जाना है. सरकार के फैसले के बाद बंद पड़े बंदूक के कारखानों को संजीवनी मिली है.

Published : June 28, 2025 at 3:35 PM IST
मुंगेर: ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहरों को सहज कर रखने वाले बिहार की पहचान अब आधुनिक हथियारों के निर्माण के लिए भी होगा. सरकार ने राज्य में 'ऑर्डिनेंस फैक्ट्री कॉरिडोर' बनाने का फैसला लिया गया है. बिहार के उद्योग मंत्री नीतीश मिश्रा ने इससे जुड़ा प्रस्ताव केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के पास स्वीकृति के लिए भेजा है. इस फैसले के बाद ना सिर्फ देश की रक्षा ताकत बढ़ाने में बिहार अहम रोल निभायेगा, बल्कि 1 लाख लोगों को रोजगार भी देगा. विस्तार से जानें बंदूकों के शहर मुंगेर की कहानी.
मुंगेर बंदूक कारखाना: आए दिन मुंगेर से अवैध हथियार बरामद किए जाते हैं. जिले का हथियारों से पुराना नाता रहा है. चाहे बात अवैध हथियारों की हो या सरकारी कारखाने में बनने वाले वैध हथियार की, मुंगेर में दोनों तरह के हथियार बनाए जाते हैं.

मीर कासिम ने बनाया था कट्टा: बंगाल के नवाब मीर कासिम ने अंग्रेजों से लोहा लेने के लिए पहला कट्टा बनाया था. मीर कासिम ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी के समर्थन से नवाब बने थे. लेकिन इसके लिए कासिम को भव्य उपहार देकर कीमत चुकानी पड़ी थी. अंग्रेजी हुकूमत से मीर कासिम परेशान हो चुके थे, नतीजतन मीर कासिम और अंग्रेजों के बीच बिहार के बक्सर में लड़ाई हुई थी. यह युद्ध 22 और 23 अक्टूबर 1764 को लड़ी गई थी. कहा जाता है कि इस दौरान मीर कासिम ने मुंगेर में ही लड़ाई लड़ने के लिए पहला कट्टा बनाया था.
अवैध गन फैक्ट्रियों का अड्डा कैसे बना: समय के साथ मुंगेर में बहुत कुछ बदलता गया. सरकारी कारखाने में लाइसेंस प्रणाली की जटिलता के कारण सरकारी हथियारों की बिक्री पर असर पड़ा. इसके कारण सरकारी हथियारों की मांग कम होने लगी. ऐसे में यहां के कुशल कारीगर अवैध तरीके से हथियार बनाने के काम में जुट गए. यहां के कारीगर सिर्फ मुंगर ही नहीं बल्कि पश्चिम बंगाल, यूपी, झारखंड समेत कई राज्यों में जाकर अवैध रूप से आर्म्स का निर्माण कर रहे हैं.
हथियारों का लाइसेंस जारी नहीं किए जाने के कारण बंदूक कारखाने के चार इकाईयां बंद हो चुके हैं. पहले यहां 1500 कारीगर व अन्य कर्मी काम करते थे. अब उनकी संख्या घटकर दर्जनों में रह गई है. बंदूक उत्पादन में भारी कमी आने से इससे जुड़े कई व्यवसायियों पर भी मंदी का संकट मंडराने लगा है. हुनरमंद कारीगरों के बेरोजगार होने से अवैध बंदूकों व राइफलों के निर्माण में तेजी देखी जा रही है.
"ये बहुत अच्छी बात है कि बिहार सरकार और केंद्र सरकार दोनों ने यहां डिफेंस कोरिडोर बनाने का पहल की है. हम सभी सहयोग करेंगे. हमें भी इस फैसले से संजीवनी मिलेगी. कलस्टर तो बंद हो गया है, उसे भी चालू करवा दिया जाए तो बेहतर रहता."- शेखर कुमार शर्मा, डीलर, बंदूक कारखाना
'पांच लोग ही करते हैं काम': जानकारी देते हुए बंदूक कारखाना संचालक संदीप शर्मा ने बताया कि वर्तमान में इस कारखाने में पांच लोग ही अभी हथियार निर्माण कर रहे हैं. नए आर्म्स एक्ट के तहत सिंगल वैरल गन-एसबीबीएल और डल वैरल गल-डीबीबीएल बनाया जाता था.
"वर्ष 2016 से मुंगेर में फाइव शाट पंप एक्शन गन बनाने की स्वीकृति सरकार से मिली थी. पहले बंदूक फैक्ट्री में हर साल 12,882 से ज्यादा हथियार मुंगेर में बनाए जाते थे. वहीं आज सिमट कर दो हजार से भी नीचे तक पहुंच गया है."- संदीप शर्मा, बंदूक कारखाना संचालक
जटिल लाइसेंस प्रक्रिया: बिहार में लाइसेंस की प्रक्रिया और प्रणाली काफी जटिल है. पिछले कुछ सालों से लोगों को लाइसेंस नहीं दिया जा रहा है, जिसका असर है कि बंदूक निर्माण और आपूर्ति ठप होता जा रहा है.
बिहार में ऑर्डिनेंस फैक्ट्री कॉरिडोर: उद्योग विभाग ने बिहार में ऑर्डिनेंस फैक्ट्री कॉरिडोर बनाने का निर्णय लिया है. इस फैसले से कारखाने के कारीगरों और संचालकों में खुशी की लहर है. मुंगेर, बांका, जमुई,कैमूर और अरवल में डिफेंस कॉरिडोर विकसित किया जाएगा. वहीं भागलपुर, मुजफ्फरपुर, शेखपुरा और सारण को भी संभावित स्थल के रूप में चुना गया है. कारीगरों का कहना है कि सरकार के इस फैसले से उनको फायदा होगा, बंदी में पहुंचे कारखाने को संजीवनी मिली है. साथ ही अवैध हथियारों के निर्माण में भी कमी आएगी. वहीं फैक्ट्री में गोला-बारूद, अत्याधुनिक राइफलें, रॉकेट लॉन्चर, मशीनगन, ड्रोन और बाय मॉड्यूलर चार्ज सिस्टम का निर्माण होगा.

