IED के सुरक्षा घेरे में 60 से ज्यादा नक्सली, 22 ग्रामीणों की जा चुकी है जान, 26 सुरक्षाकर्मी घायल, जंगल क्लीन करना सबसे बड़ा टास्क
झारखंड के कोल्हान के इलाके में नक्सली आईईडी की सुरक्षा घेरा में हैं. लगातार जवान और ग्रामीण चपेट में आ रहे हैं.

Published : March 23, 2025 at 8:02 PM IST
|Updated : March 24, 2025 at 4:29 PM IST
रांची: चाईबासा में नक्सलियों द्वारा अपनी सुरक्षा के लिए जमीन के अंदर लगाए गए आईईडी सुरक्षा बलों के लिए घातक साबित हो रहे हैं. जैसे-जैसे सुरक्षा बल नक्सलियों के करीब पहुंच रहे हैं, वैसे-वैसे विस्फोट की घटनाएं भी बढ़ती जा रही हैं. अकेले मार्च 2025 में विस्फोट की तीन घटनाएं सामने आई हैं, जिसमें पांच जवान घायल हुए हैं, जबकि सीआरपीएफ के एक सब इंस्पेक्टर शहीद हुए हैं.
आईईडी बनी चुनौती
झारखंड का सारंडा क्षेत्र ही एकमात्र ऐसा इलाका बचा है, जहां से नक्सलियों के एक बड़े समूह का सफाया किया जाना है, जिन पर एक करोड़ रुपये के कई इनाम भी हैं. ऑपरेशन में लगे सुरक्षा बल किसी भी तरह सारंडा को फतह करना चाहते हैं, लेकिन जमीन के अंदर बिछाई गई मौत की सामग्री उनकी राह में रोड़ा बन रही है.
मार्च 2025 के महीने में नक्सलियों द्वारा तीन बार विस्फोट किए गए हैं. 5 मार्च को हुए विस्फोट में तीन जवान घायल हुए थे, 16 मार्च को हुए विस्फोट में एक जवान घायल हुआ था, जबकि 22 मार्च को हुए विस्फोट में सीआरपीएफ के सब इंस्पेक्टर सुनील मंडल शहीद हो गए थे और सीआरपीएफ के एक हेड कांस्टेबल घायल हुए थे.
बेहद खतरनाक हैं ये इलाके
चाईबासा के जराइकेला, रेंगरा, टोंटो, सोनुवा, जेटेया, गुदरी और तुम्बाहाटा ऐसे इलाके हैं, जहां जंगलों में कदम-कदम पर नक्सलियों ने मौत का साजो-सामान बिछा रखा है. इन वन क्षेत्रों में विस्फोटों के कारण पिछले डेढ़ साल में 22 ग्रामीणों की जान जा चुकी है. हालात ऐसे हैं कि बाइक से जंगल में अभियान पर निकलने वाले जवान भी आईईडी बमों का शिकार बन रहे हैं.
सुरक्षा बल भी निशाने पर
झारखंड के कोल्हान इलाके में पुलिस और नक्सलियों के बीच निर्णायक लड़ाई चल रही है. कोल्हान की जंग पुलिस बहुत पहले ही जीत जाती, लेकिन नक्सलियों द्वारा जंगल क्षेत्रों में अपनी सुरक्षा के लिए लगाए गए आईईडी बम अब तक इस जंग को जीतने में बाधा बने हुए हैं. नवंबर 2022 से अब तक कोल्हान में आईईडी बमों के विस्फोट से 26 सुरक्षाबल घायल हो चुके हैं.
इनमें 209 कोबरा बटालियन के इंस्पेक्टर प्रभाकर साहनी, हवलदार अलख दास, मुकेश कुमार सिंह, अजय लिंडा, भरत सिंह राय, फारूकी शाहरुख खान, वीरपाल सिंह, प्रिंस सिंह, अमरेश सिंह, सौरभ कुमार, संतोष और चिरंजीव पात्रे विस्फोट में घायल हुए हैं. सभी को आनन-फानन में एयरलिफ्ट कर रांची ले जाया गया.
अधिकांश जवान अपनी चोटों से उबर चुके हैं लेकिन कई अभी भी अस्पताल में इलाज करा रहे हैं. कोल्हान में सीआरपीएफ के कई जवान भी घायल हुए हैं, जिनमें इंशार अली, राकेश कुमार पाठक, पंकज कुमार यादव और संजीव कुमार शामिल हैं. 22 मार्च को हुए विस्फोट में सीआरपीएफ के सब इंस्पेक्टर शहीद हो गए थे, जबकि हेड कांस्टेबल गर्ग घायल हुए थे.
नवंबर 2023 से अब तक 22 ग्रामीणों की मौत
कोल्हान में सुरक्षा बलों के बाद सबसे ज्यादा नुकसान ग्रामीणों को उठाना पड़ रहा है, नक्सलियों द्वारा लगाए गए आईईडी में विस्फोट होने से अब तक 24 ग्रामीणों की जान जा चुकी है, जबकि 14 गंभीर रूप से घायल हुए हैं.
