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गयाधाम का प्रेतशिला पर्वत, जहां रहता है भूतों का बसेरा, यहां त्रैपाक्षिक श्राद्ध के दिन पिंडदान की खास मान्यता

गया पितृपक्ष मेले में प्रेतशिला पर्वत पर श्रद्धालु अकाल मृत्यु वाले पितरों के मोक्ष हेतु पिंडदान कर रहे हैं, यहां सत्तू उड़ाने की विशेष परंपरा.

प्रेतशिला पर सत्तू उड़ाने की परंपरा
प्रेतशिला पर सत्तू उड़ाने की परंपरा (ETV Bharat)
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By ETV Bharat Bihar Team

Published : September 9, 2025 at 10:37 AM IST

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गयाजी: विश्व प्रसिद्ध पितृपक्ष मेले में पितरों के मोक्ष की कामना को लेकर बिहार के गयाजी में श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ रहा है. मोक्ष भूमि के नाम से विख्यात गयाधाम में एक विशेष पिंडवेदी है, जिसे अकाल मृत्यु वालों को मोक्ष दिलाने वाली प्रेतशिला कहा जाता है. पितृपक्ष मेले के तीसरे दिन त्रैपाक्षिक श्राद्ध करने वाले पिंडदानी विशेष रूप से प्रेतशिला वेदी पर पिंडदान करते हैं. ऐसा मानना है कि यहां पिंडदान किए बिना मोक्ष नहीं मिलता.

अकाल मृत्यु और प्रेतशिला पर पिंडदान:भूतों के पहाड़ (प्रेतशिला) पर पिंडदान से अकाल मृत्यु से मरे, प्रेत योनि में गए, पितरों को मोक्ष की प्राप्ति हो जाती है. यही वजह है कि पितृपक्ष मेले में इस पिंडवेदी पर तीर्थ यात्रियों की भारी भीड़ उमड़ती है. सालों भर यहां अकाल मृत्यु से प्रेत योनी में गए पितरों के निमित्त पिंडदान का सिलसिला चलता है.

प्रेतशिला पर सत्तू उड़ाने की परंपरा
प्रेतशिला पर सत्तू उड़ाने की परंपरा (ETV Bharat)

चट्टानों के छिद्रों में बसेरा करते हैं भूत: मान्यता है कि जिनकी अकाल मृत्यु होती है, उनका वास प्रेत के रूप में इस पर्वत पर होता है. इसीलिए इस भूतों का पहाड़ कहा जाता है. पहाड़ के शिखर पर रहे धर्मशिला के समीप पिंडदान के बाद प्रेत वेदी के विशाल शिला पर सत्तू उड़ाया जाता है और परिक्रमा की जाती है. सत्तू उड़ाने से प्रेत योनी में रहे पितर प्रेत वेदी की छिद्रों के सहारे स्वर्ग तक पहुंच जाते हैं. ब्रह्मलोक की प्राप्ति होती है.

प्रेतशिला पर उड़ाते हैं सत्तू: बता दें कि प्रेतशिला के शिखर तक पहुंचने के लिए 676 सीढ़ियां चढ़नी पड़ती हैं. ऊपर धर्मशिला स्थित है. जहां ब्रह्मा जी ने अपने पदचिह्न छोड़े थे. यहीं पिंडदान का मुख्य कर्मकांड पूरा होता है.

त्रैपाक्षिक श्राद्ध का महत्व: प्रेतशिला के अलावे राम कुंड, रामशिला और कागबली पर श्राद्ध करना चाहिए. प्रेतशिला पहाड़ी के नीचे तीन कुंड है, जिसे निगरा कुंड, सुख कुंड और सीता कुंड कहा जाता है. इसके अलावा यहां ब्रह्म कुंड है. प्रेतशिला स्थित ब्रह्मकुंड में स्नान करने के उपरांत ही प्रेतशिला पिंडवेदी पर पिंडदान श्राद्ध का कर्मकांड करना चाहिए.

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पिंडदान करते पिंडदानी (ETV Bharat)

शाम ढलते ही छा जाता है सन्नाटा: प्रेतशिला पर शाम ढलने के बाद कोई नहीं मिलता. इक्के-दुक्के जो लोग अपवाद स्वरूप रहते हैं. पुजारी संतोष गिरी का कहना है कि प्रेतशिला में पिंडदान से पितरों को ब्रह्मलोक की प्राप्ति होती है. संध्या ढलते ही यहां रहना वर्जित है क्योंकि पहाड़ के छिद्रों से प्रेतों की आवाज आती है. यही कारण है कि इसे प्रेतों का पर्वत कहा जाता है.

''प्रेतशिला में पिंडदान से पितरों को सद्गति की प्राप्ति होती है. जिनकी अकाल मृत्यु हुई है, उनके निमित यहां पिंडदान करने से ब्रह्मलोक की प्राप्ति हो जाती है. यहां ब्रह्मा जी का पदचिह्न है. यहां संध्या ढलते ही लोगों का रहना वर्जित है. क्योंकि यहां भूत प्रेत का वास माना जाता है. पहाड़ के चट्टान से आवाज आती है. यह प्रेत का पहाड़ है, इसलिए इसे प्रेतशिला कहा जाता है.''- संतोष गिरी, पुजारी

डोली से भी पहुंचते हैं श्रद्धालु : जो 676 सीढ़ियां चढ़ने में असमर्थ होते हैं, वे डोली के सहारे शिखर तक पहुंचते हैं. डोली के सहारे यहां के स्थानीय मजदूर उन्हें पहाड़ की शिखर तक ले जाने और लाने का काम करते हैं.

श्रद्धालुओं की आस्था और अनुभव : इलाहाबाद से आए सुरेश गर्ग ने बताया कि उनके छोटे भाई की अकाल मृत्यु हुई थी. वे मोक्ष दिलाने के लिए यहां पिंडदान कर रहे हैं. वहीं कोलकाता के धीरज जाना ने कहा कि उनके भाई बहन की अकाल मृत्यु हो गई थी, इसलिए यहां पिंडदान करना जरूरी समझा.

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अक्षयवट पिंडवेदी पर अकाल मृत्यु पिंडदान (ETV Bharat)

''मेरे छोटे भाई की अकाल मृत्यु हो गई थी. वह बीमार चल रहा था और उसकी मौत हो गई थी. उसे मोक्ष की प्राप्ति हो. इसे लेकर आज प्रेतशिला पहुंचकर पिंडदान का कर्मकांड कर रहे हैं, ताकि उसे स्वर्ग लोक प्राप्त हो सके.''- सुरेश गर्ग, इलाहाबाद के पिंडदानी

लाखों की संख्या में उमड़ते पिंडदानी: पितृपक्ष मेला चल रहा है. देश के कोने-कोने से पिंडदानियों का आगमन हो रहा है. अब तक दो लाख से अधिक पिंडदानी गया धाम को पहुंच चुके हैं. धीरे-धीरे पिंडदानियों की संख्या लगातार बढ़ रही है. पिछली बार 15 लाख से ज्यादा पिंडदानी गया जी को आए थे. इस बार भी इसी के आसपास की संख्या में पिंडदानियों के आने की संभावना बताई जा रही है.

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