पिता ने आटा चक्की चलाकर पढ़ाया, 7 बहनों ने सरकारी नौकरी पाकर पहनी वर्दी
ये कहानी छपरा की सात सगी बहनों की है. सभी सरकारी नौकरी में है. माता-पिता को अपनी वर्दीधारी बेटियों पर नाज है.

Published : March 6, 2025 at 5:33 PM IST
छपरा: बेटियों को बोझ समझने वाले और उनके जन्म लेने पर ताने मारने वाले लोगों को छपरा के कमल सिंह की कहानी पढ़नी चाहिए. गरीबी और बेबसी के बावजूद इस पिता ने अपनी सात बेटियों को पढ़ाया-लिखाया. उसी का नतीजा है कि आज सातों बहनें वर्दी पहनकर देश की रक्षा कर रही हैं.
छपरा की सात वर्दीधारी बहनें: सारण के एकमा बाजार के रहने वाले कमल सिंह की सात बेटियां हैं और सातों सरकारी नौकरी में है. राज कुमार सिंह उर्फ कमल सिंह की कुल 9 संतानें थीं, जिनमे से एक ने दुनिया को अलविदा कह दिया. कमल को सात बेटी और एक बेटा है.
पिता को बेटियों पर नाज: सातों बहनें सरकारी नौकरी में है.कभी इनके पैदा होने पर जो लोग माता-पिता को ताना मारते थे. आज वही लोग, इनकी कामयाबी पर गर्व महसूस करते हैं. पिता कमल सिंह को भी अपनी बेटियों पर नाज है. वह कहते हैं कि मुझे मेरी सातों बेटियां इस जन्म में ही नहीं बल्कि हर जन्म में मिले.
"भाई पट्टीदार बेटियों के होने पर ताना मारते थे. कहते थे कि शादी नहीं होगी और सरकारी नौकरी नहीं मिलेगी. सभी को पढ़ाने के लिए मैं रात के 11 बजे तक जगाकर रखता था तो सुबह 4 बजे उठाता था. फिर सभी को मैदान में लेकर दौड़ने जाता था. सभी को पढ़ाने के लिए मैंने काफी कष्ट किया है. आज सातों बहनें देश की सेवा कर रही है. मेरी जैसे बेटी भगवान सबको जब दे."- राज कुमार सिंह उर्फ कमल सिंह, पिता

देश की सेवा में सातों बहनें: एकमा बाजार में स्थित कमल सिंह के मकान के बाहर नेमप्लेट पर लिखा हुआ है सिंह सिस्टर पैलेस, जिसमें सबसे बड़ी बेटी रानी कुमारी सिंह बिहार पुलिस, रेणु कुमारी सिंह एसएसबी,सोनी कुमारी सिंह सीआरपीएफ, कुमारी प्रीति सिंह क्राइम ब्रांच, कुमारी पिंकी सिंह एक्साइज पुलिस, कुमारी रिंकी सिंह बिहार पुलिस, जबकि नन्ही सिंह जीआरपी में हैं.
बेटियों ने पिता को गिफ्ट किया मकान: कमल कहते हैं कि आज मेरी बेटियों की मेहनत रंग लाई और आज मेरे पास एकमा बाजार में दो बहुमंजली इमारत है, जिसमें से एक को मैंने स्वयं की मेहनत से बनाया है जबकि दूसरी बिल्डिंग 4 मंजिला इमारत की मेरी बेटियों के द्वारा बनवा कर मुझे गिफ्ट दिया गया है. बेटियों ने कहा कि यह आपके पेंशन के रूप में है और जब हम लोग अपने-अपने ससुराल चले जाएंगे तो आप केवल इसकी कमाई से अपना जीवन यापन कर सकते हैं.
'शुरुआती दिनों में करना पड़ा संघर्ष': कमल सिंह की बेटी और सिंह सिस्टर्स में से एक कुमारी रिंकी सिंह बताती हैं कि मां पिताजी के सहयोग से ही आज सातों बहनें महिला सशक्तिकरण के सही मायने को साकार कर रही हैं. पिता राजकुमार सिंह उर्फ कमल सिंह पेशे से आटा चक्की चलाने वाले मामूली कारोबारी हैं. मां शारदा देवी हाउस वाइफ हैं.

