पाकिस्तान को झटका, 'अफगानिस्तान में फिर से खुलेगा भारतीय दूतावास', मुत्ताकी से मुलाकात के बाद जयशंकर ने किया ऐलान
अफगानिस्तान के विदेश मंत्री मुत्ताकी भारत के दौरे पर हैं. इस दौरान यह बड़ी घोषणा की गई है.

Published : October 10, 2025 at 1:15 PM IST
नई दिल्ली: विदेश मंत्री एस जयशंकर ने भारत के दौरे पर आए अफगानिस्तान के अपने समकक्ष अमीर खान मुत्ताकी के साथ द्विपक्षीय बैठक की. बैठक के दौरान जयशंकर ने बड़ी घोषणा करते हुए कहा कि अब काबुल में मौजूद टेक्निकल मिशन को भारतीय दूतावास का दर्जा दिया जाएगा.
अगस्त 2021 में, तालिबान द्वारा अफगानिस्तान की सरकार पर नियंत्रण करने के बाद, भारत ने अफगानिस्तान में अपने दूतावास और वाणिज्य दूतावास बंद कर दिए थे. इसके बाद, भारत ने 2022 में एक तकनीकी टीम अफगानिस्तान भेजकर वहां अपनी राजनयिक उपस्थिति फिर से स्थापित की. अब फिर से यहां पर दूतावास को खोला जा रहा है.
अफगान विदेश मंत्री मुत्ताकी के साथ बैठक के दौरान, विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने कहा, "मुझे आज काबुल स्थित भारत के तकनीकी मिशन को भारतीय दूतावास के स्तर पर अपग्रेड करने की घोषणा करते हुए खुशी हो रही है."
#WATCH | During the meeting with Afghan FM Muttaqi, External Affairs Minister Dr S Jaishankar says, " we must coordinate efforts to combat terrorism in all its forms and manifestations."
— ANI (@ANI) October 10, 2025
"we have a common commitment towards growth and prosperity. however, these are endangered by… pic.twitter.com/tNv6RfulN0
जयशंकर ने कहा कि, भारत अफगानिस्तान की संप्रभुता, क्षेत्रीय अखंडता और स्वतंत्रता के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है. अफगान विदेश मंत्री मुत्ताकी के साथ बैठक के दौरान, विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर ने कहा कि, भारत और अफगानिस्तान को आतंकवाद से निपटने के लिए प्रयासों में समन्वय करना चाहिए.
जयशंकर ने कहा कि, भारत अफगानिस्तान के लोगों का शुभचिंतक है और वह उसके विकास में भी गहरी रूचि रखता है. उन्होंने कहा कि, मुत्ताकी की भारत यात्रा दोनों देशों के संबंधों को आगे बढ़ाने के दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है.
बता दें कि, अफगानिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति अशरफ गनी के सत्ता से हटने और तालिबान के सत्ता अपने हाथ में लेने के चार साल बाद तालिबान सरकार के किसी नेता की काबुल से भारत की यह पहली उच्च-स्तरीय यात्रा है. बैठक के दौरान जयशंकर ने कहा कि,"विकास और समृद्धि के प्रति हमारी साझा प्रतिबद्धता है. हालांकि, ये दोनों देशों के सामने मौजूद सीमा पार आतंकवाद के खतरे से जूझ रहे हैं.
उन्होंने कहा कि, हमें आतंकवाद के सभी रूपों और अभिव्यक्तियों से निपटने के लिए प्रयासों में समन्वय करना चाहिए. जयशंकर ने मुत्ताकी से कहा कि, वे भारत की सुरक्षा चिंताओं के प्रति अफगानिस्तान की संवेदनशीलता की सराहना करते हैं. खासकर पहलगाम आतंकवादी हमले के बाद भारत के साथ काबुल की एकजुटता उल्लेखनीय थी.
#WATCH | During meeting with Afghan FM Muttaqi, External Affairs Minister Dr S Jaishankar says, " i am pleased to announce today the upgrading of india’s technical mission in kabul to the status of embassy of india..."
— ANI (@ANI) October 10, 2025
"india is fully committed to the sovereignty, territorial… pic.twitter.com/OwnzEDSfgU
जयशंकर ने मुत्ताकी के साथ द्विपक्षीय बैठक के दौरान कहा कि, उन्हें एक बार पहलगाम आतंकवादी हमले के बाद और दूसरी बार कुनार और नांगरहार भूकंप के बाद एक-दूसरे से बात करने का अवसर मिला था. पिछले महीने आपदा के कुछ घंटों के भीतर भारतीय राहत सामग्री भूकंप स्थलों पर पहुंचा दी गई थी. उन्होंने कहा कि, भारत प्रभावित क्षेत्रों में आवासों के पुनर्निर्माण में योगदान देना चाहेगा.
द्विपक्षीय बैठक के दौरान, विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने कहा अफगानिस्तान के विदेश मंत्री से कहा कि, अफ़गानिस्तान में खनन के अवसरों का पता लगाने के लिए भारतीय कंपनियों को उनका निमंत्रण भी अत्यंत सराहनीय है. इस पर आगे भी चर्चा की जा सकती है. जयशंकर ने कहा, "व्यापार और वाणिज्य को बढ़ावा देने में हमारी साझा रुचि है." उन्होंने कहा कि, काबुल और नई दिल्ली के बीच अतिरिक्त उड़ानें शुरू होने की जानकारी पाकर खुशी हो रही है.
पीटीआई एजेंसी के मुताबिक, मुत्ताकी अपनी छह दिवसीय भारत यात्रा के दौरान विदेश मंत्री एस जयशंकर के अलावा राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल के साथ व्यापक बातचीत करेंगे. अफगानिस्तान के विदेश मंत्री का पिछले महीने नई दिल्ली का दौरा निर्धारित था, लेकिन संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) के प्रतिबंधों के तहत उन पर लगे यात्रा प्रतिबंध के कारण इसे रद्द कर दिया गया था.
संयुक्त राष्ट्र के एक बयान के अनुसार संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की समिति ने 30 सितंबर को मुत्ताकी को 9 से 16 अक्टूबर तक नयी दिल्ली की यात्रा की अनुमति देते हुए यात्रा प्रतिबंध में अस्थायी छूट को मंजूरी दे दी है. इस छूट ने अफगान विदेश मंत्री के भारत दौरे का रास्ता साफ कर दिया.
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने सभी प्रमुख तालिबान नेताओं पर प्रतिबंध लगाए थे और उन्हें विदेश यात्राओं के लिए यात्रा मंजूरी हासिल करना जरूरी होता है. मुत्ताकी की भारत यात्रा से काबुल में तालिबान के साथ भारत के संबंधों में एक नया आयाम जुड़ने की उम्मीद है. विदेश मंत्री एस जयशंकर ने 15 मई को मुत्तकी से फोन पर बातचीत की थी.
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