साइकिल से विश्व भ्रमण कर रहे केरल के अरुण, कैंसर पीड़िता ने कहा- 'आपकी यात्रा मुझे जीने की ऊर्जा देती'
कोच्चि के अंबलमेडु निवासी अरुण तथागत अपनी साइकिल पर सवार होकर विश्व भ्रमण की अनूठी मिसाल पेश कर रहे हैं.

Published : September 19, 2025 at 5:04 PM IST
|Updated : September 19, 2025 at 6:42 PM IST
एर्नाकुलम: केरल के कोच्चि से निकला एक साधारण सा व्यक्ति साइकिल पर सवार होकर विश्व को जोड़ने और भारत का गौरव बढ़ाने का सपना लिए आगे बढ़ रहा है. 2024 ओलंपिक के दौरान खेल और संस्कृति के वैश्विक केंद्र, पेरिस से अपनी साइकिल यात्रा शुरू की. 418 दिनों में 59 देशों की यात्रा कर चुके हैं. फिलहाल, वह एस्टोनिया की राजधानी तेलिन में हैं. दो साल के इस अभियान के दौरान यूरोप, एशिया के बड़े हिस्से और अफीकी महाद्वीप की यात्रा करने का लक्ष्य रखा है.
मानवता और एकता का संदेशः
अरुण की यह यात्रा केवल पर्यटन तक सीमित नहीं है. वह विश्व में एकता और मानवता का संदेश फैलाने के लिए निकले हैं. अमेरिका से आयातित अपनी सर्ली साइकिल पर सवार अरुण ने कठिन मौसम, भाषा की बाधाओं और आर्थिक चुनौतियों का सामना करते हुए भी हार नहीं मानी. टालिन से बात करते हुए उन्होंने बताया, "यहां गर्मियों में भी तापमान 10 डिग्री है. बारिश और ठंड में लोग जैकेट पहने हैं, ऐसा लगता है जैसे मैं किसी पुरानी अंग्रेजी फिल्म में हूं."
यात्रा के यादगार पल:
अरुण की यात्रा भावनात्मक और अविस्मरणीय अनुभवों से भरी है. पोलैंड के क्राकोव में उनकी मुलाकात एक यूक्रेनी शरणार्थी महिला से हुई, जिसके साथ उन्होंने तस्वीर खिंचवाई और गले मिले. एक सप्ताह बाद उसी महिला से दोबारा मुलाकात हुई, तब पता चला कि वह कैंसर के लिए कीमोथेरेपी करा रही थी.
जब अरुण ने पूछा कि अस्पताल के बीच वह उनसे क्यों मिली, तो महिला का जवाब था, "आपकी यात्रा मुझे जीने की ऊर्जा देती है." सर्बिया में अरुण अनजाने में एक बच्चों के विरोध प्रदर्शन में शामिल हो गए, जिसमें करीब 30 हजार लोग थे. वहां उन्हें स्थानीय लोगों ने सेलिब्रिटी की तरह सम्मान दिया.
59 देशों का सफरः
अरुण की साइकिल अब तक फ्रांस, जर्मनी, ऑस्ट्रिया, स्लोवाकिया, तुर्की, ईरान, कई खाड़ी देशों, चेक गणराज्य, पोलैंड, फिनलैंड, नॉर्वे, कजाकिस्तान, उज्बेकिस्तान, डेनमार्क, बेल्जियम, नीदरलैंड, स्पेन, मोरक्को, ट्यूनीशिया जैसे देशों से होकर गुजरी है. उनकी योजना 2026 तक केरल लौटने की है. इससे पहले, अरुण ने थाईलैंड में एक साल की एकल साइकिल यात्रा पूरी की थी, जिसने उनकी इस विश्व यात्रा की नींव रखी.
सपना पूरा करने के लिए कर्जः
अरुण की अपनी यात्राओं का खर्च खुद जुटाते हैं. उनकी यह यात्रा प्रायोजित नहीं है. इसके लिए उन्हें कर्ज भी लेना पड़ता है. एक कर्ज चुकाने के बाद वह दूसरा लेते हैं, ताकि उनका सपना जीवित रहे. एर्नाकुलम कलेक्ट्रेट में राजस्व विभाग के वरिष्ठ क्लर्क के रूप में 20 साल की सेवा के बावजूद, यात्राओं के लिए लंबी छुट्टियों के कारण उन्हें प्रमोशन नहीं मिला. अरुण को इसका कोई पछतावा नहीं है.
किताब लिखने की तैयारीः
मनोविज्ञान में स्नातकोत्तर अरुण अपनी यात्रा में गहरे चिंतन और सादगी का मिश्रण लाते हैं. उनका कहना है, "एक साइकिल यात्री अनावश्यक चीजों से बचता है." वह अपनी यात्राओं, अनुभवों और जीवन के सबक पर एक किताब लिखने की योजना बना रहे हैं, जो सरकारी नियमों के अनुरूप होगी.
केरल की पहचान विश्व मेंः
हर जगह अरुण गर्व से खुद को भारतीय और मलयाली के रूप में पेश करते हैं. यूरोप में कई लोगों ने केरल के बारे में नहीं सुना था, लेकिन अरुण ने हर मुलाकात में केरल की सुंदरता, संस्कृति और गर्मजोशी को दुनिया के सामने रखा. यूरोप की स्वच्छता से प्रभावित अरुण कहते हैं, "केरल में भी हमें ऐसी स्वच्छता को प्राथमिकता देनी चाहिए. यह नागरिकों और प्रशासन की साझा जिम्मेदारी है."
'तथागत' का मतलबः
'तथागत' नाम हमेशा से उनकी पहचान का हिस्सा नहीं था. अरुण ने इसे जानबूझकर चुना है. तथागत, महात्मा बुद्ध को कहा जाता है. यह शब्द उस व्यक्ति को दर्शाता है जो सच्चाई से अवगत कराता है और ज्ञान प्राप्त करता है. यह उस व्यक्ति को भी संदर्भित करता है जिसने परम धार्मिक लक्ष्य या सिद्धि प्राप्त कर ली हो. अरुण ने अपना नाम 'तथागत' चुना. यह नाम सामाजिक और धार्मिक बंधनों से मुक्ति का प्रतीक रूप में रखा है.
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