बैराबी-सैरांग रेल लाइन; मिजोरम की दुर्गम पहाड़ियों के बीच 51 किलोमीटर दौड़ेगी ट्रेन, ट्रैक बनने में लगे 26 साल
ईटीवी भारत के कैमरे से देखिए बैराबी से सैरांग के बीच ब्रिज को, जो कुतुब मीनार से भी ऊंचा है और इसका बेहतरीन स्ट्रक्चर है.

By ETV Bharat Uttar Pradesh Team
Published : August 29, 2025 at 11:14 AM IST
आइजोल (अखिलेश्वर पाण्डेय): देश की रेल सेवा का दुर्गम पहाड़ियों के बीच विस्तार लगातार जारी है. इसी कड़ी में आजादी के 78 साल बाद अब रेल लाइन मिजोरम की दुर्गम पहाड़ियों के बीच पहुंची है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 13 सितंबर को मिजोरम के बैराबी से सैरांग तक इस नई रेल लाइन का उद्घाटन करेंगे.
बैराबी-सैरांग रेल लाइन को बनाने में 26 साल का समय लगा है, जबकि रेल लाइन की लंबाई की बात की जाए तो यह 51 किलोमीटर है. इतना लंबा समय लगने की प्रमुख वजह यहां की विकट परिस्थितियां रही हैं. अभी रेल लाइन बन कर तैयार है.
बता दें कि 29 नवंबर 2014 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मालीगांव स्थित रेलवे स्टेडियम में आयोजित एक समारोह में मिजोरम में बैराबी से सैरांग तक नई रेल लाइन के लिए पट्टिका का रिमोट से अनावरण किया था. इसके बाद 21 मार्च 2016 को चावल से लदे 42 वैगनों वाली पहली ब्रॉडगेज वाणिज्यिक मालगाड़ी मिज़ोरम के बैराबी स्टेशन पर सफलतापूर्वक पहुंची थी. 27 मई 2016 को प्रधानमंत्री ने बैराबी से सिलचर के बीच यात्री ट्रेन को वर्चुअली हरी झंडी दिखाई थी.
बैराबी-सैरांग नई रेल लाइन परियोजना के अंतिम खंड होरटोकी से सैरंग तक का 6 और 10 जून 2025 को पूर्वोत्तर सीमांत मंडल, बेनीवेन के हॉलवे सुरक्षा आयुक्त ने निरीक्षण किया था. यह एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है. पहली बार मिजोरम की राजधानी आइजोल से सीधी रेल कनेक्टिविटी का रास्ता खुल रहा है.

सीआरएस ने 22 अगस्त 2024 को बैराबी और होरटोकी के बीच नवनिर्मित रेल लाइन पर यात्री ट्रेनों के संचालन को अधिकृत किया था. ये रेल लाइन मिजोरम को राष्ट्रीय रेल नेटवर्क से जुड़ी राजधानी वाला चौथा पूर्वोत्तर राज्य बनाती है. यह पूर्वोत्तर क्षेत्र में रेल कनेक्टिविटी को मजबूत करने में एक ऐतिहासिक उपलब्धि है.
मिजोरम में आइजोल के निकट सालरंग तक पहला सफल परीक्षण एक मई 2025 को महाप्रबंधक/एनएफआर (निर्माण) की उपस्थिति में किया गया जो मिजोरम की राजधानी आइजोल को राष्ट्रीय रेल नेटवर्क से जोड़ने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है.

कुतुब मीनार से भी ऊंचा ब्रिज: सबसे खास बात ये है कि एक ब्रिज की ऊंचाई दिल्ली की कुतुब मीनार से भी ज्यादा है. ब्रिज की ऊंचाई 114 मीटर है, जबकि कुतुब मीनार 72.5 मीटर ही ऊंची है. ट्रैक की स्पीड भी 110 किलोमीटर प्रति घंटा होगी. यह रेल लाइन बन जाने से बैराबी से आइजोल तक पहुंचने में अब सिर्फ एक से डेढ़ घंटा ही लगेगा. जबकि, पहले 5 से 6 घंटे खर्च होते थे.
परियोजना की खासियत
- कुल लंबाई: 51.38 किलोमीटर.
- ट्रैक स्पीड: 110 किलोमीटर प्रति घंटा.
- स्टेशन: (हार्तुकी, कौनपुई, मुलखांग और सैरांग).
- सुरंग: 48 (कुल लंबाई 12.8 किमी).
- ब्रिज: पांच रोड ओवरब्रिज और छह अंडरब्रिज, 55 बड़े और 87 छोटे ब्रिज.
- सबसे ऊंचा ब्रिज: नंबर 196, ऊंचाई 104 मीटर.
- बैराबी - हॉर्टोकी: (16.72 किलोमीटर)-जुलाई, 2024 में चालू किया गया.
- हॉर्टोकी - कावनपुई: (9.71 किलोमीटर) जून 2025 में चालू किया गया.
- कावनपुई - मुआलखांग: (12.11 किमी) जून 2025 में चालू किया गया.
- मुआलखांग - सैरांग: (12.84 किलोमीटर) जून 2025 में चालू किया गया.
बैराबी-सैरांग रेल लाइन के 13 किमी में 48 टनल: बैराबी-सैरांग रेल लाइन की सुरंगें इन कार्यात्मक, जीवंत दृश्य कथाओं को रूपांतरित करती हैं. मिजो संस्कृति की समृद्ध विरासत और विचारधारा व पहचान का जश्न मनाती हैं. कलात्मक अलंकरण यात्रा को एक सांस्कृतिक अनुभव में बदल देते हैं. आधुनिकता को कालातीत परंपराओं के साथ सम्मिश्रित करते हैं. 48 टनल इस लाइन पर बनाई गई हैं जो लगभग 13 किलोमीटर लंबी हैं. 55 बड़े ब्रिज और 27 छोटे ब्रिज तैयार किए गए हैं.

मिजोरम में बढ़ेगा पर्यटन, रोजगार के बनेंगे नए अवसर: कठिन भूभाग और रसद संबंधी चुनौतियों को ये रेल लाइन कम करेगी. रेल संपर्क में सुधार होगा. बेहतर परिवहन और सुगम्यता के माध्यम से मिजोरम के लोगों को सीधा फायदा मिलेगा. इस क्षेत्र का अब और तेजी से विकास हो सकेगा. पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा. व्यावसायिक गतिविधियों और आर्थिक विकास को प्रोत्साहन मिलेगा. रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे. छोटे व्यवसायों को भी बढ़ावा मिलेगा.
नॉर्थ ईस्ट के ये राज्य सीधे रेल नेटवर्क से जुड़े: प्रोजेक्ट से पूर्वोत्तर के 8 राज्यों में से 4 त्रिपुरा (अगरतला), असम (दिसपुर), अरुणाचल प्रदेश (ईटानगर) और मिजोरम (आइजोल) सीधे रेलवे नेटवर्क से जुड़ गई हैं. यह नॉर्थ ईस्ट के सामाजिक-आर्थिक विकास के लिए गेम चेंजर साबित होगा.
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