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बिहार के इन 2 पेड़ों पर 7 दिन में टंगे 15 हजार फोटो, जानिए क्यों?

बिहार के गया में पितृपक्ष मेले के दौरान श्रद्धालु प्रेतशिला वेदी पहुंचते हैं. पिछले 7 दिनों में यहां पेड़ पर 15 हजार फोटो टांगे गए.

Gaya Pitru Paksha
प्रेतशिला पर्वत (Gaya Pitru Paksha)
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By ETV Bharat Bihar Team

Published : September 12, 2025 at 7:50 PM IST

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सरताज अहमद की रिपोर्ट

गया: गयाजी टाउन से लगभग 8 किमी दूरी पर स्थित प्रेतशिला है. यहां शिला के नीचे ब्रह्मा कुंड है, जबकि शिला पर जाने के लिए 676 सीढ़ियों से होकर ऊपर ब्रह्मा चरण तक पहुंचना पड़ता है. शिला पर 20 सीढ़ी चढ़ते ही एक वट वृक्ष है, जिस को देखते ही लोग सहम जाते हैं. उस पर हजारों की संख्या में अकाल मृत्यु वाले लोगों की फोटो टंगी हुई है.

हजारों की संख्या में पहुंच रहे हैं श्रद्धालु : असल में बड़ी संख्या में श्रद्धालु अपने पितरों को मोक्ष दिलाने की कामना लेकर पिंडदान के लिए गयाजी आ रहे हैं. इनमें एक बड़ी संख्या उनकी भी है जिनके परिवार में अकाल मृत्यु हुई है.

देखें रिपोर्ट (Gaya Pitru Paksha)

प्रेतयोनी से मिलती है मुक्ति: प्रेतशिला के वर्षों पुराने दो वट वृक्ष तस्वीरों से भरे पड़े हैं. उस वृक्ष पर हजारों की संख्या में लोगों ने मृत आत्मा की शांति और मुक्ति की कामना के साथ फोटो टांगी हैं. पंडा शिवा के अनुसार पितृ पक्ष मेला 2025 में अब तक प्रेतशिला में दो वृक्ष पर 15 हजार से अधिक फोटो टांगे जा चुके हैं.

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शिवा, पंडा (ETV Bharat)

"इतनी ही संख्या में प्रेतशिला के ऊपर ब्रह्मा चरण में मुक्ति के कामना के साथ फोटो रखे जा चुके हैं. यहां प्रेतशिला चट्टान पर सत्तू उड़ाने, ब्रह्म चरण पर पिंड के अलावा अकाल मौत के शिकार लोगों की तस्वीरों को पेड़ में टांगने और उसके बाद उसे दफनाना भी कर्मकांड में शामिल है."- शिवा, पंडा

Pretshila mountain
7 दिनों में पेड़ पर टंगे 15 हजार फोटो (ETV Bharat)

7 दिनों में 15 हजार से फोटो : सामान्य तौर पर श्रद्धालु गयाजी धाम की वेदियों पर पिंडदान करते हैं, लेकिन अकाल मृत्यु वाले व्यक्ति की आत्मा की शांति और प्रेतयोनी से मुक्ति के लिए प्रेतशिला में पिंडदान किया जाता है. अभी 16 दिवसीय पितृ पक्ष मेला में पिछले 7 दिनों में 15000 फोटो 2 वट वृक्ष पर टांगे जा चुके हैं.

ईटीवी भारत GFX.
ईटीवी भारत GFX. (ETV Bharat)

पिंडदान के लिए पहुंचते हैं लोग: पटना से आए सिद्धार्थ पांडे कहते हैं कि वो अपने परिवार के साथ यहां पिंडदान के लिए आए हैं. उनके साथ बहन का बेटा भी साथ है. वो अपने पिता के श्राद्ध के लिए आया है. उसके पिता की मौत दुर्घटना से हुई थी.

"मान्यता है कि फोटो ब्रह्म चरण में रखने से या वट वृक्ष में टांगने से प्रेत योनि से मुक्ति मिलती है. हम मान्यताओं के अनुसार सारे कर्मकांड को पूरा कर रहे हैं."- सिद्धार्थ पांडे, पटना से आए श्रद्धालु

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सिद्धार्थ, श्रद्धालु (ETV Bharat)

3 जगहों पर रखे जाते हैं फोटो: 20 सीढ़ियों के चढ़ते ही वृक्ष के नीचे पूजा कराते हुए संतोष गिरी कहते हैं कि पितरों, प्रेतों की जगह वट वृक्ष है, जो यहां 676 सीढ़ी चढ़ कर शिला के ऊपर नहीं जाते हैं. वह पिंड को वट वृक्ष के चरण में देते हैं और सत्तू उड़ा कर मोक्ष की कामना करते हैं.

