MLA संजय पाठक का डायरेक्ट कॉल, मध्य प्रदेश हाई कोर्ट जज ने सुनवाई से किया इंकार
मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के जज विशाल मिश्रा ने बीजेपी विधायक संजय पाठक केस की सुनवाई करने से मना कर दिया है.

By ETV Bharat Madhya Pradesh Team
Published : September 2, 2025 at 7:14 PM IST
|Updated : September 2, 2025 at 7:23 PM IST
जबलपुर : कटनी जिले के विजय राघवगढ़ से बीजेपी विधायक संजय पाठक एक बार फिर सुर्खियों में हैं. इस बार उन्होंने हाईकोर्ट में चल रहे एक केस को लेकर हाई कोर्ट के जज विशाल मिश्रा को सीधे को फोन लगा दिया. इसके बाद हाई कोर्ट जज विशाल मिश्रा ने अपने आदेश में इसका जिक्र करते हुए कहा "संजय पाठक ने उन्हें फोन लगाया. इस वजह से इस मामले की अब सुनवाई नहीं करेंगे."
शिकायतकर्ता ने ईओडब्लू में दिया था आवेदन
बता दें कि कटनी के रहने वाले आशुतोष दीक्षित ने मध्य प्रदेश सरकार के पूर्व मंत्री और वर्तमान में बीजेपी विधायक संजय पाठक के खिलाफ आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा (EOW) में शिकायत की थी. इसमें उन्होंने संजय पाठक के खिलाफ आर्थिक अनियमितता के आरोप लगाए थे. जब लंबे समय तक आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा ने इस मामले की सुनवाई नहीं की तो आशुतोष दीक्षित ने हाई कोर्ट में याचिका लगाई. मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के जज विशाल मिश्रा की कोर्ट में इस मामले की सुनवाई होनी थी.

हाई कोर्ट जज विशाल मिश्रा ने पत्र में क्या लिखा
हाई कोर्ट जज विशाल मिश्रा ने इस मामले की सुनवाई के दौरान सभी पक्षों के वकीलों की मौजूदगी में एक पत्र जारी किया है. इसमें उन्होंने लिखा है "संजय पाठक ने आशुतोष दीक्षित द्वारा लगाई याचिका के मामले में बात करने की कोशिश की है. इसलिए मैं इस मामले की सुनवाई नहीं करूंगा." उन्होंने मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश से अनुरोध किया है कि इस मामले को किसी दूसरी अदालत में सुनवाई के लिए भेजा जाए.

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खनन मामले की मध्य प्रदेश हाई कोर्ट में होनी है सुनवाई
वहीं, याचिकाकर्ता आशुतोष दीक्षित का कहना है "संजय पाठक के खिलाफ उन्होंने शिकायत की है. संजय पाठक की कंपनी ने कटनी के पास अवैध उत्खनन किया है." आशुतोष दीक्षित ने ये जानकारी आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा को दी थी, इसी मामले की सुनवाई हाई कोर्ट में होनी है. बता दें कि हाई कोर्ट के इतिहास में संभवत: यह पहला मामला होगा, जिसमें किसी जज ने पूरी ईमानदारी से यह बात आदेश के जरिए लिखकर दी हो कि याचिका को प्रभावित करने के लिए सीधे संपर्क करने की कोशिश की गई है. अब इस मामले में मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को यह फैसला करना है कि वे इस याचिका को किसे सौंपते हैं.