"सरकार ने जो डिफेंस कॉरिडोर का प्रस्ताव दिया है उससे अगर मुंगेर के बंदूक कारखाने को बूस्ट मिलता है तो बहुत अच्छा है. यहां के लोग 200 सालों से बंदूक या आर्म्स के निर्माण कार्य और ट्रेड में रहे हैं और अच्छे कारीगर हैं. बिहार सरकार की पहल के लिए हम उनका शुक्रिया अदा करना चाहते हैं."- राजेश कुमार शर्मा, सचिव, आर्म्स एसोसिएशन

मैन पावर में कटौती: संदीप शर्मा ने बताया कि सालाना उत्पादन निर्धारित कोटे से काफी कम हो जाने के चलते यहां कार्यरत कर्मियों में भी भारी कटौती कर दी गई है. मुंगेर की पहचान कही जाने वाली इस बंदूक कारखाना में शुरुआती दिनों में 36 बंदूक निर्माण इकाईयां थी,जिसको लेकर 22 बंदूक निर्माण इकाइयों की स्वीकृति प्रदान की है. जबकि शेष 15 प्रक्रियाधीन है.
"राज्य सरकार की पहल से अगर सबकुछ ठीक रहा तो आने वाले समय मे मुंगेर में ही यहां के बने हथियारों की टेस्टिंग की जा सकेगी, जिसके लिए निजी क्षेत्र के कंपनियों द्वारा यहां हथियार टेस्टिंग इकाई स्थापित हो सकेगी."-संदीप शर्मा, बंदूक कारखाना संचालक
डबल बैरल गन का बाजार खत्म: मुंगेर के कुशल कारीगर सभी आधुनिक हथियार का निर्माण कर सकते हैं. मुंगेर बंदूक कारखाना में काम करने वाले कारीगर ऐसे माहिर हैं कि वे अपनी कुशल कारीगिरी से अतिआधुनिक हथियार का निर्माण कर सकते हैं. कारखाना में काम करने वाले कारीगरों की मानें तो अब डबल बैरल गन का बाजार लगभग खत्म हो चुका है.
किसी भी मायने में कम नहीं मुंगेर के बने हथियार: हालांकि पहले इसे स्टेटस सिंबल के रूप में देखा जाता था. यहां के कारखाना में काम करने वाली इकाइयों को लाइसेंस और सुविधाएं मिले तो वे किसी भी हथियार का निर्माण कर सकते हैं. यहां निर्मित हथियार विदेशों या देश की आर्डिनेंस फैक्ट्री में बनने वाले हथियारों से किसी भी मायने में कम नहीं होंगे.

