गजब का दिमाग लगाया, चप्पल से लगेगा करंट, बैग से बजेगी सीटी, शराब पीकर बैठे तो नहीं स्टार्ट होगी गाड़ी
कहते हैं प्रतिभा किसी की मोहताज नहीं होती, ऐसा क्यों कहा जाता है, पढ़ें गया से सरताज अहमद की रिपोर्ट.

Published : August 26, 2025 at 3:10 PM IST
गया : बिहार के गया के एक सरकारी स्कूल की छात्राएं अनोखी व उपयोगी, विशेष प्रकार की चप्पल पहन कर घर से निकलेंगी. उनके पास सुरक्षा कवज के रूप में एक पर्स भी होगा. वैसे देखने में चप्पल और पर्स सामान्य रूप के ही लगते हैं, लेकिन अगर कोई व्यक्ति बुरी नजर से करीब जाता है तो चप्पल से एक जोरदार झटका महसूस होगा और पर्स से चीखने की आवाज गूंजने लगेगी.
आधुनिक तकनीक से लैस इस विशेष डिवाइस चप्पल को पेटेंट कराने के लिए स्कूल प्रबंधन की ओर से कोशिश शुरू कर दी गई है. छात्राओं के नवाचार को जिला शिक्षा विभाग के प्रदर्शनी में प्रस्तुत भी किया जा चुके है. अब राष्ट्रीय स्तर के विज्ञान प्रदर्शनी में प्रदर्शन की तैयारी हो रही है.
चप्पल, पर्स में होगा डिवाइस : शहर के आदर्श नव बालिका मध्य विद्यालय की छात्रा रितिका कुमारी और परी कुमारी ने अपनी और महिलाओं की सुरक्षा के लिए चप्पल और पर्स में लगाने के लिए एक खास डिवाइस बनाया है. इस डिवाइस के संबंध में स्कूल के हेड मास्टर समेत नटखट प्रयोगशाला के इंचार्ज की ओर से दावा किया गया है कि अगर कोई मनचला युवा महिलाओं को परेशान करेगा तो उस स्थिति में उसे करंट लगेगा. करंट की तीव्रता इतनी होगी की वह व्यक्ति गिर सकता है.
लड़कियों की सुरक्षा के लिए बनाया : रितिका और परी को इसे बनाने में 1 महीने से अधिक का समय लगा है. रितिका कुमारी कहती हैं कि यह एक मॉडल विकसित किया गया है. मॉडल के नवाचार के पहले चरण में सफलता मिली है. रितिका का कहना है कि प्रयोग के रूप में खुद वो इस विशेष यंत्र से लैस चप्पल को कई बार घर से स्कूल और बाजार पहन कर निकली हैं.

क्या है चप्पल में खासियत ? : चप्पल में चार्जेबल बैटरी, स्विच, मॉस्किटो सेंसर, आयरन नेट का उपयोग किया गया है. इसको बनाने में 500 से 700 तक खर्च आ रहा है. चप्पल के स्विच को ऑन कर दिया जाता है. इसमें करंट की तीव्रता 3 एम्पीयर होती है. हालांकि ये अभी मॉडल के रूप में विकसित किया गया है. इस वजह से चार्जेबल 3.7 वोल्ट की बैटरी लगाई गई है. अगर बड़ी बैटरी लगाई गई तो इससे करंट अधिक पास होगा. अभी चार्जेबल बैटरी उपयोगिता एक बार 3 से 5 घंटा है.

''मेरी चाहत है कि महिलाओं और खास कर छोटी बच्चियों की सुरक्षा के लिए ऐसा यंत्र बनाएं जो हर महिला और बच्चियों तक आसानी से पहुंचे. उसका खर्च भी कम से कम हो. अभी इलेक्ट्रो शू नाम की एक चप्पल बनाई है, जो छेड़खानी और गंभीर हिंसा से बचाने में मदद करेगी.''- रितिका कुमारी, छात्रा
रितिका और परी कुमारी कहती हैं कि वह लड़कियों के साथ दुर्व्यवहार की घटना और हिंसा से चिंतित रहती थी. तभी उन्होंने स्कूल के नटखट लैब में इस डिजाइन को बनाने का मन बनाया. शुरुआत में कई प्रकार से कोशिश की लेकिन सफलता नहीं मिली. एक महीने की कड़ी मेहनत के बाद सफलता प्राप्त हुई.

