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बिहार के खेल गुरु जय सिंह.. यूट्यूब से सीखकर बच्चों को बनाया खिलाड़ी, देश-विदेश में बिखेर रहे चमक

मिलिए नालंदा के जय सिंह से जिन्होंने बिना सरकारी मदद के बच्चों को यूट्यूब से सीख कर नेशनल-इंटरनेशनल रग्बी खिलाड़ी बनाया. पढ़ें पूरी खबर

खेल गुरु जय सिंह
खेल गुरु जय सिंह (ETV Bharat)
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By ETV Bharat Bihar Team

Published : September 3, 2025 at 7:37 PM IST

6 Min Read
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नालंदा: ज्ञान की भूमि नालंदा सिर्फ प्राचीन विश्वविद्यालयों के लिए ही नहीं, बल्कि समर्पित और जुनूनी लोगों के लिए भी जानी जाती है. ऐसी ही एक प्रेरणादायक शख्सियत हैं जय सिंह, जिन्हें आज लोग खेल गुरु के नाम से जानते हैं. जय सिंह की कहानी उन असली 'नायकों' की कहानी है. जिनके पास ना शोहरत है, ना संसाधन, लेकिन फिर भी उनके योगदान से सैकड़ों सपनों को उड़ान मिल रही है. उनकी मेहनत से रग्बी जैसे कम लोकप्रिय खेल को बिहार में पहचान मिली.

खेल गुरु जय सिंह की प्रेरक कहानी: नालंदा के सिलाव-कपटिया गांव के जय सिंह (58) की कहानी समर्पण और निस्वार्थ सेवा की मिसाल है. नालंदा म्यूजियम में सिक्योरिटी गार्ड की नौकरी करने वाले खड़ग बहादुर सिंह परिवार में जन्मे जय सिंह ने बिना किसी सरकारी मदद के बच्चों को प्रशिक्षित किया. उनके मार्गदर्शन में श्वेता शाही, धर्मशीला उर्फ ब्यूटी और प्रियंका भारती जैसी बेटियां राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर चमक चुकी हैं.

खेल गुरु जय सिंह (ETV Bharat)

श्वेता शाही से मुलाकात ने बदली जिंदगी: ईटीवी से बातचीत में जय सिंह ने बताया कि वे सफल टूर एंड ट्रेवल्स व्यवसायी और पूर्व जिला फुटबॉल खिलाड़ी हैं. करीब 8 साल तक खेल से दूर रहने के बाद, जब वे रग्बी गर्ल के नाम से इंडिया में मशहूर अंतरराष्ट्रीय रग्बी खिलाड़ी श्वेता शाही से मिले तो उनकी शिकायत ने दिल छू लिया. जय सिंह ने उसे सहयोग देने का फैसला किया, जिससे उनकी जिंदगी का नया अध्याय शुरू हुआ.

ETV Bharat GFX
ETV Bharat GFX (ETV Bharat)

यूट्यूब से सीखकर बच्चों को सशक्त बनाया: श्वेता शाही से जुड़ने के बाद जय सिंह यूट्यूब से रग्बी के गुर सीखकर बच्चों को सिखाने लगे. धीरे-धीरे 100 से अधिक बच्चे रग्बी, नेट बॉल, फेंसिंग, लगोरी, सेपकटरा, योगा और बिहार फिजिकल ट्रेनिंग मुफ्त में सीख रहे हैं. उनके प्रयासों से 10 बच्चे नेशनल नेट बॉल खिलाड़ी बने. 3 अंतरराष्ट्रीय रग्बी खिलाड़ी और 4 को खेल कोटे से नौकरी मिली है.

खिलाड़ी के साथ खेल गुरू जय सिंह
खिलाड़ी के साथ खेल गुरू जय सिंह (ETV Bharat)

रग्बी गर्ल के जन्मदाता: जय सिंह ने रग्बी जैसे कम लोकप्रिय खेल को बिहार के बच्चों तक पहुंचाया. खासकर लड़कियों को इस खेल में प्रोत्साहित किया. उनके संघर्ष और मेहनत का नतीजा यह रहा कि श्वेता शाही जैसी खिलाड़ी, जिन्हें 'रग्बी गर्ल' के नाम से जाना जाता है, अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंची. श्वेता ने जय सिंह के मार्गदर्शन में अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया और भारत का नाम रोशन किया.

रग्बी खिलाड़ी
रग्बी खिलाड़ी (ETV Bharat)

संघर्ष और समर्पण से खिलती उम्मीदें: हाल ही में जय सिंह के तीन बच्चे नेट बॉल एशिया चैंपियनशिप के ट्रायल से लौटे हैं. संसाधनों की कमी पर जय सिंह कहते हैं "अभाव में ही खिलाड़ी बनते हैं. वे नशा नहीं करते और जो पैसा दूसरों की पार्टियों पर जाता है, वह बच्चों पर खर्च करते हैं." दोस्त और परिवार भी उनकी मदद करते हैं, जो उनके समर्पण की सबसे बड़ी ताकत है.

