आपदा नहीं रोक सकी आस्था की राह, उत्तराखंड चारधाम यात्रा ने तोड़े सारे रिकॉर्ड, जानिए कब बंद होंगे कपाट
तमाम मुश्किलों के बाद भी उत्तराखंड चारधाम यात्रा के भक्तों ने पिछले सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए है.

By ETV Bharat Uttarakhand Team
Published : October 10, 2025 at 4:27 PM IST
देहरादून: उत्तराखंड की चारधाम यात्रा अपने अंतिम चरण में है. इस बार चारधाम यात्रा पर मौसम का बड़ी मार पड़ी. भारी बारिश, आपदा और भूस्खलन जैसे तमाम कारणों के कारण चारधाम यात्रा लंबे समय तक प्रभावित रही, लेकिन ये मुश्किले भी चारधाम यात्रा के भक्तों की आस्था को नहीं डिगा पाई. ऐसे हालात में भी भक्तों की संख्या ने इस बार भी पिछले सारे रिकॉर्ड तोड़ते हुए नया कीर्तिमान स्थापित किया.
25 नवंबर को होगा चारधाम यात्रा का समापन: दीपावली के बाद 22 अक्टूबर, 23 अक्टूबर और 25 नवंबर को जब चारों धामों यमुनोत्री, गंगोत्री, केदारनाथ और बदरीनाथ के कपाट बंद होंगे, तब इस वर्ष की यात्रा का औपचारिक समापन होगा. लेकिन इस समापन से पहले ही चारधाम यात्रा ने नया इतिहास रच दिया.
मौसम साफ होते ही उमड़ी भक्तो की भीड़: उत्तराखंड इस साल जून और जुलाई के महीनों में जब राज्य के गढ़वाल मंडल में लगातार भारी बारिश हुई तो चारधाम यात्रा को कई बार रोकना पड़ा. कई मार्ग बंद हुए, पुल बह गए और सैकड़ों यात्री बीच रास्ते में फंसे. प्रशासन ने यात्रियों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए यात्रा को कुछ दिनों के लिए स्थगित भी कर दिया था, लेकिन जैसे ही मौसम सामान्य हुआ श्रद्धालुओं का सैलाब फिर से उमड़ पड़ा. यह वही अटूट आस्था थी जिसने इस बार के सभी पुराने रिकॉर्ड तोड़ दिए.
आंकड़ों में दर्ज हुआ नया इतिहास: सरकारी आंकड़े बताते हैं कि बुधवार तक केवल बदरीनाथ धाम में ही 14 लाख 53 हजार 827 श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंच चुके हैं, जबकि पिछले साल यानी 2024 में यह संख्या 14 लाख 35 हजार 341 थी. अभी बदरीनाथ के कपाट बंद होने में लगभग एक महीना बाकी है, जिससे यह आंकड़ा और ऊपर जाने की उम्मीद है.
इसी तरह से केदारनाथ धाम में भी श्रद्धालुओं का सैलाब दिखा. यहां अब तक 16 लाख 56 हजार से अधिक यात्रियों ने बाबा केदार के दर्शन किए हैं. 2024 में यह संख्या करीब 16 लाख 52 हजार थी. इस प्रकार इस वर्ष का आंकड़ा पहले ही 2024 से अधिक हो चुका है.
गंगोत्री और यमुनोत्री धाम में भी यात्रियों की संख्या अच्छी खासी रही. हालांकि गंगोत्री-यमुनोत्री मार्ग को इस बारिश ने सबसे अधिक नुकसान पहुंचाया है. इसलिए यात्रा बार-बार बाधित होती रही. फिर भी यहां काफी संख्या में भक्त पहुंचे. गंगोत्री धाम में सात लाख 35 हजार 615 श्रद्धालुओं ने दर्शन किए. वहीं यमुनोत्री धाम में 6 लाख 32 हजार 94 भक्तों ने दर्शन किए. अभी तक चारों धामों में दर्शन करने वाले भक्तों का आंकड़ा 47 लाख 76 हजार 49 के पार पहुंच चुका. प्रशासन का अनुमान है कि यात्रा समाप्त होते-होते यह संख्या 50 लाख का आंकड़ा पार कर जाएगी.
