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फौजी मंदीप सिंह अमेरिका से डिपोर्ट होकर अमृतसर लौटे, सुनाई खतरनाक 'डंकी रूट' की कहानी

अमेरिका से डिपोर्ट किए गए मंदीप सिंह अमृतसर में पत्रकारों से बातचीत करते हुए आपबीती सुनाई.

अमेरिका से डिपोर्ट किए गए मंदीप सिंह अमृतसर में पत्रकारों से बातचीत करते हुए
अमेरिका से डिपोर्ट किए गए मंदीप सिंह अमृतसर में पत्रकारों से बातचीत करते हुए (ETV Bharat)
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By ETV Bharat Hindi Team

Published : February 17, 2025 at 6:40 PM IST

8 Min Read
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अमृतसर: अवैध प्रवासी भारतीयों को लेकर अमेरिका से एक और फ्लाइट अमृतसर एयरपोर्ट पर उतरी. प्लेन से उतरने वाले लोगों पर अवैध तरीके से अमेरिका में प्रवेश करने का आरोप लगा है. अमेरिकी प्रशासन ने उन सभी को डिपोर्ट कर इंडिया भेज दिया है. मंदीप उन लगभग 500 भारतीयों में से एक हैं जिन्हें अमेरिका में ट्रंप प्रशासन द्वारा इलीगल इमिग्रेशन पर कार्रवाई के तहत भारत डिपोर्ट किया गया है.

पंजाब के अमृतसर निवासी 38 वर्षीय मंदीप सिंह उन 116 अवैध प्रवासियों में से एक हैं जिन्हें शनिवार रात अमेरिका से वापस भेजा गया, मंदीप ने बताया कि उन्होंने 17 साल तक भारतीय सेना में सेवा की, उसके बाद उन्होंने एक ट्रैवल एजेंट को मोटी रकम देकर अमेरिका में बेहतर नौकरी करने का सपना संजोया था.

अमेरिका से डिपोर्ट किए गए मंदीप सिंह ने आपबीती सुनाई (Video Source: PTI)

मंदीप ने अमेरिका से अन्य निर्वासितों के साथ विशेष सैन्य विमान से अपनी यात्रा को अपमान और यातना से भरा बताया. उन्होंने आरोप लगाया कि निर्वासितों को हथकड़ी लगाई गई, उनके पैरों में बेड़ियां डाली गईं और सिख निर्वासितों की पगड़ियां उतार दी गईं.

मंदीप ने कहा, "उन्होंने हमारे साथ बहुत बुरा व्यवहार किया. उन्होंने हमें हथकड़ी लगाई, हमारे पैर बांधे और हमें फ्लाइट में ले गए. अमृतसर में फ्लाइट के उतरने से आधे घंटे पहले उन्होंने हमारे हाथ और पैरों से हथकड़ी हटा दी. उन्होंने हमें फ्लाइट में कुछ खाने को दिया ताकि बाहर के लोग सोचें कि उन्होंने हमारे साथ अच्छा व्यवहार किया है, लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया. हम 20 दिनों तक कैंप में रहे... कुछ लोग 40 दिन, कुछ 10 दिन और कुछ चार दिन रहे और वहां से अमृतसर तक हम बिना पगड़ी के आए.

मंदीप ने यह भी खुलासा किया कि उसे कानूनी तरीके से लाने का झूठा वादा करके खतरनाक 'डंकी' रूट से अमेरिका ले जाया गया था.

डंकी रूट से अमेरिका पहुंचने की कहानी, मंदीप की जुबानी
उन्होंने बातचीत में डंकी रूट से अमेरिका पहुंचने की ऐसी खतरनाक कहानी सुनाई, जिसे सुनकर शायद लोगों के रोंगटे खड़े हो जाएंगे. डंकी रूट यानी की मौत के रास्ते अमृतसर से अमेरिका पहुंचे मंदीप सिंह ने अपनी आपबीती पत्रकारों को सुनाते हुए कहा, कि डंकी रूट एक तरह से मौत का रास्ता है. यह विदेश जाने का ऐसा रास्ता है जहां फ्लाइट, गाड़ी, पैदल, नदी, जंगल और पहाड़ों से होकर गुजरना होता है. उन्होंने लोगों से अमेरिका यात्रा की खतरनाक कहानी सुनाई.