ETV Bharat GFX
ETV Bharat GFX (ETV Bharat)

सरकार को जमीन से खेल विकास की सलाह: जय सिंह कहते हैं कि सरकार खेल के मैदान सही जगह नहीं बना रही है. उन्होंने बताया कि मैदान वहीं बनने चाहिए जहां बच्चे अभ्यास करते हैं. राजगीर का अंतरराष्ट्रीय स्टेडियम अच्छी पहल है, लेकिन बच्चे पहले स्थानीय स्तर पर तैयार हों, उन्हें खेल मैदान और किट मिलनी चाहिए. तभी वे राजगीर के खेल विवि तक पहुंच सकते हैं. उन्होंने कहा "खिलाड़ी अभाव में ही बनते हैं. सुविधाएं मिल जाएं, तो सोने पर सुहागा है."

खिलाड़ियों के साथ कोच जय सिंह
खिलाड़ियों के साथ कोच जय सिंह (ETV Bharat)

"खेल के मैदान वहां बनाइए जहां बच्चे अभ्यास कर रहे हैं. मैं कोई शिकायत नहीं करता, बल्कि सुझाव देता हूं. पहले खिलाड़ियों को तैयार करिए, फिर स्टेडियम बनाइए. जुनून हो तो यूट्यूब भी गुरू बन सकता है." -जय सिंह, खेल गुरु

जीवनभर समर्पण और युवाओं के लिए संदेश: जीवन के 60वें पड़ाव के करीब जय सिंह कहते हैं कि जब तक जान है, प्रशिक्षण का काम जारी रहेगा। वे युवाओं को मोबाइल की लत छोड़कर खेल के मैदान में आने की सलाह देते हैं ताकि वे स्वस्थ और सफल जीवन जी सकें. उनका समर्पण और संदेश दोनों ही प्रेरणादायक हैं, जो नयी पीढ़ी को दिशा देते हैं.

खिलाड़ियों के साथ कोच जय सिंह
खिलाड़ियों के साथ कोच जय सिंह (ETV Bharat)

नि:शुल्क प्रशिक्षण और समर्पण की मिसाल: जय सिंह के शिष्य रौशन कुमार जो दो साल से नेट बॉल प्रशिक्षण ले रहे हैं. रौशन ने कहा कि जय सिंह उनसे एक भी पैसा नहीं लेते. जरूरत पड़ने पर खुद उनकी मदद करते हैं. रोशन कुमार की कहानी उन सैकड़ों बच्चों की आवाज है, जिनके सपनों को जय सिंह पंख दे रहे हैं. रोशन बताते हैं "पहले मैं बस गांव में यूं ही खेला करता था." अब जय सिंह के समर्पित प्रशिक्षण से वह नेशनल नेट बॉल खिलाड़ी बन चुका है.

मैदान में अभ्यास करते खिलाड़ी
मैदान में अभ्यास करते खिलाड़ी (ETV Bharat)

'सर ने मेरी जिंदगी बदल दी': जय सिंह के सैकड़ों शिष्यों में से एक हैं रौशन कुमार जो नूरसराय प्रखंड के कपरसरी गांव के किसान उपेंद्र यादव के पुत्र हैं. रौशन अब नेट बॉल के नेशनल खिलाड़ी बन चुके हैं और ईस्ट जोन की टीम के कप्तान भी रह चुके हैं. रोशन बताते हैं कि नीतीश कुमार नाम के एक लड़के से मुलाकात हुई, जो मुझे जय सर के पास ले आया. सर ने न सिर्फ मुझे पूरी तरह सपोर्ट किया, बल्कि मेरे माता-पिता से भी बात की.

रग्बी खेल का अभ्यास करते खिलाड़ी
रग्बी खेल का अभ्यास करते खिलाड़ी (ETV Bharat)

सपनों को मिले पंख: रोशन कुमार की कहानी उन सैकड़ों बच्चों की आवाज है, जिनके सपनों को जय सिंह पंख दे रहे हैं. रोशन बताते हैं "पहले मैं बस गांव में यूं ही खेला करता था." अब जय सिंह के समर्पित प्रशिक्षण से वह नेशनल नेट बॉल खिलाड़ी बन चुका है.

खिलाड़ी रौशन के साथ कोच जय सिंह
खिलाड़ी रौशन के साथ कोच जय सिंह (ETV Bharat)

"मैं 2028 के ओलंपिक में भारत के लिए मेडल लाना चाहता हूं. मुझे पूरा विश्वास है कि जय सिंह सर के मार्गदर्शन में मैं अपना यह सपना जरूर पूरा करूंगा. उनके इस जोश और समर्पण ने उनके सपनों को सच करने की राह और भी मजबूत बना दी है"- रौशन कुमार, शिष्य

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