ग्राम पंचायत अपने खर्च के लिए खुद जुटाएगी धन: पंचायती राज विभाग तैयार कर रहा मॉडल
पंचायती राज मंत्रालय ने अलग-अलग राज्यों के वरिष्ठ अधिकारियों की एक समिति बनाई है.


Published : August 8, 2025 at 4:57 PM IST
|Updated : August 8, 2025 at 5:11 PM IST
चंचल मुखर्जी
नई दिल्ली: गांव की पंचायतों को अपनी कमाई बढ़ाने और खुद खर्च चलाने में सक्षम बनाने के लिए एक मॉडल तैयार किया जाएगा. पंचायती राज मंत्रालय ने अलग-अलग राज्यों के वरिष्ठ अधिकारियों की एक समिति बनाई है. यह समिति पंचायतों की अपनी कमाई (स्वयं के स्रोत राजस्व यानी ओएसआर) से जुड़े नियमों और ढांचे का एक मॉडल तैयार करेगी, जिससे राज्य सरकारों को अपने नियम बनाने या बदलने में मदद मिलेगी.
ग्रामीण स्थानीय निकायों के ओएसआर पर विशेषज्ञ समिति की रिपोर्ट के अनुसार, 21 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों ने ओएसआर नियम और दिशानिर्देश तैयार कर लिए हैं. जबकि अन्य राज्यों ने अभी तक नियम और दिशानिर्देश तैयार नहीं किए हैं. इसके अतिरिक्त, जिन राज्यों या केंद्र शासित प्रदेशों ने नियम तैयार कर लिए हैं उन्हें अपने ओएसआर नियमों में संशोधन या अद्यतनीकरण की आवश्यकता है.
पंचायती राज मंत्रालय से जुड़े एक वरिष्ठ अधिकारी से जब उन राज्यों के नाम के बारे में पूछा गया जिन्होंने पहले ही अपने ओएसआर नियमों की रूपरेखा और अपने सुझाव प्रस्तुत कर दिए हैं, तो उन्होंने बताया कि ये विचाराधीन हैं. इसलिए अभी इसका खुलासा करना संभव नहीं है.
उत्तर प्रदेश क्षेत्र के जिला पंचायती राज अधिकारी वीरेंद्र सिंह ने ईटीवी भारत को बताया, "सरकार का ध्यान गांवों को आत्मनिर्भर बनाने पर है और वे कॉमन सर्विस सेंटर, तालाबों के पट्टे, मनोरंजन केंद्र, स्टेडियम और कचरा संग्रहण शुल्क के माध्यम से अपना ओएसआर तैयार करते हैं. राज्य सरकार पंचायतों के राजस्व स्रोतों को जानती है, इसलिए वह उसके अनुसार एक रूपरेखा भेजती है."
पंचायती राज राज्य मंत्री प्रो. एस.पी. सिंह बघेल ने बताया, "मंत्रालय ने पंचायती राज संस्थाओं (पीआरआई) द्वारा ओएसआर सृजन हेतु एक व्यवहार्य वित्तीय मॉडल तैयार करने हेतु एक अध्ययन शुरू किया है. यह अध्ययन राष्ट्रीय वित्त एवं नीति संस्थान (एनआईपीएफपी) द्वारा किया गया है और एनआईपीएफपी ने मार्च 2025 में मंत्रालय को अध्ययन रिपोर्ट प्रस्तुत कर दी है."
बघेल ने राज्यसभा को बताया, "अध्ययन में कई सिफारिशें की गई हैं जो राज्यों के लिए पंचायतों की वित्तीय क्षमता बढ़ाने और ओएसआर सृजन में सुधार लाने के लिए महत्वपूर्ण हैं. अध्ययन में राज्य-विशिष्ट सीमाओं पर भी प्रकाश डाला गया है और राज्य-विशिष्ट सिफारिशें की गई हैं. इन्हें आवश्यक कार्यवाही के लिए संबंधित राज्यों के साथ साझा किया गया है."
मंत्रालय के अनुसार, भारत के संविधान के अनुच्छेद 243 एच के अनुसार राज्य का विधानमंडल, कानून द्वारा, किसी पंचायत को ऐसी प्रक्रिया के अनुसार और ऐसी सीमाओं के अधीन ऐसे करों, शुल्कों, टोलों और फीसों को लगाने, एकत्र करने और विनियोजित करने के लिए अधिकृत कर सकता है. ऐसे उद्देश्यों के लिए राज्य सरकार द्वारा लगाए गए और एकत्र किए गए ऐसे करों, शुल्कों, टोलों और फीसों को पंचायत को सौंप सकता है.
दादूपुर गांव के प्रधान लोकेश राणा ने ईटीवी भारत से बात करते हुए कहा, "गांव से कोई टैक्स या राजस्व वसूलने की कोई नीति नहीं है, जिसके कारण हमें क्षेत्र में विकास के लिए धन की कमी का सामना करना पड़ रहा है. सरकार ने हाल ही में घर-घर कूड़ा उठाने के लिए एक वाहन उपलब्ध कराया और हमें उसके चालक का वेतन देने को कहा, लेकिन धन की कमी के कारण हमने चालक नहीं रखा. राजस्व की यही वास्तविक स्थिति है."
मंत्रालय के प्रयासों पर प्रकाश डालते हुए, मंत्री बघेल ने कहा कि मंत्रालय ने 'समर्थ पंचायत पोर्टल' विकसित करके पंचायतों के ओएसआर संग्रह को डिजिटल बनाने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है. यह डिजिटल प्लेटफॉर्म है जो कर और गैर-कर मांगों के सृजन, कर रजिस्टर के रखरखाव और राजस्व की ऑनलाइन ट्रैकिंग की सुविधा प्रदान करता है. उन्होंने कहा, कि 'समर्थ पोर्टल' का छत्तीसगढ़ और हिमाचल प्रदेश में सफलतापूर्वक परीक्षण किया गया है.
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