''चप्पल पहनने वाली महिलाओं और युवतियों को कुछ सावधानी बरतनी होगी. जैसे कोई आपके करीब आता है तो आपको उसके शरीर के सेंसिटिव स्थान पर चप्पल से प्रहार करना है. इस तरह करने पर उसका परिणाम आपके लिए अच्छा होगा. वो व्यक्ति जमीन पर गिर जाएगा और आप भाग कर खतरे से बच सकती हैं. अभी ये डिवाइज प्रशिक्षण की प्रक्रिया में है, इसलिए इससे प्रहार करने पर गंभीर हानी नहीं होगी.''- परी कुमारी, छात्रा
'बैग का स्विच ऑन करते ही बजने लगेगा अलार्म' : कक्षा 8 की छात्रा रुही कुमारी और मुस्कान कुमारी बताती है कि उन लोगों के द्वारा लड़कियों और महिलाओं को किसी खतरे से सुरक्षित रखने के लिए एक विशेष प्रकार के डिवाइस को हैंड पर्स में लगाया गया है. इसका सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि अगर कोई महिलाओं के साथ किसी तरह का दुर्व्यवहार करता है. वह उस व्यक्ति को जवाब देने में सक्षम नहीं है, तो वह अपने पर्स का स्विच ऑन कर दे.

''पहले तेज आवाज में अलार्म बजने लगेगा और बैग में जीपीएस होने की वजह से उसका लोकेशन घर के लोग ट्रैक कर पाएंगे. आवाज से वो दूसरों से सहायता ले सकती हैं. इसे महिलाएं निडर होकर अपना सकती हैं. क्योंकि जैसे ही कोई व्यक्ति महिला के साथ छेड़छाड़ करने की कोशिश करेगा इसमें लगा सेंसर तुरंत सक्रिय हो जाएगा.''- मुस्कान कुमारी, छात्रा
'छोटे नवाचार से ही कुछ होगा बड़ा' : स्कूल के प्रधानाध्यापक अंजनी कुमार कहते हैं कि छोटे नवाचारों से ही कुछ बड़ा होता है. वैज्ञानिकों की खोज भी छोटे प्रयास से ही शुरू होती है, जो आगे चलकर बड़ा होता है. महिलाओं के साथ हाल के दिनों में अपराधों को बढ़ते देखकर यह खास डिवाइस छात्राओं ने तैयार किया है.
''इसको लेकर बेहद खुशी है. स्कूल की छात्राओं ने नवाचार से ना सिर्फ अपनी काबिलियत, हुनर और क्षमता का प्रदर्शन किया है बल्कि वो इतनी कम उम्र में अपने सामाजिक दायित्व को लेकर भी गंभीर हैं. इन छात्राओं के उज्जवल भविष्य और उनके आविष्कार को राष्ट्रीय स्तर पर पहुंचाने के लिए स्कूल की ओर से हर संभव सहायता की जा रही है.''- अंजनी कुमार, प्रधानाध्यापक
सड़क सेफ्टी के लिए भी बनाया डिवाइज : प्रयोगशाला के ट्रेनर मनीष कुमार कहते हैं कि लर्निंग बाय डूइंग के प्रोसेस से प्रैक्टिकल के रूप में छात्राओं को प्रयोगशाला में सिखाया जाता है. छात्राएं नई आइडिया पर आधारित प्रोजेक्ट पर काम करती हैं. इनमें वास्तविक जीवन में घटित घटनाओं से आहत होकर भी छात्राओं ने अपने नए आइडिया से स्पेशल डिवाइज का निर्माण किया है, इन्हीं में एक सड़क सुरक्षा के तहत भी डिवाइज का नवाचार किया गया है. शराब पीकर गाड़ी चलाने वालों के लिए एक डिवाइज तैयार किया गया है, जिसका नाम 'कार अल्कोहल डिटेक्टर' रखा गया है.