हथियार असेंबलिंग व फिनिशिंग : बंदूक कारखाना के बाहर बनने वाले अवैध हथियार मुंगेर के सिंडिकेट के रूप में देश में जाना जाता है. मुंगेर जिला अवैध हथियारों की असेंबलिंग व फिनिशिंग के लिए बेजोड़ कारीगिरी के लिए जाना जाता है. पुलिस की दबिश के कारण यहां के कारीगर राज्य से बाहर जाकर आधे-अधूरे हथियार का निर्माण करने के बाद वापस मुंगेर लेकर अर्धनिर्मित हथियार असेंबलिंग और फिनिशिंग कर बाजार में बेचते हैं.
धड़ल्ले से बन रहे अवैध हथियार: मुंगेर काे अवैध हथियार निर्माण का गढ़ भी माना जाता है. पुलिस बार-बार अवैध तरीके से हथियार निर्माण को लेकर जे के विभिन्न जगहों पर छापेमारी कर सैकड़ों मिनी गन फैक्ट्री का उद्भेदन करती रही है. बावजूद इसके अवैध हथियार का निर्माण कर तस्कर बाजार में उपलब्ध करा रहे हैं.
कितनी मिनी गन फैक्ट्रियां पकड़ी गई?: बीते साल 2024 में पटना समेत पूरे बिहार में अवैध मिनी गन फैक्ट्री का खुलासे की 70 से अधिक खबरें सामने आयी थीं. इसका खुलासा खुद पुलिस ने ही किया है. मुंगेर एसपी सैयद इमरान मसूद के मुताबिक अप्रैल 2025 तक 5 मिनी गन फैक्ट्री का खुलासा किया था. वहीं 2021 में 61 मिनी गन फैक्ट्री का खुलासा हुआ तो 2022 में 32 और 2023 में 23 अवैध मिनी गन फैक्ट्री का उद्भेदन किया गया.

मुंगेर का मिनी गन फैक्ट्री: जिले के तौफिर दियारा, कुतलुपुर, जाफरनगर, टीकारामपुर, बिदवारा, मिर्जापुर बरदह, शामपुर, लालदरवाजा, शंकरपुर, मोहली, हसनगंज, लल्लु पोखर इलाकों में अवैध रूप से हथियार बनाया जाता है. मिर्जापुर बरदह गांव अवैध हथियारों के लिए जानी जाती है. यहां अवैध रूप पिस्टल से लेकर अवैध हथियार तक तैयार होती है. देशभर के अपराधी सस्ते हथियारों के लिए मुंगेर के तस्करों से संपर्क करते हैं. हथियार की खरीद-फरोख्त के लिए देश भर में मुंगेर के अवैध हथियारों की खासी पहचान है.
"मुंगेर बंदूक फैक्ट्री में बहुत कुछ बदलाव आया है. बहुत कम लोग ही फैक्ट्री में हथियार का निर्माण कर रहे हैं."- सौरभ निधि, संचालक, वाइजर कंपनी
कारीगरों को तस्करों ने किया हाइजैक: मुंगेर बंदूक कारखाना के हाशिये पर जाने के कारण यहां हथियारों का निर्माण कम होने लगा,जिसके कारण कारखना से बेरोजगार हुए हुनरमंद कारीगर भुखमरी के कगार पर पहुंचने लगे,जिसके बाद वही कारीगर अवैध हथियार के निर्माण में जुटने लगे.

80 के दशक से जोर पकड़ने लगा धंधा: 80 के दशक से मुंगेर में अवैध हथियारों के निर्माण का धंधा जोर पकड़ने लगा. अवैध हथियार तस्कर यहां के कारीगरों से हथियार बनाने के लिए उन पैसे का प्रलोभन देने लगे. ज्यादा पैसा मिलने के कारण कारखाने से बेराेजगार हुए कुशल कारीगर अवैध धंधे में जुड़ते चले गए.
पश्चिम बंगाल में होती है टेस्टिंग: मुंगेर बंदूक कारखाना में बने हथियार की टेस्टिंग पश्चिम बंगाल के इच्छापुर स्थित आर्डिनेंस फैक्ट्री में होती है. यहां से जांच परखने के बाद हथियारों के निर्माण के लिए देश भर के हथियार विक्रेता जिलाधिकारी को पत्र भेजते हैं, इसके बाद संबंधित आर्म्स बनाए जाते हैं.
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