क्रिटिकल मिनरल्स मिशन और रेयर अर्थ एलिमेंट्स पर काम करेगा IIT-ISM धनबाद, सेंटर ऑफ एक्सीलेंस की हुई स्थापना
क्रिटिकल मिनरल्स और रेयर अर्थ एलिमेंट्स की खोज के लिए आईआईटी आईएसएम धनबाद में सेंटर ऑफ एक्सीलेंस की स्थापना की गई है.

Published : September 16, 2025 at 1:57 PM IST
धनबाद: आईआईटी आईएसएम धनबाद में सेंटर ऑफ एक्सीलेंस स्थापित किया गया है, जो क्रिटिकल मिनरल्स मिशन और रेयर अर्थ एलिमेंट्स पर काम कर रहा है. इस मिशन में माइनिंग सेक्टर की कंपनियां और विदेश के यूनिवर्सिटी भी शामिल हैं. एक्सप्लोरेशन,माइनिंग और प्रोसेसिंग में आईआईटी आईएसएम मुख्य भूमिका में रहेगा. इस संबंध में आईआईटी आईएसएम धनबाद के डिप्टी डायरेक्टर प्रो. धीरज कुमार के साथ ईटीवी भारत ने खास बातचीत की. जिसमें उन्होंने इस मिशन से जुड़ी विस्तृत जानकारी दी है.
सेंटर ऑफ एक्सीलेंस स्थापित करने का उद्देश्य
प्रो. धीरज कुमार ने बताया कि भारत सरकार की मिनिस्ट्री ऑफ माइंस की ओर से आईआईटी आईएसएम धनबाद में सेंटर ऑफ एक्सीलेंस स्थापित किया गया है. संस्थान में सरकार की क्रिटिकल मिनरल की मिशन पर काम किया जा रहा है. साथ ही रेयर ऑफ एलिमेंट्स पर भी काम किया जाएगा.
भारत सरकार ने सीईओ के रूप में इसे परिभाषित किया है. इस सीईओ के अंदर में हब और स्कोप मॉडल में हमारे साथ एकेडमिक इंस्टीट्यूट, आरएनडी ऑर्गनाइजेशन और इंडस्ट्रीज आईएसएम के साथ जुड़े हैं. जिसमें बेसिक फोकस एक्सप्लोरेशन ऑफ क्रिटिकल मिनरल्स, रेयर अर्थ एलिमेंट्स,माइनिंग ऑफ क्रिटिकल मिनरल्स और प्रोसेसिंग शामिल है. माइनिंग के बाद ओर निकलेंगे,ओर के बाद मिनरल्स और फिर मिनिरल्स को प्रोसेस कर मेटल तैयार किया जाता है. इसे साइक्लिंग कहते हैं. एक्सप्लोरेशन, माइनिंग और प्रोसेसिंग में आईएसएम मुख्य भूमिका में रहेगा.
आईएसएम में ऑब्जर्वेटरी की भी स्थापना की जाएगी
आईआईटी आईएसएम धनबाद के डिप्टी डायरेक्टर ने बताया कि सेंटर ऑफ एक्सीलेंस में ऑब्जर्वेटरी की भी स्थापना की जाएगी. जिसमें डिजिटल मैपिंग ऑब्जर्वेटरी होगा. इसके माध्यम से हम क्रिटिकल मिनरल्स की सप्लाई चेन को समझ सकेंगे. मिनरल्स का आयात-निर्यात और प्रोडक्शन संबंधित जानकारी हमारे पास होगी.जो भी देश में इसमें शामिल रहेंगे, उनकी विस्तृत जानकारी उपलब्ध रहेगी. जिससे यह भी पता चल सकेगा कि भारत में क्रिटिकल मिनरल्स की आवश्यकता कितनी है. भारत का क्रिटिकल मिनरल्स का प्रोडक्शन ,आयात और निर्यात संबंधी तमाम जानकारी हमारे पास उपलब्ध रहेगी. यह मिशन डिजिटल सपोर्ट सिस्टम के रूप में कार्य करेगी.
कई विदेशी यूनिवर्सिटी भी मिशन में शामिल
उन्होंने बताया कि भारत सरकार की इस मिशन में फिलहाल क्रिटिकल मिनरल्स में ब्राजील यूनिवर्सिटी, ऑस्ट्रेलिया की यूनिवर्सिटी और यूके की कैंब्रिज यूनिवर्सिटी शामिल हैं. उन्होंने कहा कि ऑस्ट्रेलिया और यूके क्रिटिकल मिनरल्स की प्रोसेसिंग के क्षेत्र में आगे है. इसलिए उन्हें जोड़ा गया है. ऑस्ट्रेलिया के पास क्रिटिकल मिनरल्स और रेयर अर्थ का भंडार है. हम मिलकर इन संस्थानों के साथ काम करेंगे.