- 07 जनवरी 2025 को जराईकेला निवासी सात वर्षीय मासूम सनिका की आईईडी विस्फोट में मौत हो गई
- 19 सितंबर 2024 को तिरिलपोशी में आईईडी विस्फोट में सुनील सुरीन नामक ग्रामीण की मौत हो गई
- 17 अक्टूबर 2024 को जराईकेला में आईईडी विस्फोट में सुनील सुरीन नामक ग्रामीण की मौत हो गई
- 16 फरवरी 2024 को जराईकेला में आईईडी विस्फोट में ग्रामीण रामदयाल पूर्ति की मौत हो गई
- 24 जनवरी 2023 को नक्सलियों द्वारा लगाए गए आईईडी विस्फोट में कटंबा निवासी 13 वर्षीय बालक गंभीर रूप से घायल हो गया
- 21 फरवरी 2023 को चाईबासा के गोइलकेरा थाना क्षेत्र के मेरालगड़ा के पास बारूदी सुरंग विस्फोट में 23 वर्षीय ग्रामीण हरीश चंद्र गोप की मौत हो गई
- 23 फरवरी 2023 को लकड़ी चुनने गई बुजुर्ग महिला जेमा हांसदा की मौत हो गई. चाईबासा के टोंटो थाना क्षेत्र के रुकबुरू के जंगल में लैंडमाइन विस्फोट में कृष्णा पूर्ति नामक बुजुर्ग की मौत हो गई. वह बुरी तरह घायल हो गई.
- 1 मार्च 2023 को चाईबासा के इचाहातु में लैंडमाइन विस्फोट में कृष्णा पूर्ति नामक बुजुर्ग की मौत हो गई.
- 1 मार्च 2023 को इचाहातु में ही विस्फोट में 50 वर्षीय महिला नंदी पूर्ति गंभीर रूप से घायल हो गई.
- 25 मार्च 2023 को चाईबासा के मुफस्सिल थाना क्षेत्र में लैंडमाइन विस्फोट में 62 वर्षीय महिला गुरुवरी की मौत हो गई, जबकि इसी विस्फोट में बुजुर्ग महिला चंदू गंभीर रूप से घायल हो गई.
- 9 अप्रैल 2023 और 14 अप्रैल 2023 को भी जंगलों में आईडी विस्फोट हुए, दोनों विस्फोट चाईबासा के टोंटो में हुए, जिसमें 6 वर्षीय बालक और एक बुजुर्ग घायल हो गए.
- 14 अप्रैल 2023 को हुए विस्फोट में 35 वर्षीय जेना कोड़ा की भी मौत हो गई.
- 20 मई 2023 को टोंटो थाना क्षेत्र में हुए विस्फोट में 10 वर्षीय मासूम नारा कोड़ा की मौत हो गई.
- 25 मई 2023 को टोंटो थाना क्षेत्र के लुइया जंगल में हुए विस्फोट में 50 वर्षीय कांडे लंगुरी की मौत हो गई.
- 20 नवंबर 2022 को चाईबासा के टोंटो थाना क्षेत्र में हुए बारूदी सुरंग विस्फोट में ग्रामीण चेतन कोड़ा की मौत हो गई.
- 28 दिसंबर 2022 को गोइलकेरा में हुए बारूदी सुरंग विस्फोट में 23 वर्षीय सिंगराय पूर्ति की मौत हो गई.
जान बचाने के लिए ग्रामीणों को भी बनाया जा रहा निशाना
झारखंड के नक्सल इतिहास में नक्सली संगठन हमेशा ग्रामीणों को निशाना बनाते रहे हैं. कभी मुखबिरी के नाम पर तो कभी शरण न देने के नाम पर, लेकिन पुलिस के जोरदार अभियान के बाद स्थिति पूरी तरह बदल गई है. झारखंड के अधिकांश नक्सली इलाकों से माओवादियों को खदेड़ दिया गया है. लेकिन कोल्हान में कुछ ऐसे इलाके हैं, जहां नक्सली अभी भी खुद को बचाने में कामयाब हैं, लेकिन यह सफलता ग्रामीणों के खून से मिली है.
घने बीहड़ों में नक्सलियों ने खुद को बचाने के लिए पूरे जंगल में बारूदी सुरंगें बिछा दी हैं. ऐसे जंगलों में बारूदी सुरंगें बिछाई गई हैं, जहां ग्रामीण रोजाना आते-जाते हैं, नतीजतन बारूदी सुरंगों के विस्फोट में ग्रामीण लगातार अपनी जान गंवा रहे हैं.
60 से ज्यादा नक्सली, ज्यादातर इनामी
दरअसल, कोल्हान में शीर्ष नक्सली नेताओं ने शरण ले रखी है. बूढ़ा पहाड़ के बाद कोल्हान ही एकमात्र ऐसा स्थान है, जहां नक्सलियों ने अपना मुख्यालय बनाया है. मुख्यालय होने के कारण यहां एक करोड़ रुपये के इनामी नक्सली नेता भी रहते हैं. जानकारी के अनुसार, सारंडा में मिसिर बेसरा, अनमोल दा, टेक विश्वनाथ उर्फ संतोष, मोछू, चमन, कांडे, अजय महतो, सागेन अंगारिया और अश्विन जैसे खतरनाक नक्सली कमांडर मौजूद हैं, जिन पर एक करोड़ रुपये का इनाम है. इनके साथ 60 से अधिक लड़ाके हैं, जो गुरिल्ला युद्ध में माहिर हैं.
अभियान जारी, जल्द होगा खात्मा
कोल्हान में आईईडी विस्फोटों में ग्रामीणों की मौत और जवानों के घायल होने के सवाल पर झारखंड के डीजीपी अनुराग गुप्ता ने कहा कि कोल्हान में नक्सलियों की धार कुंद हो चुकी है, उनके पास अब कुछ नहीं बचा है. नतीजतन, वे आईईडी बम के जरिए लड़ाई की कोशिश कर रहे हैं, जिससे ग्रामीणों और जवानों को नुकसान पहुंच रहा है. लेकिन हमने उन्हें खत्म करने का लक्ष्य तय किया है और इसी लक्ष्य के अनुसार पुलिस केंद्रीय बलों के साथ मिलकर काम कर रही है. बहुत जल्द नक्सलियों का आखिरी गढ़ भी उनके हाथ से निकल जाएगा.
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