रहस्यों से भरा गढ़कुंडार का किला, यहां गायब हो गई थी बारात
मध्य प्रदेश के बुंदेलखंड में मौजूद है रहस्यमयी किला, पास पहुंचते ही गायब हो जाता है गढ़कुंडार का किला, पढ़िए रोचक किस्से.

By ETV Bharat Madhya Pradesh Team
Published : August 21, 2025 at 6:40 PM IST
|Updated : August 21, 2025 at 7:48 PM IST
निवाड़ी (कपिल तिवारी): बुंदेलखंड की विरासत की बात करें, तो यहां खजुराहो, ओरछा जैसे एक से बढ़कर एक ऐतिहासिक स्थान है. यहां बनाए गए दुर्ग, किले और मंदिर अपने वैभव और कला की कहानी खुद कहते हैं. जो रोमांच और कौतूहल से भरी है, लेकिन कुछ किले और मंदिर ऐसे भी हैं, जो अपने आप में कई तरह के रहस्यों को समेटे हैं. ऐसा ही एक किला गढ़कुंडार का किला है. जिसको लेकर कई तरह के रोचक किस्से सुनने मिलते हैं. चंदेल राजाओं द्वारा निर्मित ये किला अपने अंदर कई रहस्यों को समेटे है.
गढ़कुंडार किले की सबसे बड़ी खासियत ये है कि ये कोसों दूर से नजर आता है, लेकिन जैसे-जैसे पास जाते हैं, गायब हो जाता है. किले से अजीब-अजीब आवाजें आती हैं. इस किले में भूल भुलैया है और कहते हैं कि यहां एक पूरी बारात गायब हो गयी थी. साथ में ये ही कहा जाता है कि इस किले में खजाना दबा हुआ है और अगर उसे निकाल लिया जाए, तो भारत फिर सोने की चिड़िया के तौर पर जाना जाएगा.
गढ़कुंडार किले का इतिहास
जहां तक गढ़कुंडार किले की बात करें, तो ये निवाड़ी जिले में स्थित है. पहले ये टीकमगढ़ जिले का हिस्सा हुआ करता था. इस किले की दूरी रामराजा सरकार के ओरछा नगर से करीब 50 किमी है. गढ़कुंडार किले के इतिहास के बारे में इतिहासकार डाॅ भरत शुक्ला बताते हैं कि "इस किले का निर्माण 11वीं शताब्दी में चंदेल वंश के राजाओं ने कराया था. पहले यहां चंदेलवंश का राज रहा, फिर बुंदेला शासकों के अधीन हो गया और सबसे आखिर में इस किले पर खंगार वंश का अधिपत्य हो गया.

कहा जाता है कि चंदेल राजा यशोवर्मा चंदेल ने 925 से लेकर 940 ई के बीच इस इलाके में विजय हासिल करने के बाद किले का निर्माण कराया था. गढ़कुंडार के बारे में कहा जाता है कि 12वीं शताब्दी के अंत में ये किला पृथ्वीराज चौहान के अधीन हो गया. उन्होंने यहां खंगार वंश के शासक की नियुक्ति की थी. इसके बाद इस किले पर बुंदेलों का शासन रहा और फिर यहां खंगार शासकों का शासन हो गया."
ऐसी बनावट की दिमाग सुन्न हो जाए
इस किले को जब चंदेल शासकों ने बनवाया, तो उन्होंने सुरक्षा की दृष्टि से इसका वास्तु और बनावट ऐसी रखी कि कोई भी आक्रमणकारी इस पर आक्रमण करे, तो अचानक से आक्रमण ना कर पाए. ये देश के उन जाने माने किलों में शामिल है, जो अपनी बनावट और रहस्यों के लिए जाना जाता है. इस किले की सबसे बड़ी खासियत ये है कि ये कई कोसों दूर (करीब 12 किमी) से नजर आता है, लेकिन जैसे-जैसे इसके नजदीक पहुंचते हैं, तो गायब हो जाता है. इस तक पहुंचना आसान नहीं है.

