मुनाफे का "मोती", नौकरी छोड़ घर में शुरू की खेती, करोड़ों रुपए की कमाई, हैदराबाद से विदेश तक सप्लाई
हरियाणा के कुरुक्षेत्र के दो दोस्तों ने प्राइवेट नौकरी छोड़कर घर में मोती की खेती शुरू की और आज वे करोड़ों रुपए कमा रहे हैं.

Published : March 29, 2025 at 8:36 PM IST
|Updated : April 20, 2025 at 12:44 PM IST
कुरुक्षेत्र : कहते हैं कि अगर इंसान में कुछ कर गुजरने का जुनून हो तो वो बुलंदियों को छू लेता है. ऐसे ही एक कहानी है हरियाणा के कुरुक्षेत्र जिले के बुहानी गांव के रहने वाले दो दोस्तों की जिन्होंने एक प्राइवेट फैक्ट्री में इंजीनियरिंग की नौकरी छोड़ी और आज घर में मोती की खेती से करोड़ों रुपए कमा रहे हैं.
एक विज्ञापन ने बदली दो दोस्तों की जिंदगी : कुरुक्षेत्र के बुहानी गांव के रहने वाले दो दोस्त सलिंदर और राजेश की ये प्रेरणादायक कहानी है जो कभी एक फैक्ट्री में काम करते थे, लेकिन उनकी तनख्वाह इतनी कम थी कि परिवार का पालन पोषण करना मुश्किल हो रहा था. इसके बाद उन्होंने खुद अपना काम करने की सोची लेकिन काफी रिसर्च करने के बावजूद वे कंफ्यूज़ थे कि आखिर वो ऐसा क्या करे जिससे उन्हें अच्छी कमाई हो सके. ऐसे में उन्हें एक दिन अचानक कंप्यूटर पर काम करते हुए मोती की खेती करने की कोचिंग देने वाले इंस्टिट्यूट का विज्ञापन नज़र आया और उन्होंने फैसला लिया कि वे मोतियों की खेती की ट्रेनिंग लेंगे और यही वो टर्निंग पॉइंट था जिसने दोनों दोस्तों की किस्मत हमेशा के लिए बदलकर रख दी.
छोटे से स्तर से की मोती की खेती : सलिंदर कुमार ने कहा कि विज्ञापन देखने के बाद उन्होंने ओडिशा के भुवनेश्वर से मोतियों की खेती की ट्रेनिंग ली और उसके बाद उन्हें अपने घर पर ही मोती की खेती का आईडिया आया. उन्होंने घर लौटकर पानी स्टोर करने के लिए टैंक बनाया. पहली बार टैंक बनाने और सीप को मिलाकर कुल 3,000,00 रुपए का खर्च आया. वहीं 13 महीने के बाद उन्हें साढ़े 7 लाख रुपए की आमदनी हुई और फिर उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा. उन्होंने 1000 सीप से शुरुआत की थी और अब वे 3 लाख सीप की खेती कर रहे हैं.

ट्रेनिंग लेना जरूरी : सलिंदर कुमार ने बताया कि मोती की खेती में सीप का अहम योगदान होता है क्योंकि सीप में ही मोती तैयार होता है. जितनी अच्छी गुणवत्ता का सीप होगा, उतनी ही अच्छी गुणवत्ता का मोती तैयार होगा. सीप एक समुद्री जीव है जिसके अंदर मोती बनता है. सलिंदर ने बताया कि मोती की खेती में उनको अच्छा खासा मुनाफा हुआ. जो लोग मोती की खेती करना चाहते हैं, उनको सलाह देते हुए सलिंदर ने कहा कि कोई भी छोटे स्तर से इसकी शुरुआत कर सकता है लेकिन इसके लिए ट्रेनिंग लेना काफी ज्यादा जरूरी होता है. कई लोग ऐसे होते हैं, जो बिना किसी प्रशिक्षण के इसकी खेती शुरू कर देते हैं लेकिन फिर उन्हें नुकसान का भी सामना करना पड़ सकता है क्योंकि मोती की खेती के दौरान कई चीज़ों का ख़ासा ख्याल रखना पड़ता है, तभी आप मोती के खेती में सक्सेसफुल हो सकते हैं.

