भारत ने बनाया स्वदेशी सेमीकंडक्टर चिप, धनबाद के IIT-ISM का बड़ा योगदान
भारत ने स्वदेशी सेमीकंडक्टर चिप बनाने में सफलता हासिल की है. इसमें बड़ा योगदान धनबाद के IIT-ISM का है.

Published : September 5, 2025 at 5:03 PM IST
नरेंद्र निषाद की रिपोर्ट
धनबाद: भारत ने सेमीकंडक्टर चिप निर्माण के क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है. पहले ताइवान और ब्राजील जैसे देशों से आयात होने वाले सेमीकंडक्टर चिप्स का निर्माण अब देश में ही शुरू हो गया है. आईआईटी आईएसएम धनबाद के इलेक्ट्रॉनिक्स एंड इंजीनियरिंग विभाग ने प्रोफेसर राजीव कुमार रंजन के नेतृत्व में स्वदेशी इंटीग्रेटेड सर्किट 'एपीईसी 1' विकसित किया है. यह चिप सेमीकंडक्टर अनुसंधान में आईआईटी आईएसएम की अहम भूमिका को रेखांकित करती है.
2023 में शुरू हुई चिप डिजाइन की प्रक्रिया
इस स्वदेशी चिप के डिजाइन की प्रक्रिया साल 2023 में शुरू हुई थी. इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने इसके लिए 1.12 करोड़ रुपये का प्रारंभिक फंड उपलब्ध कराया था. प्रो. राजीव कुमार रंजन ने ईटीवी भारत से खास बातचीत में बताया कि उनकी टीम ने पहले सर्किट डिजाइन तैयार किया, जिसे मोहाली की सेमीकंडक्टर लैबोरेट्री में भेजा गया. वहां चिप का निर्माण (फैब्रिकेशन) किया गया. इस चिप का नाम 'मेमरेस्टर एमुलेटर' रखा गया है, जिसे कम बिजली खपत (लो पावर) के आधार पर डिजाइन किया गया है.
स्मार्ट ग्लास के लिए खास डिजाइन
'एपीईसी 1' चिप को विशेष रूप से दृष्टिबाधित लोगों के लिए स्मार्ट ग्लास के उपयोग के लिए डिजाइन किया गया है. यह चिप बिना इंटरनेट के भी कार्य कर सकती है. प्रो. राजीव ने बताया कि इस चिप का उपयोग डेटा स्टोरेज और लो पावर हाई फ्रीक्वेंसी की जरूरत वाले क्षेत्रों जैसे सीपीयू, एसएनएम आर्किटेक्चर और डिफेंस में भी किया जा सकता है. इसके आर्किटेक्चर में मामूली बदलाव कर इसे विभिन्न जरूरतों के लिए अनुकूलित किया जा सकता है.

सेमिकॉन इंडिया 2025 में मिली सराहना
2 अगस्त को दिल्ली में आयोजित सेमिकॉन इंडिया 2025 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव की उपस्थिति में इस चिप ने खूब चर्चा बटोरी. मोहाली लैब में फैब्रिकेशन के बाद यह चिप आईआईटी आईएसएम की टीम को सौंपी गई. प्रो. राजीव ने कहा, "इस चिप को प्राप्त करने की खुशी अवर्णनीय थी. यह हमारी मेहनत और लगन का परिणाम है."

चुनौतियों से भरा रहा सफर
चिप डिजाइन की प्रक्रिया आसान नहीं थी. सिमुलेशन के दौरान कई कठिनाइयों का सामना करना पड़ा और डिजाइन में बार-बार असफलताएं मिलीं. प्रो. राजीव ने बताया कि उनकी टीम में एमटेक और पीएचडी के छात्रों ने महत्वपूर्ण योगदान दिया. इस चिप के प्रोटोटाइप को दृष्टिबाधित लोगों के लिए स्मार्ट ग्लास में उपयोग के लिए और बेहतर करने पर काम चल रहा है. इसमें ब्रेन न्यूरो स्ट्रक्चर को बेहतर करने और अधिक ऑब्जेक्ट्स को शामिल करने की दिशा में अनुसंधान जारी है.

स्वदेशी चिप से आत्मनिर्भरता की ओर
प्रो. राजीव ने बताया कि यह चिप पूरी तरह स्वदेशी है, जो संस्थान के लिए गर्व की बात है. पहले आईआईटी आईएसएम की ओर से चिप डिजाइन कर बेल्जियम में फैब्रिकेशन कराया गया था, लेकिन 'एपीईसी 1' का निर्माण पूरी तरह भारत में हुआ है. उन्होंने कहा कि एक बार चार्ज करने पर यह चिप दो दिनों तक काम कर सकती है. यह आत्मनिर्भर भारत की दिशा में एक बड़ा कदम है, जो आयात पर निर्भरता को कम करेगा.

युवाओं के लिए अपार संभावनाएं
प्रो. राजीव ने युवाओं से वीएलएसआई डिजाइन के क्षेत्र में करियर बनाने का आह्वान किया. उन्होंने कहा कि मेक इन इंडिया के तहत सेमीकंडक्टर चिप निर्माण को बढ़ावा देने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लगातार प्रोत्साहन दे रहे हैं. इस क्षेत्र में युवाओं के लिए अपार संभावनाएं हैं. आगे और अनुसंधान की जरूरत पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि जैसे-जैसे हम आगे बढ़ेंगे, नई खोजें सामने आएंगी.

आत्मनिर्भर भारत का सपना
यह स्वदेशी चिप न केवल तकनीकी क्षेत्र में भारत की प्रगति को दर्शाता है, बल्कि टैरिफ वॉर जैसी वैश्विक चुनौतियों के बीच आत्मनिर्भरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है. इस उपलब्धि से भारत न केवल आयात पर निर्भरता कम करेगा, बल्कि वैश्विक स्तर पर सेमीकंडक्टर क्षेत्र में अपनी पहचान भी मजबूत करेगा.
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