पिता के निधन से टूटा परिवार, 14 की उम्र में शादी का दबाव, रिश्ता तोड़ अपनी कामयाबी लिखी रूचि
राष्ट्रीय बेटी दिवस पर बिहार की रूचि से मिलिए जिसने अपने हौसले से ना सिर्फ अपनी किस्मत लिखी बल्कि पूरे परिवार को ऊंचाई पर पहुंचाया.

Published : September 28, 2025 at 5:04 PM IST
|Updated : September 28, 2025 at 5:27 PM IST
खगड़िया: 'कुछ कर गुजरने का जज्बा हो तो मुश्किलें रास्ता नहीं रोक सकती. कितनी भी विपरीत परिस्थिति आये मंजिल मिल ही जाती है. राष्ट्रीय बेटी दिवस के मौके एक ऐसी बेटी की कहानी बताने जा रहे हैं, जो सब इंस्पेक्टर बनकार ना केवल खुद को संवारा बल्कि अपने परिवार को भी ऊंचाई पर पहुंचाया. बहन को शिक्षिका और भाई को इंजीनियर बनाया, लेकिन कामयाबी की राह आसान नहीं थी.
एक पल में अमीर से गरीब: हम बात कर रहे हैं खगड़िया की रहने वाली सब इंस्पेक्टर रुचि मिश्रा की. कन्हैयाचक गांव के बिजनेस परिवार में जन्म हुआ. किसी बात की कोई कमी नहीं थी, लेकिन कुछ समय बाद रुचि मिश्रा के जीवन ने ऐसी करवट बदली कि सब कुछ खत्म हो गया. पूरा परिवार अर्श से फर्श पर पहुंच गया.
दादी-पापा की उठी अर्थी: रुचि मिश्रा के दादाजी चंद्रकांत मिश्रा का निधन 2010 में हो गया था. अभी परिवार इस दुख से उभरा भी नहीं था कि 2012 में दादी आशा देवी और पापा प्रशांत मिश्रा ने एक साथ एक महीने के अंदर दुनिया को अलविदा कह दिया. जिससे परिवार पूरी तरह टूट गया.

'परिजन बोले शादी करो': पिता और दादी दोनों ही परिवार के स्तंभ थे. ऐसे में उनके जाने के बाद घर के आर्थिक हालात इतने बुरे हो गए कि खाने और जीने के लिए संघर्ष करना पड़ा. रुचि मिश्रा ने बताया कि दादा, दादी और पापा के जाने के बाद बहन सुप्रिया और भाई शिवम कुमार की जिम्मेदारी भी मुझ पर थी. परिजनों ने रुचि से कहा कि पढ़ाई छोड़कर शादी कर लो. लगभग मेरी शादी भी तय हो गई थी. लड़का बिल्कुल अनपढ़ था, लेकिन पैसे वाला जमींदार था. जिस समय मेरी शादी की बात हो रही थी, उस समय मेरी उम्र महज 14 साल थी.
रिश्तेदारों ने तोड़ा रिश्ता: उन्होंने बताया कि मेरे दिमाग में था कि अगर मैंने शादी कर ली तो बहन, मां और भाई की जिम्मेदारी उस लड़के के ऊपर आ जाएगी. ऐसे में कभी उसने मुंह फेर लिया तो मेरे परिवार का क्या होगा. तब मैने निर्णय लिया कि चाहे जो हो मैं स्वयं संघर्ष करूंगी, लेकिन बाल विवाह नहीं कंरूगी.