सालाना एक करोड़ रुपए का टर्नओवर : सलिंदर कुमार ने बताया कि जहां उन्होंने अपने घर से मोती की खेती की शुरुआत की थी, वहीं अब उनका कारोबार अलग-अलग राज्यों तक फैल चुका है. वे अंडमान निकोबार दीप समूह और दमन जैसे स्थानों पर भी मोतियों की खेती कर रहे हैं और सालाना करोड़ रुपए का उनका टर्नओवर है.

एक सीप से दो मोती मिलते हैं : उन्होंने बताया कि मोतियों की खेती करने में सिर्फ प्रशिक्षण की आवश्यकता होती है. एक व्यक्ति पार्ट टाइम में भी आसानी से इसकी खेती कर सकता है. लेकिन इनकम आने के लिए उसको 13 महीने का इंतजार करना पड़ता है, क्योंकि एक सीप में मोती बनने में 13 महीने का समय लग जाता है और एक सीप से दो मोती प्राप्त होते हैं.

विदेशों में भी मोती की डिमांड : मोती की खेती कर रहे सलिंदर कुमार ने बताया कि वे जो मोती तैयार करते हैं, उनको वे सूरत, दिल्ली, मुंबई ,हैदराबाद सहित विदेशों में भी सप्लाई करते हैं. अगर मोती अच्छा तैयार हो जाता है तो उसकी कीमत 1500 रुपए तक होती है. उन्होंने कुछ कंपनियों के साथ कॉन्ट्रैक्ट भी कर रखा है जिससे उन्हें मोती तैयार होने के बाद बेचने में कोई परेशानी नहीं होती क्योंकि कंपनी खुद उसको बेचती है और उन्हें अच्छा मुनाफा होता है.

सीप की सर्जरी होती है अहम : सलिंदर कुमार ने बताया कि मोती की खेती करने में सीप की सर्जरी करने का मुख्य और सबसे अहम काम होता है. सीप की सर्जरी उस समय होती है, जब सीप अपना मुंह खोलते हैं क्योंकि वो एक समुद्री जीव होता है और वो एक बार अपना मुंह खोलता है तो मुंह खोलने के दौरान उसके अंदर मोती जिस आकार का चाहिए, उस सांचे को डाला जाता है और उसके बाद फिर उसको एंटीबायोटिक घोल में डाल दिया जाता है. 15 से 20 दिन के बाद फिर उसको निकालकर पानी में डाला जाता है, जिस पानी में उसको रखा जाता है, 3 महीने में उसका पानी बदलना होता है. मोतियों की खेती करने के लिए पानी का टीडीएस 400 से 500 के बीच में होना चाहिए, तभी अच्छा मोती तैयार होता है. सीप को खाने के लिए कैल्शियम और दूध या दूध से बनी हुई दही दी जाती है.

बिना ज़मीन के हो सकती है मोती की खेती : उन्होंने बताया कि मोती की खेती करने के लिए ज्यादा जमीन की जरूरत नहीं पड़ती. अगर किसी के पास ज़मीन भी नहीं है तो वो अपने घर के ऊपर छत पर भी मोती की खेती कर सकता है. 1000 सीप के साथ वो इसकी खेती की शुरुआत कर सकता है जिससे वो सालाना 2 से ढाई लाख रुपए आसानी से कमा सकता है.

250 लोगों को फ्री में ट्रेनिंग : उन्होंने बताया कि मोती की खेती को बढ़ावा देने के लिए वे अब दूसरे लोगों को इसकी ट्रेनिंग भी दे रहे हैं ताकि वे भी मोती की खेती करके अच्छा मुनाफा कमा सके. अब तक करीब ढाई सौ लोगों को वे मोती की खेती की ट्रेनिंग दे चुके हैं. यह प्रशिक्षण बिल्कुल फ्री में दिया जाता है और प्रशिक्षण लेने के बाद वे खुद का काम शुरू करके सालाना लाखों रुपए कमा रहे हैं.
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