साथ ही भारत के आईआईटी बीएचयू ,आईआईटी गांधीनगर और इंडस्ट्रीज के रूप में हिंदुस्तान कॉपर लिमिटेड के साथ ही आगे अन्य बड़ी-बड़ी कंपनियां जुड़ने के लिए तैयार हैं. उनकी आने वाली समस्याओं को हमारे द्वारा समाधान किया जाएगा. साथ ही हम क्रिटिकल मिनरल्स और रेयर अर्थ एलिमेंट्स की देश की खपत को भी हम पूरा कर सकेंगे.
कैसे होता है क्रिटिकल मिनरल्स का भंडारण?
इस सवाल पर प्रो. धीरज कुमार ने कहा कि भारत में क्रिटिकल मिनरल्स के भंडारण को लेकर फिलहाल कुछ कहा नहीं जा सकता है, लेकिन हमारे देश में इसका काफी स्कोप है. राजस्थान और मध्य प्रदेश में इसकी बहुतायत की जानकारी मिली है. कोल डंप में भी क्रिटिकल मिनरल्स की संभावना हो सकती है. सिंगरैनी और कोल इंडिया के पास माइंस हैं अन्य माइनिंग क्षेत्र में कार्य करने वाली कंपनियां भी क्रिटिकल मिनरल्स के क्षेत्र में जा रही हैं.
मेक इन इंडिया मॉडल पर फोकस
आईआईटी आईएसएम धनबाद के डिप्टी डायरेक्टर ने कहा कि फिलहाल इलेट्रॉनिक प्रोडक्ट के एक्सपोर्ट में चाइना लीड करता है. ज्यादातर इलेक्ट्रॉनिक प्रोडक्ट मेड इन चाइना होते हैं. इसलिए चाइना को क्रिटिकल मिनरल्स की अधिक जरूरत है. हमारी कोशिश है कि हम खुद का प्रोडक्शन हाउस डेवलप करें. हम मेक इन इंडिया मॉडल की ओर बढ़ रहे हैं. हमें क्रिटिकल मिनरल्स की जरूरत समझ में आ रही है. यही कारण है कि क्रिटिकल मिनरल्स के क्षेत्र में हम आगे बढ़ रहे हैं.
कब तक भारत बनेगा आत्मनिर्भर?
इस सवाल पर प्रो. धीरज कुमार ने कहा कि रेयर अर्थ एलिमेंट्स और क्रिकिटकल मिनरल्स को लेकर हम काफी कम समय में बहुत ज्यादा कार्य कर रहे हैं. भारत ने दो महीने पहले ही नेशनल क्रिटिकल मिनरल्स मिशन को लॉन्च किया है. महज दो महीने में ही भारत सरकार ने सात सेंटर ऑफ एक्सीलेंस की स्थापना कर दी. 36 हजार करोड़ से भी अधिक राशि सरकार इस पर खर्च कर रही है. यही नहीं जितने भी इंडस्ट्रीज हैं, उन्हें लक्ष्य दिया गया है कि जहां भी क्रिटिकल मिनरल्स के भंडारण की संभावना है वहां फौरन माइनिंग कार्य शुरू कर दिया जाए. क्रिटिकल मिनरल्स के क्षेत्र में दूसरे देशों ने 15 से 20 साल लगाए हैं, लेकिन हमें 5 से 10 साल में इसे पूरा करने का लक्ष्य भारत सरकार ने दिया है. हम इस लक्ष्य को पूरा करने में लगे हैं.
रेयर अर्थ मिनरल्स की आवश्यकता क्यों?
रेयर अर्थ मिनरल्स की आवश्यकता की जानकारी देते हुए प्रो. धीरज ने बताया कि रेयर अर्थ मिनरल्स में पाए जान वाले रासायनिक एलिमेंट्स आधुनिक तकनीक के लिए अति आवश्यक हैं. स्मार्ट फोन, कंप्यूटर, मेडिकल उपकरण जैसे एमआरआई, इलेक्ट्रिक वाहन की बैटरी और डिफेंस सिस्टम में इस्तेमाल किए जाते हैं.
आपको बता दें कि माइनिंग के क्षेत्र में आईआईटी आईएसएम धनबाद का 99 साल का इतिहास है, जबकि मिनरल्स के क्षेत्र में 35 से 40 वर्षों का इतिहास रहा है. देश में कोई ऐसा आईआईटी संस्थान नहीं है जो मिनरल्स इंजीनियरिंग में बीटेक की डिग्री प्रदान करती है. मिनरल्स को प्रोसेसिंग करने की क्षमता आईएसएम के पास सबसे अधिक है. देश में अधिकतर मिनरल्स प्लांट का डिजाइन आईएसएम के मिनरल्स डिपार्टमेंट के द्वारा किया गया है.
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