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इंडिया एमएसएमई कॉन्क्लेव 2025 में उभरते उद्यमों को मिला नया मंच

भारत की अर्थव्यवस्था में एमएसएमई एक मजबूत स्तंभ हैं, जो रोजगार, नवाचार और औद्योगिक विकास में अहम योगदान दे रहे हैं.

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इंडिया एमएसएमई कॉन्क्लेव 2025 (Etv Bharat)
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By ETV Bharat Hindi Team

Published : June 1, 2025 at 8:28 PM IST

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बेंगलुरु: भारत आज तेजी से दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है. इस आर्थिक विकास में छोटे और मध्यम स्तर के व्यवसाय, जिन्हें एमएसएमई (MSME) कहा जाता है, बहुत अहम भूमिका निभा रहे हैं. एमएसएमई का मतलब है सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम. ये छोटे-छोटे व्यवसाय देशभर में लाखों लोगों को रोज़गार देते हैं, नए-नए विचारों को बढ़ावा देते हैं और देश की कमाई यानी सकल घरेलू उत्पाद (GDP) में भी बड़ा योगदान करते हैं. आज भारत में करीब 6.3 करोड़ एमएसएमई सक्रिय हैं, जो दिखाता है कि यह क्षेत्र कितना बड़ा और मजबूत है.

कर्नाटक राज्य की बात करें तो वहां भी एमएसएमई का तेजी से विकास हो रहा है. फेडरेशन ऑफ कर्नाटक चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (FKCCI) के निदेशक श्रवण गुडुथुर ने बताया कि सिर्फ कर्नाटक में ही लगभग 20 लाख एमएसएमई पंजीकृत हैं. और हर महीने करीब 50,000 नए व्यवसाय रजिस्टर हो रहे हैं. इससे यह साफ पता चलता है कि लोग अब नौकरी की बजाय खुद का व्यवसाय शुरू करने की सोच रहे हैं. गुडुथुर का मानना है कि जैसे खेती भारत की रीढ़ मानी जाती है, वैसे ही एमएसएमई हमारे औद्योगिक विकास की रीढ़ हैं.

1 जून को बेंगलुरु में "इंडिया एमएसएमई कॉन्क्लेव 2025" की शुरुआत हुई. यह तीन दिन तक चलने वाला एक बड़ा कार्यक्रम है, जिसमें 250 से ज्यादा छोटे-बड़े व्यवसाय, उद्योग विशेषज्ञ और नीति बनाने वाले लोग शामिल हुए हैं. इस कॉन्क्लेव का मकसद एमएसएमई को एक ऐसा मंच देना है जहां वे अपने उत्पाद और सेवाएं दिखा सकें, नए ग्राहकों से मिल सकें और अपने व्यवसाय को आगे बढ़ाने के नए तरीके सीख सकें. यह आयोजन FKCCI, कर्नाटक लघु उद्योग संघ (KASSIA) और पीन्या इंडस्ट्रीज एसोसिएशन (PIA) ने मिलकर किया है.

गुडुथुर ने यह भी बताया कि FKCCI जैसे संगठन सिर्फ व्यापार में मदद ही नहीं करते, बल्कि नए उद्यमियों को रास्ता भी दिखाते हैं. वे "मंथन" नाम से एक मेंटरशिप प्रोग्राम चला रहे हैं, जिसमें कॉलेजों के छात्र और युवा उद्यमियों को यह सिखाया जाता है कि एक अच्छा बिजनेस आइडिया कैसे शुरू किया जाए और उसे आगे कैसे बढ़ाया जाए. ऐसे कार्यक्रम युवाओं को आत्मनिर्भर बनने की प्रेरणा देते हैं और उन्हें सही जानकारी और मार्गदर्शन भी देते हैं.

अंत में यह कहना सही होगा कि भारत के आर्थिक विकास की गाड़ी को आगे बढ़ाने में एमएसएमई एक मजबूत इंजन की तरह काम कर रहे हैं. लेकिन इस विकास को बनाए रखने के लिए लगातार सहयोग, प्रशिक्षण, तकनीकी सहायता और नीति समर्थन की जरूरत है.

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