'BJP के एजेंडे को लागू कर रही उमर अब्दुल्ला सरकार': 'जमात स्कूल' मामले पर महबूबा का हमला
जम्मू-कश्मीर में जमात-ए-इस्लामी और एफएटी से संबद्ध 215 स्कूलों का प्रबंधन सरकार ने अपने नियंत्रण में लेने का आदेश दिया. इस पर राजनीति गरमा गयी.


Published : August 24, 2025 at 1:45 PM IST
श्रीनगर: जम्मू-कश्मीर सरकार द्वारा प्रतिबंधित सामाजिक-धार्मिक संगठन जमात-ए-इस्लामी (जेईआई) से जुड़े 215 स्कूलों का प्रबंधन अपने हाथ में लेने के फैसले का विपक्षी दलों ने नाराजगी जतायी है. कुछ ने इसे नेशनल कॉन्फ्रेंस (एनसी) के नेतृत्व वाली राज्य सरकार द्वारा "विश्वासघात" करार दिया, जबकि अन्य ने इसे 'भाजपा के एजेंडे' का क्रियान्वयन बताया.
पूर्व मुख्यमंत्री और पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) की अध्यक्ष महबूबा मुफ़्ती ने इसे जम्मू-कश्मीर की संस्थाओं पर एक और हमला करार दिया. उन्होंने सत्तारूढ़ पार्टी पर जम्मू-कश्मीर में अपने ही लोगों के ख़िलाफ़ जाकर भाजपा का एजेंडा लागू करने का भी आरोप लगाया.