शादी तोड़ा तो रिश्तेदार ने मुंह मोड़ा: शादी नहीं करने के कारण घर के लोग नाराज हो गए. यहां तक की रिश्तेदारों ने हमसे नाता तोड़ लिया, लेकिन मुझे खुद पर भरोसा था. मैंने अपनी मां से कहा कि तुम दुर्गा मां पर भरोसा रखो वो सब ठीक करेंगी. फिर मैने अपनी पढ़ाई के साथ-साथ बहन और भाई की पढ़ाई भी शुरू करवाई.
स्कूल और ट्यूशन पढ़ाकर कमाए पैसे: रुचि ने बताया कि मैंने 1500 रुपए की सैलरी पर स्कूल में पढ़ाया. साथ ही बच्चों को ट्यूशन दिया और रिसेप्शनिस्ट की नौकरी की, ताकि सभी की पढ़ाई और घर का खर्च निकल सके. मेरी बहन भी बच्चों को ट्यूशन पढ़ाने लगी, जबकि छोटा भाई आटा मिल चलाने लगा. उन्होंने बताया कि घर में कभी सब्जी तो कभी राशन नहीं होता था, फिर भी कभी किसी के आगे हम लोगों ने हाथ नहीं फैलाया.

शिक्षकों ने बढ़ाया हौसला: रुचि मिश्रा बतातीं हैं कि मेरी संघर्ष की कहानी में मेरे शिक्षक मनीष, संजय, आशीष, प्रभाष, राजाराम, सुमन, मखानी, लूलण, विकी आनंद और दिलीप सर की अहम भूमिका रही है. इन लोगों ने हमेशा शैक्षणिक गतिविधि चालू रखने के लिए मेरा हौसला बढ़ाया.
मौसा-मौसी बनें सहारा: रुचि ने बताया कि मौसा हरी किशोर और मौसी ने परिवार को सहारा दिया. उन्होंने भाई के एडमिशन से लेकर रहने , खाने और शिक्षा तक की व्यवस्था की. वरुण भैया और उनकी पत्नी ने भागलपुर में मेरे रहने और पढ़ाई का बंदोबस्त किया. फॉर्म भरने से लेकर परीक्षा की पूरी जानकारी में मेरी मदद की. साथ ही प्रज्ञा और खुशबू दी जैसी सच्ची दोस्त ने हर कदम पर मेरा साथ दिया.

स्कूल टॉपर हैं रुचि: रुचि ने मैट्रिक परीक्षा में स्कूल टॉप किया था. जिससे उन्हें खगड़िया जिला अधिकारी ने मेडल से सम्मानित किया था, जबकि 10वीं की पढ़ाई कन्हैयाचक हाईस्कूल से पूरी की. इसके बाद रुचि ने साल 2014 में केएमडी कॉलेज से 12वीं की पढ़ाई पूरी की. फिर तिलका मांझी विश्वविद्यालय भागलपुर से 2015 से 2018 तक इकॉनिमकिक्स ऑनर्स से ग्रेजुएशन किया. आज रूचि बिहार पुलिस में सब इंस्पेक्टर है.
तीनों भाई-बहन कर रहे नौकरी: रुचि ने बताया कि मैंने कोई बड़ा काम नहीं किया है. अगर मेरे साथ मेरे गुरु, मेरा परिवार, मेरे दोस्त और मां दुर्गा का आशीर्वाद नहीं होता, तो मैं कुछ भी नहीं कर पाती. सब इंस्पेक्टर की नौकरी के बाद मैंने अपनी बहन को बीएड करवाया और अब वह बिहार सरकार में शिक्षिका है, जबकि छोटा भाई भी आज IOCL में इंजीनियर पद पर कार्यरत है.
'' मैंने 2019 में दरोगा का फॉर्म भरा फिर यहीं से भाग्य ने करवट ली और मैंने पहली बार में ही प्री, मेंस और कठिन मेहनत से फिजिकल पास किया. 26 जनवरी 2022 को मैंने सब-इंस्पेक्टर के रूप में बिहार पुलिस में ज्वाइन किया. इसके बाद राजगीर में ट्रेनिंग की. अभी मधुबनी जिले में सब इंस्पेक्टर के रूप में कार्यरत हूं''. -रुचि मिश्रा,सब इंस्पेक्टर
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