भारी बारिश में भी कम नहीं हुआ उत्साह: उत्तराखंड का मानसून इस बार बेहद डरावना रहा. उत्तराखंड में भारी बारिश के कारण इस बार जमकर तबाही हुई. रुद्रप्रयाग, चमोली, उत्तरकाशी और टिहरी में कई जगह सड़कें ध्वस्त हुईं. नदी-नाले उफान पर रहे और यात्रा मार्ग बाधित हुए. फिर भी श्रद्धालुओं की संख्या में कमी नहीं आई. जब रास्ते बंद हुए तो यात्रियों ने धैर्य रखा और पास के स्थानों में रुककर मौसम साफ होने का इंतजार किया. जैसे ही रास्ते खुले और यात्रा शुरू हुई तो हजारों भक्त धामों की तरफ निकल पड़े.
सरकार की अग्नि परीक्षा: आपदा के बाद यात्रा को फिर से सुचारू करना सरकार के लिए भी आसान नहीं था. मौसम के कारण इस बार भी चारधाम सरकार के लिए किसी अग्नि परीक्षा के कम नहीं थी, लेकिन धामी सरकार अग्नि परीक्षा पर खरी उतरी. मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी कई बार खुद ग्राउंड पर उतरे और हालात का जायजा लिया. तभी इस बार भी चारधाम यात्रा एक नया रिकॉर्ड बना पाई.
सरकार भी हैरान: इस बार बारिश के बाद प्रदेश में खासकर गढ़वाल में जिस तरह के हालात बने थे, उसे बाद किसी को भी उम्मीद नहीं थी कि अपने आखिरी समय में चारधाम यात्रा रफ्तार पकड़ेगी और भक्तों की संख्या फिर से एक नया रिकॉर्ड बनाएगी.
हम भी हैरान हैं कि इतनी बड़ी आपदा के बाद भी श्रद्धालु चारधाम यात्रा के लिए उत्तराखंड पहुंचे. यह सरकार की व्यवस्था और भक्तों की अटूट भक्ति का ही प्रताप है. हर हफ्ते चारधाम यात्रा की समीक्षा बैठक हो रही थी. सभी विभागों को निर्देश दिए गए थे कि किसी भी परिस्थिति में यात्रियों को असुविधा न हो. हमने आपदा की आशंका को ध्यान में रखते हुए वैकल्पिक मार्ग, हेलीकॉप्टर रेस्क्यू और मेडिकल टीमों की पहले से तैयारी कर रखी थी. यही वजह रही कि यात्रा बीच में रुकने के बावजूद बहुत जल्द पटरी पर लौट आई.
-बंशीधर तिवारी, सचिव, मुख्यमंत्री-
मुख्यमंत्री सचिव बंशीधर तिवारी ने बताया कि मानसून ने इस बार उत्तराखंड का काफी नुकसान पहुंचाया है. सरकार ने बीते साल 2024 के मुकाबले इस साल 2025 में चारधाम यात्रा की व्यवस्थाओं को काफी मजबूत किया था. सभी प्लान पहले से ही तैयार थे. यहीं कारण है कि बारिश के बाद जहां भी यात्रा फंसे उन्हें तुरंत निकाला गया और वैकल्पिक मार्ग भी खोले गए, जिस कारण यात्रा भी दोबारा शुरू हो पाई.
मुख्यमंत्री के सचिव बंशीधर तिवारी ने यह भी बताया कि सरकार अब 2026 की यात्रा को लेकर पहले से तैयारियां शुरू कर रही है. जब साल 2026 में यात्रा शुरू हो तो श्रद्धालुओं को एक नया अनुभव मिले. इसके लिए ऋषिकेश से लेकर बदरीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री तक कई सुधार कार्य शुरू कर दिए गए हैं. सड़क स्वास्थ्य संचार और आवास सुविधाओं में बड़ा सुधार किया जाएगा. इसके अलावा राज्य सरकार ग्रीन चारधाम मिशन के तहत पर्यावरण संरक्षण पर भी विशेष ध्यान दे रही है.
आर्थिक दृष्टि से भी बड़ी सफलता: चारधाम यात्रा उत्तराखंड की अर्थव्यवस्था की रीढ़ मानी जाती है. हर साल लाखों श्रद्धालु आते हैं, जिससे राज्य के पर्यटन, परिवहन, होटल और व्यापार क्षेत्रों को बड़ा फायदा होता है. केदारनाथ और बदरीनाथ में होटलों और धर्मशालाओं की बुकिंग महीनों पहले पूरी हो चुकी थी. हालांकि बारिश ने कुछ महीनो तक सभी स्थानीय निवासियों को बेहद परेशान भी रखा.
पढ़ें---