40 लाख रुपये की पूंजी एजेंट को दे दी
करीब 17 साल तक सेना में रहकर देश की सेवा करने वाले मंदीप सिंह ने अपनी पूरी जिंदगी की 40 लाख रुपये की पूंजी एजेंट को दे दी. यहीं नहीं विदेश जाने के लिए उन्होंने14 लाख रुपये का कर्ज भी ले लिया. उम्मीद थी कि अमेरिका पहुंचने का उनका सपना पूरा हो जाएगा. हालांकि, नियति के आगे वे हार गए और आखिरकार उन्हें अमेरिकी सैन्य विमान से वापस भारत लौटना पड़ा.

मंंदीप पिछले साल 13 अगस्त को अमृतसर (पंजाब) से अमेरिका के लिए रवाना हुए थे. अमृतसर से अमेरिका 'डंकी रूट' से जाने वाले अमृतसर के बटाला रोड स्थित पाम गार्डन के मंदीप सिंह अमेरिका से डिपोर्ट होने के बाद रविवार को आई तीसरी फ्लाइट से भारत पहुंचे. पत्रकारों से बात करते हुए मंदीप सिंह ने अपने दिल की व्यथा बताई है.

मंदीप ने कहा कि, उन्होंने 13 अगस्त 2024 को अमृतसर से दिल्ली की यात्रा की. फिर दिल्ली से मुंबई, फिर मुंबई से केन्या, फिर केन्या से डकार, डकार से एम्सटर्डम और एम्सटर्डम से सूरीनाम तक फ्लाइट से गया.

"मैं सोच रहा था कि मैं कानूनी तरीके से जा रहा हूं. एजेंट ने मुझे बताया कि मुझे अमेरिका भेजने में उसे लगभग एक महीने का समय लगेगा. मैं 4 से 5 दिनों में सूरीनाम पहुंच गया और मुझे बताया गया कि मैं अगले 5 से 7 दिनों में अमेरिका पहुंच जाऊंगा. जब हम सूरीनाम पहुंचे, तो उसने हमें एक कार में बिठाया और कहा कि हमें गुयाना पहुंचना है और वहां से वह एक फ्लाइट बुक करेगा. 3 से 4 दिनों की यात्रा के बाद, उसने कहा कि फ्लाइट ब्राजील से होगी. इस तरह, उसने हमें गुमराह किया और हमें मैक्सिको तक ले गया. केवल मैं ही जानता हूँ कि इस यात्रा में हमें कितने तनाव और कठिनाई का सामना करना पड़ा."

डंकी रूट की पूरी कहानी
उन्होंने बताया, सूरीनाम से गोवान्ना गए. वहां से फिर विलिविया से पेरू और फिर ब्राजील, ब्राजील से ईक्वाडोर, फिर कोलंबिया और उसके बाद पनामा के जंगल पहुंचे. इस बीच समुद्र में बिताए गए ढाई से तीन घंटे उन्हें भगवान की याद दिला दी. उन्होंने कहा कि, पनामा के जंगलों की सड़क पर उनका सामना कई सारे खतरनाक मगरमच्छ से हुआ. एक समय ऐसा आया जब या तो हमें आगे बढ़ने का कोई रास्ता नहीं मिला या हमें वापस लौटना पड़ा.

