घरों और अपार्टमेंट में चल रहा अवैध शराब का कारोबार, अलर्ट पर उत्पाद विभाग
रांची के शहरी इलाकों के घरों और अपार्टमेंट में अवैध शराब का कारोबार चल रहा है. उत्पाद विभाग की कार्रवाई में इसका खुलासा हुआ है.


Published : July 5, 2025 at 4:36 PM IST
रांची: राजधानी में शराब माफिया अब रिहायशी इलाकों में मकान और फ्लैट लेकर अवैध शराब बना रहे हैं, कई जगहों पर शराब माफिया ने बॉटलिंग प्लांट भी लगा लिए हैं. पिछले छह महीने के दौरान उत्पाद विभाग ने दो दर्जन से अधिक अवैध शराब फैक्ट्रियों को ध्वस्त किया है, जिनमें से अधिकांश मकान और फ्लैट में थीं.
गांव से शहर में शिफ्ट हुआ कारोबार
उत्पाद विभाग से मिली जानकारी के अनुसार, साल 2025 में अब तक उत्पाद विभाग और पुलिस ने मिलकर करीब 25 हजार लीटर अवैध शराब नष्ट की है और तीन दर्जन से अधिक शराब तस्करों को सलाखों के पीछे पहुंचाया है, लेकिन अवैध शराब के कारोबार में इतना मुनाफा है कि शराब तस्कर किसी भी कीमत पर इस कारोबार को जारी रखना चाहते हैं. यही वजह है कि पुलिस और .उत्पाद विभाग की नजरों से बचने के लिए अब शराब माफिया अपना कारोबार शहर के नजदीक मकान और फ्लैट में शिफ्ट कर रहे हैं. पहले शराब माफिया दूरदराज के इलाकों में अपनी अवैध शराब फैक्ट्री बनाते थे, लेकिन जब पुलिस और उत्पाद विभाग की टीम ने वहां भी छापेमारी शुरू की तो यह कारोबार मकान और फ्लैट में शिफ्ट हो गया.
"शराब माफिया चाहे जितनी भी चालाकी करें, वे पकड़े जरूर जाएंगे. हाल के दिनों में घरों और फ्लैटों में शराब की फैक्ट्री चलाने वाले लोग पकड़े गए हैं और फैक्ट्री को ध्वस्त भी किया गया है. हमारी कार्रवाई जारी है और आबकारी विभाग का मुख्य काम अवैध शराब पर नकेल कसना है." - अरविंद कुमार मिश्रा, सहायक आयुक्त, उत्पाद विभाग
केस स्टडी (मार्च से जुलाई 05)
उत्पाद विभाग और पुलिस द्वारा हालिया कार्रवाई में कई खुलासे हुए हैं. कुछ ऐसे ही मामले हैं, जिसके खुलासे के बाद उत्पाद विभाग को कई जानकारियां मिली हैं.
केस 1
रांची के टाटीसिल्वे इलाके में एक घर में उत्पाद विभाग ने अवैध शराब फैक्ट्री का पर्दाफाश किया है. शराब माफिया ने रिहायशी इलाके में एक घर को अवैध शराब फैक्ट्री में तब्दील कर रखा था. मौके से दो लोगों को गिरफ्तार किया गया जो बोतलों में नकली शराब भर रहे थे, 500 से ज्यादा पेटी नकली शराब भी जब्त की गई.
केस 2
फैक्ट्री देख हैरान रह गई टीम
रांची के सिकिदरी इलाके में बड़े पैमाने पर नकली शराब बनाई जा रही थी. एक घर को नकली शराब बनाने की फैक्ट्री में तब्दील कर दिया गया था. मामले की जानकारी मिलने के बाद उत्पाद विभाग ने छापेमारी की. मिनी फैक्ट्री से 600 पेटी शराब, कई कंपनियों के रैपर लगे 500 लीटर से ज्यादा नकली शराब के साथ ही 600 से ज्यादा खाली बोतलें बरामद की गईं. मिनी शराब फैक्ट्री में महंगे ब्रांड की बोतलों में उनके रैपर लगाकर घटिया शराब भरी जाती थी और फिर उसे बिहार के बाजार में बेचा जाता था. मौके से चार लोगों को गिरफ्तार किया गया.
