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उमर अब्दुल्ला ने बाढ़ प्रभावित इलाकों का किया दौरा, प्रभावित परिवारों को मदद का आश्वासन

जम्मू में उफनती तवी, चिनाब, बसंतर और उझ नदियों के पानी ने कई स्थानों पर तटबंधों को तोड़ दिया, जिससे दर्जनों गांव जलमग्न हो गए.

Jammu Kashmir Flood
जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने अनंतनाग में बाढ़ प्रभावित इलाकों का दौरा किया. (PTI)
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By ETV Bharat Hindi Team

Published : September 6, 2025 at 2:20 PM IST

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श्रीनगर: जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने शनिवार को अनंतनाग जिले के बाढ़ प्रभावित इलाकों का दौरा किया. उन्होंने प्रभावित लोगों के परिवारों से मुलाकात की और घरों, सड़कों, निजी और सार्वजनिक संपत्तियों को हुए नुकसान का व्यक्तिगत रूप से आकलन किया. बाद में उन्होंने डाक बंगले में जिला प्रशासन के अधिकारियों के साथ बैठक कर बाढ़ के बाद की स्थिति और पुनर्निर्माण कार्यों का जायजा लिया.

मुख्यमंत्री अब्दुल्ला ने प्रभावित परिवारों को आश्वासन दिया कि उन्हें सभी प्रकार की सहायता उपलब्ध कराई जाएगी. बाढ़ से प्रभावित लोगों को राहत और सहायता प्रदान करने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाए जाएंगे. उपमुख्यमंत्री सुरेन्द्र कुमार चौधरी, कैबिनेट मंत्री सकीना इटू और जावेद राणा के अलावा विधायक अल्ताफ कालू, मजीद लारमी, डॉ. बशीर वीरी, रियाज खान और जफर खट्टाना भी मुख्यमंत्री के साथ थे.

Jammu Kashmir Flood
जम्मू-कश्मीर में नदियों में उफनती पानी. (PTI)

बता दें कि जम्मू-कश्मीर 14 अगस्त के बाद से सबसे भीषण बाढ़ की चपेट में है. किश्तवाड़ जिले के चशोती गांव में बादल फटने से 67 लोग मारे गए थे, जिनमें से ज्यादातर मचैल माता यात्रा के तीर्थयात्री थे और 100 से अधिक अन्य घायल हो गए थे. 26 अगस्त को भूस्खलन में श्री माता वैष्णो देवी मंदिर के 35 तीर्थयात्रियों की मौत हो गई थी.

जम्मू संभाग में उफनती तवी, चिनाब, बसंतर और उझ नदियों के पानी ने कई स्थानों पर उनके तटबंधों को तोड़ दिया, जिससे जम्मू, सांबा और कठुआ के दर्जनों गांव जलमग्न हो गए. घाटी में झेलम नदी के उफान से आई बाढ़ ने भी भारी तबाही मचाई, खासकर बडगाम जिले में झेलम नदी के तटबंध टूटने के बाद जलमग्न हो गए.

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जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने अनंतनाग में बाढ़ प्रभावित इलाकों का दौरा किया. (PTI)

अनंतनाग और पुलवामा अन्य जिलों में बाढ़ के पानी ने फलदार पेड़ों को बहा दिया और कई सेब के बागानों को जलमग्न कर दिया, जिनमें पेड़ फलों से लदे हुए थे. लगातार बारिश और तेज हवा के कारण धान की फसल के तहत लगी सैकड़ों एकड़ भूमि को भी भारी नुकसान पहुंचा है, जिससे फसलें नष्ट हो गई हैं.

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