इसका रास्ता भूल भुलैया भरा है. किले की तरफ जिस रास्ते से आगे बढते हैं, वो रास्ता कहीं दूर दूसरी जगह ले जाता है. लोग किले में प्रवेश करने के लिए जिसे मुख्य प्रवेश द्वार समझते हैं, वो कोई और जगह होता है. इस किले की 5 मंजिले हैं, जिनमें दो मंजिल जमीन के नीचे बनी हुई है और 3 मंजिल जमीन के ऊपर है.
यहां की राजकुमारी ने किया जौहर
इस किले के बारे में कहा जाता है कि ये 13वीं शताब्दी में यहां बुंदेलों का शासन हुआ करता था. यहां की राजकुमारी काफी खूबसूरत थीं और उनके सौंदर्य की चर्चा दूर-दूर तक थी. कहा जाता है कि मुगल शासक के कारण राजकुमारी ने कई महिलाओं के साथ जौहर कर लिया था. दरअसल, कहा जाता है कि मोहम्मद बिन तुगलक का राजकुमारी पर दिल आ गया और तत्कालीन राजा मानसिंह से उनकी बेटी का हाथ मांगा, तो राजा ने इंकार कर दिया. इंकार सुनते ही बिन तुगलक ने आक्रमण कर दिया और राजकुमारी ने अपने आप को बचाने कई महिलाओं के साथ जौहर कर लिया. हालांकि कई इतिहासकार इस घटना को जनश्रुति बताते हैं.

पूरी बारात हो गयी गढ़कुंडार किले में गायब
रहस्यों से भरे गढ़कुंडार किले के बारे में कई कहानियां है. कहा जाता है कि एक बार इस किले में एक पूरी की पूरी बारात गायब हो गयी थी. यहां गांव में एक बारात आयी और गांव के लोग किला घूमने गए, जो करीब 70 लोग थे, लेकिन वो घूमते-घूमते गायब हो गए. कहा जाता है कि इसीलिए इस किले की जमीन की नीचे वाली मंजिलों को बंद कर दिया गया है. हालांकि इतिहासकार इस घटना के कोई प्रमाण ना होने की बात करते हैं, लेकिन इतिहासकार मानते हैं कि ये किला रहस्यों से भरा है, यहां तरह-तरह की आवाजे आती हैं और भूल भुलैया भी है.

गढ़कुंडार किला को लेकर इतिहासकार की राय
इतिहासकार डाॅ भरत शुक्ला बताते हैं कि "गढ़कुंडार का किला 10वीं शताब्दी में चंदेल राजाओं द्वारा निर्मित कराया गया था. पहले यहां चंदेल शासकों, फिर खंगार और फिर बुंदेला शासकों का शासन रहा है. यह किला काफी रहस्यमय माना जाता है, क्योंकि यहां पर रात के समय अजीब तरह की आवाजें आती है. ऐसा भी कहा जाता है कि ये किला दूर से तो नजर आता है, लेकिन पास जाने में ओझल हो जाता है.
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एक किवदंती ये भी है कि यहां कोई बारात गयी थी, तो बारात के 70 लोग किले में गायब हो गए थे. हालांकि इसका कोई प्रमाण मौजूद नहीं है. यहां हर साल गढ़कुंडार महोत्सव का आयोजन किया जाता है. यहां के खजाने को लेकर इतिहासकार कहते हैं कि अगर वर्तमान में यहां कोई खजाना होता, तो सरकार वहां खुदाई कराकर अपने अधिकार में ले लेती, हो सकता लोग यहां खजाने के फेर में खुदाई करते हों, ऐसा इसलिए कहा जाता हो.

जहां तक यहां राज करने वाले राजपरिवारों की बात करें, तो वो अपने आप में काफी समृद्ध थे और उनके पास काफी दौलत भी थी. तीन-तीन राजवंशों ने यहां राज किया है, तो यहां खजाना रहा होगा, तो उत्तराधिकारियों को मिल गया होगा.