केस 3
अप्रैल में उत्पाद विभाग की टीम ने रांची के लालपुर थाना क्षेत्र के केएम मलिक रोड में छापेमारी कर एक बड़े अवैध शराब के अड्डे का भंडाफोड़ किया था. उत्पाद विभाग की टीम ने शिवपूजन साहू के घर छापेमारी कर कई ब्रांड की 116.445 लीटर नकली विदेशी शराब, कई ब्रांड के लेबल/ढक्कन, खाली बोतलें और सरकारी होलोग्राम बरामद किए थे. दरअसल, उत्पाद विभाग के सहायक आयुक्त को सूचना मिली थी कि लालपुर इलाके में बड़े पैमाने पर नकली शराब बनाई जा रही है. इसी सूचना पर छापेमारी की गई जिसमें बड़े पैमाने पर नकली शराब बरामद की गई. छापेमारी में दो लोगों को गिरफ्तार भी किया गया है जो नकली शराब बनाते थे. यह शराब फैक्ट्री रांची शहर के बीचों-बीच चल रही थी.
केस 4
22 जून को .उत्पाद विभाग ने रांची के तीन थाना क्षेत्रों में एक साथ छापेमारी कर तीन अवैध शराब फैक्ट्री को ध्वस्त करते हुए तीन लोगों को गिरफ्तार किया था. सभी शराब फैक्ट्री घरों में संचालित की जा रही थी. उत्पाद विभाग ने सिकिदरी, अनगड़ा और नामकुम इलाके में छापेमारी कर तीनों थाना क्षेत्रों से एक-एक आरोपी को गिरफ्तार किया है. इस पूरे गिरोह के मास्टरमाइंड रामनाथ गोप को भी उत्पाद विभाग ने गिरफ्तार किया है, जो पहले भी अवैध शराब के मामले में जेल जा चुका है. तीनों जगहों पर छापेमारी के दौरान 400 पेटी अवैध शराब जब्त की गई है.
स्पेशल ब्रांच की रिपोर्ट: 100 से अधिक घरों में बन रही है शराब
हाल ही में झारखंड पुलिस की स्पेशल ब्रांच ने एक रिपोर्ट में बताया था कि रांची जिले में सक्रिय शराब माफिया 100 से अधिक घरों को किराए पर लेकर या अपने घरों में अवैध शराब बना रहे हैं. रिपोर्ट में यह भी कहा गया था कि शराब माफिया पुलिस की नजरों से बचने के लिए अपने घरों में अवैध रूप से देसी और विदेशी शराब बना रहे हैं और बेच रहे हैं. स्पेशल ब्रांच ने कुछ लोकेशन एक्साइज डिपार्टमेंट और पुलिस के साथ भी शेयर की थी.
तस्करी का ट्रेंड भी बदला
जिस तरह शराब माफिया अब घरों में शराब की फैक्ट्री बना रहे हैं, उसी तरह राजधानी समेत कई शहरों में शराब तस्करी का ट्रेंड भी बदल गया है. शराब तस्कर अब तस्करी के लिए भारी वाहनों की जगह लग्जरी कारों का इस्तेमाल करने लगे हैं. तस्करी के दौरान पकड़े जाने से बचने के लिए शराब माफिया लग्जरी वाहनों पर राजनीतिक दलों के झंडे भी लगा रहे हैं. तस्कर नकली शराब बेचने के लिए हर दिन नए-नए हथकंडे अपना रहे हैं, ताकि वे एक्साइज और पुलिस विभाग की नजर में न आएं. पिछले साल एक्साइज डिपार्टमेंट ने ऐसे एक दर्जन शराब तस्करों को सलाखों के पीछे डाला था.
लग्जरी वाहनों में पकड़े जाने की संभावना कम
लग्जरी वाहनों में शराब तस्करी के दौरान पकड़े जाने और संदेह होने की संभावना कम होती है. पुलिस और आबकारी विभाग भी ऐसे वाहनों पर जल्दी हाथ नहीं डालता. अब बाजार में ऐसे लग्जरी वाहन भी आ गए हैं, जिनमें पर्याप्त जगह है. ऐसे में शराब तस्करों के लिए ये वाहन तस्करी के लिए मुफीद साबित हो रहे हैं.
बिहार है बड़ा बाजार
वर्ष 2016 में बिहार में शराबबंदी ने शराब माफियाओं के लिए अवैध कमाई का नया रास्ता खोल दिया. झारखंड के शराब माफियाओं ने इस मौके का पूरा फायदा उठाना शुरू कर दिया. झारखंड में नकली और मिलावटी शराब बनाकर बिहार के बाजार में बेची जा रही है.
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