महबूबा मुफ्ती ने "मैं इसे जम्मू कश्मीर की संस्कृति और पहचान से जोड़ रही हूं. क्योंकि यहां बहुत कम स्कूल हैं जो इस्लामी शिक्षा के साथ नियमित शिक्षा प्रदान करते हैं. पहले जमात-ए-इस्लामी जेईआई की संपत्ति पर कब्ज़ा कर लिया गया और उस पर प्रतिबंध लगा दिया गया, लेकिन जम्मू-कश्मीर के लोगों को भरोसा था कि एक बार निर्वाचित सरकार बन जाने पर हमारी पहचान और संस्थाओं पर इस तरह के हमले बंद हो जाएंगे."
मुफ्ती ने यह भी आरोप लगाया कि उर्दू को सरकारी कार्यालयों और स्कूल की पाठ्यपुस्तकों से हटाया जा रहा है, और एनसी सरकार चुप बैठी है. उन्होंने कहा, "इस बार, यह इस प्रक्रिया में भागीदार है. दुर्भाग्य से, वे अपने ही लोगों के खिलाफ जाकर भाजपा का एजेंडा लागू कर रहे हैं."
215 schools forcibly taken over by the J and K Government. And no prizes for guessing. The elected government has passed the order.
— Sajad Lone (@sajadlone) August 22, 2025
Shame and shamelessness have assumed new meanings in this government. They are setting new standards in servility. And just to recall the sermons…
पीपुल्स कॉन्फ्रेंस (पीसी) प्रमुख सज्जाद लोन ने भी इस मुद्दे पर मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के नेतृत्व वाली सरकार की आलोचना करते हुए सोशल मीडिया एक्स पर लिखा, "जम्मू-कश्मीर सरकार ने 215 स्कूलों पर जबरन कब्ज़ा कर लिया है. चुनी हुई सरकार ने यह आदेश पारित किया है. इस सरकार में शर्म और बेशर्मी ने नए मायने अपना लिए हैं. वे गुलामी के नए मानक स्थापित कर रहे हैं."
अपनी पार्टी के प्रमुख अल्ताफ बुखारी ने जेईआई स्कूलों के अधिग्रहण को बेहद अफसोसजनक बताया. बुखारी ने एक एक्स पोस्ट में कहा, "हालांकि जमात-ए-इस्लामी पर 2019 से प्रतिबंध लगा हुआ है, लेकिन एलजी प्रशासन एफएटी स्कूलों का प्रबंधन अपने हाथ में लेने से बचता रहा. फिर भी, एक मजबूत जनादेश के बावजूद, निर्वाचित सरकार ने ऐसा करने का फैसला किया है."
उन्होंने कहा कि जमात-ए-इस्लामी के साथ राजनीतिक और वैचारिक मतभेद हो सकते हैं, लेकिन इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता कि एफएटी स्कूलों ने दशकों से शिक्षा क्षेत्र में सकारात्मक और सराहनीय भूमिका निभाई है. उन्होंने मांग की कि सरकार अपना फैसला तुरंत वापस ले.
प्रतिबंधित जमात के सदस्यों द्वारा गठित पार्टी, जस्टिस एंड डेवलपमेंट फ्रंट (जेडीएफ), जेके ने भी सरकार के इस कदम की निंदा की. इसे एनसी के "विश्वासघात के इतिहास" की "दर्दनाक याद" करार दिया. फ्रंट ने सोशल मीडिया एक्स पर लिखा, "आज, हज़ारों छात्रों का भविष्य और अनगिनत शिक्षकों की आजीविका खतरे में है. सत्ता की आड़ में जनता की चीज़ों को छीनना शक्ति जैसा लग सकता है, लेकिन वास्तव में, यह न्याय पर एक गहरा घाव और जनता के विश्वास का अक्षम्य अपमान है."
We strongly denounce the UT Government’s order of handing over 215 FAT schools to D. Magistrates/Deputy Commissioners. This decision is not just an administrative overreach but a painful reminder of NC’s history of betrayal,recalling the mass rigging of 1987 1/3@OmarAbdullah
— Justice and Development Front JK (@JDFJandKashmir) August 22, 2025
भाजपा ने जैश-ए-मोहम्मद और फलाह आम ट्रस्ट (एफएटी) द्वारा संचालित 215 स्कूलों को अपने नियंत्रण में लेने के सरकार के फैसले का स्वागत किया है. पार्टी के जम्मू-कश्मीर प्रवक्ता अल्ताफ ठाकुर ने इस कदम को महत्वपूर्ण बताया और कहा कि इससे युवाओं में अलगाववादी सोच को रोका जा सकेगा. ठाकुर ने कहा कि शिक्षा मंत्री इस फैसले को लागू करने के लिए अनिच्छुक थे.
ठाकुर ने कहा, "यह फैसला राष्ट्रहित में लिया गया है, क्योंकि इस कदम से हजारों छात्रों के लिए एक सकारात्मक और सुरक्षित शैक्षणिक माहौल सुनिश्चित होगा. इस कदम से 51,000 से ज़्यादा बच्चे अलगाववादी विचारधारा का शिकार होने से बच गए हैं. इसके बजाय, अब उन्हें शिक्षा, खेल, तकनीक और अन्य क्षेत्रों में विशेषज्ञता हासिल करने और देश के विकास में योगदान देने के अवसर मिलेंगे."
वरिष्ठ एनसी नेता और शिक्षा मंत्री सकीना इटू ने कहा कि यह निर्णय अभिभावकों और शिक्षकों के अनुरोध के बाद लिया गया है, क्योंकि उनके बच्चों का भविष्य दांव पर है, क्योंकि लगभग 221 स्कूलों की प्रबंधन समिति का सीआईडी सत्यापन नकारात्मक आया है.

शिक्षा मंत्री ने कहा, "सीआईडी की प्रतिकूल रिपोर्ट के कारण 10वीं और 12वीं के विद्यार्थियों को बोर्ड परीक्षाओं और पंजीकरण के समय परेशानियों का सामना करना पड़ा. चूंकि फलाह-ए-आम ट्रस्ट के विद्यालयों की प्रबंध समितियों का कार्यकाल समाप्त हो चुका था, इसलिए हमने निर्णय लिया है कि इन विद्यालयों के विद्यार्थियों का भविष्य सुरक्षित रखने के लिए, निकटतम राजकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय के प्रधानाचार्य तीन महीने के लिए इन विद्यालयों के प्रभारी के रूप में कार्यभार संभालेंगे."
बता दें कि शुक्रवार को केंद्र शासित प्रदेश सरकार ने कथित तौर पर जमात-ए-इस्लामी और उसके सहयोगी संगठन एफएटी से संबद्ध 215 स्कूलों की प्रबंध समितियों को अपने नियंत्रण में लेने का आदेश दिया. सरकारी आदेश संख्या 578-जेके (शिक्षा) 2025 के अनुसार, यह निर्णय खुफिया एजेंसियों की प्रतिकूल रिपोर्टों के बाद लिया गया है, जिसमें इन संस्थानों को प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से प्रतिबंधित संगठन से जुड़ा हुआ बताया गया है.
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