70 दिन मैगी खाकर बिताए
मंदीप सिंह ने बताया कि सफर के दौरान उन्होंने 70 दिन मैगी खाकर बिताए. भूख से बचने के लिए उन्होंने कच्ची रोटियां भी खाईं. उनके पास इसके अलावा और कोई दूसरा विकल्प भी नहीं था. उन्होंने कहा कि, भूखा मरने से अच्छा था कि, कच्ची रोटी खाकर अपनी जिंदगी को बचाएं.

एक गाड़ी में 10 से 15 लोग
मंदीप सिंह ने भरे मन से बताया कि, सीमा पार करने के बाद गाड़ियों से उन्हें जंगली रास्तों से होकर गुजरना पड़ा था. इस गाड़ी में वैसे तो 5 लोगों के बैठने की जगह होती है, लेकिन मजबूरी में 10 से 15 लोगों को बिठाया गया. ऐसी स्थिति में उन्हें टॉयलेट जाने के डर से खाना खाने में भी संकोच होता था. क्योंकि पता नहीं बाद में टॉयलेट जाने की इजाजत मिलेगी या नहीं.

स्थिति बेहद दयनीय
मंदीप ने कहा काफी दिक्कतों का सामना करते हुए पनामा जंगल को पार करने में 13 दिन लग गए. उसके बाद वे अपने शिविर में पहुंचे और वहीं रात बिताई. शिविर में बिस्कुट और कच्ची रोटी खाने को मिलीं. मंदीप ने कहा कि अमेरिका में प्रवेश करने के बाद जब अमेरिकी सेना द्वारा युवाओं की तलाशी ली जाती है और जो उनके साथ व्यवहार किया जाता है वह बेहद दर्दनाक होता है.

अमेरिका से भारत वापसी, हथकड़ी पहनाई और ....
मंदीप ने कहा कि, सैनिकों ने उनके बैग खाली कर दिए, जूते तक उतार दिए. उन्होंने कहा, सरदारों के साथ और भी बुरा व्यवहार किया जाता है. वे तो गुरसिख थे. उनके साथ और भी अमृतधारी युवक थे, जिनका सामान खोज-खोज कर फेंक दिया गया. दुमाला, पगड़ी और घूंघट भी कूड़ेदान में फेंक दिये गए. अमेरिकी सेना ने उन्हें हथकड़ी पहनाई और वापस लौटने के लिए विमान में बिठाया. मंदीप सिंह ने कहा कि वे निर्वासित होने के बाद वापस लौट रहे थे और उन्हें उस विमान में बेड़ियों से जकड़ दिया गया था और सिर ढकने के लिए कपड़े भी नहीं दिए गए थे.

उन लोगों को खाने के लिए सेब, चिप्स और फल दिए गए थे. उन्होंने कहा कि, अगर उन्हें बाथरूम जाना होता था तो उनका एक हाथ खोला जाता था. उन्होंने कहा कि, वे लोग पानी पीकर अमेरिका से अमृतसर तक का रास्ता तय किया.

गहने बेच दिए, 40 लाख एजेंट को देकर अमेरिका गए
मंदीप सिंह ने बताया कि जब वह सेना में थे तो रिटायरमेंट के समय उन्हें करीब 35 लाख रुपये की रकम मिली थी. उन्होंने अपनी पत्नी के बाकी गहने बेच दिए, फिर कुल 40 लाख रुपये एजेंट को दिए और अमेरिका चले गए. उन्होंने बताया कि उन्होंने एजेंट को 14 लाख रुपये के ब्लैंक चेक भी दिए थे. लेकिन अब एजेंट का कहना है कि वह बैठेंगे और उनसे बात करेंगे. मंदीप ने कहा कि अगर बातचीत हुई तो ठीक, नहीं तो एजेंट के खिलाफ कार्रवाई करने की गुहार लगाएंगे. वहीं मंदीप सिंह ने कहा कि शिरोमणि कमेटी को भी इसके खिलाफ सख्त कार्रवाई करनी चाहिए, जो गुरसिखों के साथ गलत व्यवहार कर रही है.

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