ETV Bharat / bharat

जानें कैसे हरिद्वार नगर निगम ने 13 करोड़ की भूमि 54 करोड़ में खरीदी, जमीन घोटाले की इनसाइड स्टोरी

हरिद्वार जमीन घोटाले में हरिद्वार जिलाधिकारी भी नप गए. इसके अलावा एक IAS और PCS अधिकारी पर भी गाज गिरी है.

Etv Bharat
हरिद्वार जमीन घोटाले (ETV Bharat)
author img

By ETV Bharat Uttarakhand Team

Published : June 3, 2025 at 3:18 PM IST

|

Updated : June 3, 2025 at 3:58 PM IST

4 Min Read
Choose ETV Bharat

हरिद्वार: उत्तराखंड के हरिद्वार जिले में जिस जमीन घोटाला मामले दो आईएएस और एक पीसीएस अधिकारी समेत 12 कर्मचारी नप गए, उस जमीन का ईटीवी भारत ने ग्राउंड पर जाकर जायजा लिया. आखिर क्या है उस जमीन की वास्तविक स्थिति और क्यों हरिद्वार नगर निगम को इस जमीन को खरीदने की जरूरत पड़ी? इस खबर में विस्तार से जानिए.

पहले आज तीन जून की कार्रवाई के बारे में जानिए: हरिद्वार जमीन घोटाले की जांच सचिव रणवीर सिंह चौहान ने की थी. उनकी जांच रिपोर्ट पर सरकार ने आज तीन जून को एक्शन लिया और हरिद्वार जिलाधिकारी कर्मेंद्र सिंह, तत्कालीन हरिद्वार नगर निगम आयुक्त आईएएस अधिकारी वरुण चौधरी और पीसीएस अधिकारी अजय वीर को सस्पेंड किया.

हरिद्वार जमीन घोटाले की ग्राउंड रिपोर्ट. (ETV Bharat)

इसके अलावा वरिष्ठ वरिष्ठ वित्त अधिकारी, नगर निगम हरिद्वार निकिता बिष्ट, वरिष्ठ वैयक्तिक सहायक विक्की, रजिस्ट्रार कानूनगो तहसील हरिद्वार राजेश कुमार और मुख्य प्रशासनिक अधिकारी तहसील हरिद्वार कमलदास को भी निलंबित किया गया है.

इससे पहले भी प्रभारी सहायक नगर आयुक्त रविंद्र कुमार दयाल की सेवा समाप्त की गई थी. वहीं प्रभारी अधिशासी अभियंता आनंद सिंह मिश्रवाण को निलंबित किया गया था. कर एवं राजस्व अधीक्षक अधिकारी लक्ष्मी कांत भट्ट और अवर अभियंता दिनेश चंद्र कांडपाल को भी संस्पेड किया था. वहीं सम्पत्ति लिपिक वेदपाल का सेवा विस्तार खत्म किया गया था. यानी इस मामले में कुल 12 अधिकारियों और कर्मचारियों पर कार्रवाई हुई है. वहीं तीन मई को ही सीएम पुष्कर सिंह धामी ने इस मामले की जांच विजिलेंस से कराने के भी आदेश दिए है. विजिलेंस की जांच में कई और अधिकारियों पर भी गाज गिर सकती है.

haridwar
हरिद्वार जमीन घोटाले में तीन अधिकारियों पर गिरी गाज (ETV Bharat)

अब जानिए पूरा मामला: दरअसल, साल 2024 में नगर निकाय चुनाव के दौरान जब आचार संहिता लगी हुई थी, तभी हरिद्वार नगर निगम ने सराय ग्राम में 33 बीघा जमीन खरीदी थी. हरिद्वार नगर निगम से ये जमीन करीब 54 करोड़ रुपए में खरीदी थी. जिस समय जमीन खरीदी गई, उस समय आचार संहिता के कारण हरिद्वार नगर निगम का पूरा सिस्टम तत्कालीन नगर आयुक्त अरुण चौधरी के हाथों में था.

बताया जा रहा है कि इस जमीन की मार्केट वैल्यू करीब 13 करोड़ रुपए है, लेकिन हरिद्वार नगर निगम के अधिकारियों ने ये जमीन 54 करोड़ रुपए में खरीदी. सबसे बड़ी बात ये है कि जमीन किस उद्देश्य से खरीदी गई, ये अभी तक भी स्पष्ट नहीं हुआ है. बता दें कि कृषि भूमि को 143 में दर्ज कराया गया था. गौरतलब हो कि 143 के अंतर्गत कृषि भूमि को गैर कृषि भूमि में बदला जाता है.

सीएम ऑफिस तक पहुंच गया था मामला: हरिद्वार मेयर चुनाव में बीजेपी प्रत्याशी किरण जैसल जीतीं और जैसे ही उन्होंने पद भार संभाला, तभी उनके सामने ये जमीन घोटाले का मामला आया. इस बाद ये मामला सार्वजनिक हो गया. विपक्ष ने भी इस मुद्दे को हवा दे दी. आखिर में मामला सीएम धामी के पास पहुंचा. सीएम धामी ने भी मामले को गंभीरता से लिया और सचिव शहरी विकास रणवीर सिंह चौहान को मामले की जांच के आदेश दिए. सचिव रणवीर सिंह चौहान की जांच पर ही आज शासन ने दो आईएएस और एक पीसीएस अधिकारी समेत 7 लोगों पर कार्रवाई की है.

नगर निगम हरिद्वार में ज़मीन खरीद घोटाले के मुख्य बिंदु

  • 19 सितंबर 2024 से शुरू होकर जमीन खरीद की कागज़ी प्रक्रिया 26 अक्टूबर को समाप्त हो गई
  • इसके बाद नवंबर माह में तीन अलग अलग तारीखों में, अलग अलग लोगों से 33-34 बीघा जमीन खरीद ली गई
  • जमीन को नगर निगम ने ₹53.70 करोड़ में खरीदी
  • खरीद की प्रक्रिया के दौरान ही भूमि की श्रेणी में बदलाव का खेल हुआ
  • श्रेणी बदलने से 13 करोड़ की जमीन 53.70 करोड़ की हो गई
  • श्रेणी बदलने के लिए 143 की प्रक्रिया तीन अक्टूबर से शुरू होकर 6 अक्टूबर को खत्म हो गई
  • श्रेणी बदलने का यह समय भूमि खरीद की प्रक्रिया के दौरान का है
  • आवेदन की तिथि से परवाना अमलदरामद होने तक मात्र 6 दिन में तत्कालीन एसडीएम अजय वीर सिंह ने सारा काम निपटा दिया
  • एसडीएम कोर्ट में एक अक्टूबर से जो मिश्लबंद बनता है, उसने चढ़ाने के बजाय नया मिश्लबंद (राजस्व वादों की पंजिका) बना दिया

पढ़ें---

Last Updated : June 3, 2025 at 3:58 PM IST