आटा चक्की में पिता की मदद करती थीं बेटियां: रिंकी ने कहा कि नचाप गांव में उनके पिता की आटा चक्की चल नहीं रही थी जिस कारण वह एकमा गांव से प्रखंड में जाकर उन्होंने आटा चक्की लगाई. पिता की परेशानी को देखते हुए बेटियां भी आटा चक्की पर जाकर बैठती और पिता का हाथ बंटाती थी. घर की माली हालत बहुत अच्छी नहीं थी. यही कारण है कि शुरुआत के दिनों में काफी संघर्ष करना पड़ा.
"जब हम जुड़वा बहने रिंकी और पिंकी पैदा हुईं तो मां को बड़ा सदमा लगा और लोग ताने देने लगे. ऐसे मे मां सोचने लगी कि पहले से ही पांच बेटियां हैं, काश भगवान एक बेटा दे देते तो कम से कम लोगों के ताने सुनने नहीं पड़ते. लेकिन पिता ने मां को हौसला दिलाया कि हमें किसी तरह इन बेटियों को भी पालना होगा. पिताजी हम बेटियों के लालन-पालन पर 60% और 40% पढ़ाई पर खर्च करते थे. यही कारण रहा कि उन्होंने कभी बैंक बैलेंस नहीं रखा."- कुमारी रिंकी सिंह, पुलिस कर्मी

बड़ी बहन की नौकरी के बाद भी ताना: वहीं कमल सिंह की सबसे छोटी बेटी कुमारी नन्हीं सिंह जो पटना में जीआरपी में सिपाही के पद पर पदस्थापित हैं, वह बताती हैं कि मेरी सबसे बड़ी बहन रानी और रेनू ने वर्दी पहनने के लिए गांव में ही दौड़ना शुरू किया और लोगों के ताने को नजरअंदाज कर अपना अभ्यास निरंतर जारी रखा. इसके बाद वर्ष 2006 में रेणु का सशस्त्र सीमा बल में कांस्टेबल के पद पर चयन हो गया. इसके बाद पिता जब परोस में मिठाई बांटने गए तभी भी उन्हें ताना मारा गया और कुछ लोगों ने कहा कि एक का सरकारी नौकरी हो गया है तो क्या सब का हो जाएगा.
"उन्हें (कमल सिंह) ताना मिला कि पीपल के पेड़ के नीचे अगर एक आम मिल जाए तो यह नहीं समझना चाहिए कि हमेशा पीपल के नीचे आम मिलता रहेगा. जिस ताने को सुनकर सभी बहनों ने यह ठान लिया कि इस ताने को किसी तरह ताली में बदलना है और सभी बहने लोगों के तानों को नजरअंदाज कर अपना प्रयास करती रही."- कुमारी नन्ही सिंह, कांस्टेबल, जीआरपी पटना

'मुझे किसी चीज की कमी होने नहीं देती बहनें': सात बेटियों में एक भाई राजीव सिंह राजपूत फिलहाल दिल्ली में बीटेक करके नौकरी की तलाश में है. उन्होंने फोन पर बताया कि लोग "मुझे चिढ़ाते थे कि सारी संपत्ति और जायदाद तुम्हारी बहनें ले जाएंगी. तुम्हारे पास कुछ भी नहीं बचेगा, लेकिन आज यह स्थिति है कि हमारी सातों बहाने मुझे हाथों पर रखती हैं और मुझे किसी भी चीज की कमी नहीं होने देती है."
आटा चक्की चलाकर परिवार का पालन पोषण: पुराने दिनों को याद कर कमल सिंह ने बताया कि जब उनकी बेटियों का जन्म हुआ तो गांव वालों ने ताने देना शुरू किया, लेकिन मैं इससे घबराने वाला नहीं था और पूरी मेहनत और ईमानदारी से अपने बच्चों को खड़ा करने के लिए लगातार प्रयास करता रहा. एकमा बाजार में मुझे एक छोटी सी जगह मिली जिसमें मैंने आटा चक्की लगाया और उससे जो आमदनी होती थी उससे गाय खरीदी. उसके बाद अपनी सभी बच्चियों को पढ़ाने लगा.

होली पर इकट्ठा होगा पूरा परिवार: फिलहाल इस समय घर पर कोई भी नहीं है. सभी बेटियां अपने-अपने ड्यूटी पर हैं और बेटे राजीव सिंह राजपूत दिल्ली में है जबकि अगर सभी को छुट्टी मिली तो होली पर पूरे परिवार के लोग एक साथ इकट्ठा होंगे. क्योंकि फोर्स की नौकरी में त्योहारों के समय छुट्टी नहीं मिलती है.
आज भी आटा चक्की चलाते हैं पिता: पिता कमल सिंह आज भी एकमा बाजार ब्लॉक रोड में आटा चक्की चलाते हैं. बेटियों ने कई बार मना किया कि अब यह धंधा बंद कर दीजिए लेकिन कमल सिंह एक ही जवाब देते हैं की इसी चक्की के बदौलत आज मैंने तुम लोग को पढ़ा लिखा कर खड़ा किया है और इसको बंद करने की बात मत करना. वहीं बेटियों की सफलता के लिए मां भगवान का शुक्रिया अदा करती हैं.

"छोटी थी तो बहुत परेशानी होती थी. सबको खिलाना-पिलाना काफी मुश्किल था, लेकिन भगवान की कृपा से अपने-अपने जगह पर सब पहुंच गई है. सातों बहनों को इस मुकाम पर देखकर बहुत अच्छा लगता है."- श्रद्धा देवी, मां
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