''इसको ट्रायल के रूप में एक प्रोजेक्ट तैयार किया गया है. जिसमें डिवाइज और सेंसर में सेनिटाइजर डालकर प्रशिक्षण किया गया है. अल्कोहल की गंध से इंजन बंद हो जाता है. जब तक अल्कोहल की गंध खत्म नहीं होगी तब तक इंजन स्टार्ट ही नहीं होगा. अगर शराब पीए हुए व्यक्ति को हटा दिया जाए तो गाड़ी का इंजन स्टार्ट हो जाएगा. इस का उद्देश्य है कि सड़क दुर्घटना को रोका जाए.''- रुही कुमारी, छात्रा
राज्य स्तरीय प्रदर्शनी में हुआ चयन : शिक्षा विभाग की ओर से करंट वाली चप्पल, अलार्म बैग और अल्कोहल यंत्र की प्रदर्शनी राज्य स्तरीय प्रदर्शनी के लिए चयनित किया गया है. इन छात्राओं का नाम 'इंस्पायर अवार्ड' के प्रतिभागियों के चयनित सूची में शामिल हुआ है. मनीष कुमार ने बताया कि पहले जिला स्तरीय प्रदर्शनी होती है, जिसमें शिक्षा पदाधिकारी और दूसरे अधिकारियों के द्वारा छात्रों को राज्य स्तरीय प्रदर्शनी के लिए चयनित किया जाता है.
राज्य स्तरीय प्रदर्शनी में अच्छे स्थान प्राप्त करने वालों को राष्ट्रीय प्रदर्शनी के लिए चयनित किया जाता है. अगर वहां डिवाइस का चयन होता है तो इंस्पायर अवार्ड के लिए नाम चयनित किया जाएगा. राष्ट्रीय स्तर पर चयनित होने के बाद भारत सरकार की ओर से इंस्पायर अवार्ड दिया जाता है.
'छात्राओं का प्रयास सराहनीय' : जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) कृष्ण मुरारी ने कहा कि सरकारी स्कूलों की शैक्षणिक और विज्ञान के ज्ञान का स्तर बेहतर हुआ है. गयाजी में इस तरह से छात्राओं का नवाचार आने वाले समय में देश दुनिया में नाम रोशन करेगा. स्कूलों में प्रयोगशाला में छात्र-छात्राएं तरह-तरह की चीजों को बनाकर अपनी काबलियत का लोहा मनवा रहे हैं. नव बालिका मध्य विद्यालय की छात्राओं का ये डिवाइस सराहनीय है.
माता पिता हैं खुश : इन छात्राओं के माता पिता भी उनकी वैज्ञानिक सोच से प्रभावित हैं. परी कुमारी के पिता दीपक कुमार और मां राखी देवी कहते हैं कि हमारी बच्चियों कि यह न केवल विज्ञान और तकनीक की समझ को दर्शाता है बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी का भी उदाहरण है. हम इतने आर्थिक रूप से मजबूत नहीं थे कि निजी स्कूलों में अपने बच्चों को पढ़ाते.
''पहले तो लाचारी में सरकारी स्कूल भेज रहे थे लेकिन अब समझ में आया कि सरकारी स्कूल भी निजी स्कूल से किसी भी स्तर से कम नहीं है. सरकारी स्कूल की बेस्ट लर्निंग का परिणाम है कि जिससे हमारी बच्चियों में नवाचार, समस्या का समाधान और व्यवहारिक ज्ञान तेजी से बढ़ रहा है. हमें आशा है कि हमारी बच्चियों के द्वारा अपने नवाचार से राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनेगी.''- राखी देवी, परी कुमारी की मां
दरअसल, आदर्श नव बालिका मध्य विद्यालय गयाजी शहर के बैरागी मोहल्ले में स्थित है, स्कूल में 300 से अधिक छात्राओं का नामांकन है. 15 से अधिक शिक्षक और शिक्षिकाएं स्कूल में पदस्थापित हैं. यहां स्कूल में 'मंत्रा फोर चेंज' के तहत नटखट प्रयोगशाला स्थापित है, जिस में क्लास 6 से 8 की छात्राएं प्रोजेक्ट पर काम करती हैं.
ये भी पढ़ें :-
शिवहर की 'शिक्षा एक्सप्रेस' में रोजाना स्कूली बच्चे करते हैं सवारी, छात्रों की उपस्थिति भी बढ़ी