Pretshila mountain
पिंडदान के लिए पहुंचे श्रद्धालु (ETV Bharat)

"जिनकी अकाल होती है, उनकी मुक्ति की जगह प्रेतशिला है. यहां पहाड़ी पर स्थित वृक्ष पर प्रतिदिन 500 से अधिक फोटो लगाए जाते हैं. प्रेतशिला के ऊपर में ब्रह्म चरण में अकाल मृत्यु वाले व्यक्तियों की फोटो वहीं कहीं किनारे में दफना दिया जाता है. इसी तरह प्रेतशिला पहाड़ी के नीचे स्थित ब्रह्मा कुंड में भी एक वृक्ष पर फोटो टांगे जाते हैं."- संतोष गिरी, पुजारी

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संतोष गिरी, पुजारी (ETV Bharat)

चैत गंगा दशहरा पर फोटो का विसर्जन: संतोष गिरी कहते हैं कि घर में जो परेशानी , प्रेत बाधा, दुख कष्ट होता है, उससे मुक्ति के लिए यहां वट वृक्ष पर फोटो लगाए जाते हैं. इससे वो सारी चीजों खत्म हो जाती है, क्योंकि पितृ मुक्ति पाकर विष्णुलोक की ओर प्राप्त कर जाते हैं. यहां फोटो लगाने के बाद लोग दान भी देते हैं. दान के रूप में 1 रुपए से लेकर 1 लाख रुपए तक दिए जाते हैं. वट वृक्ष पर लगे फोटो को चैत गंगा दशहरा के अवसर पर विसर्जित किया जाता है.

सिहर जाते हैं लोग: 676 सीढ़ी ऊंची पहाड़ी प्रेत शिला में 20 सीढ़ी चढ़ने के बाद बाएं ओर एक बड़ा वट वृक्ष है. वृक्ष की लटकी तनों में फ्रेमिंग वाली तरह-तरह की तस्वीर लटकी रहती है. इसमें हर उम्र के व्यक्तियों की तस्वीर होती है. वृक्ष के तनों में टंगी हजारों तस्वीर देखकर गुजरने वाले सहम जाते हैं, यहां से गुजरने में भय जैसा अनुभव होता है.

पितृ देव योनि में प्रस्थान: यहां अपने जजमानों को लेकर पहुंचे नीरज पांडे कहते हैं कि यहां वृक्ष पर फोटो इसलिए लगाते हैं कि जो हमारे पितृ बालपन , युवा अवस्था में या फिर वृद्ध अवस्था में किसी भी उम्र में अकाल मृत्यु से गुजरे हैं. उनकी यहां फोटो लाकर प्रेतयोनी से मुक्त करके पितृ देव योनि में प्रस्थान करवाया जाता है. इसलिए यहां फोटो ला कर उसको वृक्ष में लगाते हैं.

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पेड़ पर लगे फोटो (ETV Bharat)

"जिनकी अकाल मौत हुई हो, उनकी तस्वीर यहां लाकर लगा देने पर उनका भय हट जाता है. उनके घर में कभी किसी भी चीज की परेशानियां नहीं आएंगी. पंडित जी संकल्प कर देते हैं कि आपका प्रेत जैसे आपके पीछे आया है, अपना पिंड लेने के लिए अब आपका प्रेत यहीं रह जाएगा."- नीरज, पंडा

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नीरज, पंडा (ETV Bharat)

"मैं जिनके साथ आया हूं, उनके पिता की जवानी में सड़क दुर्घटना में मौत हुई थी. प्रेत योनि में भटक रहे हैं. अब प्रेतशिला वट वृक्ष में निवास करेंगे. मान्यता है कि उनको मुक्ति मिल जाएगी."- विजय कुमार पाठक, श्रद्धालु

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विजय कुमार पाठक, श्रद्धालु (ETV Bharat)

1 लाख लग जाती है फोटो: प्रेतशिला के पुरोहित शिवा पंडा ने बताया कि पितृपक्ष भर में 1 लाख से अधिक फोटो यहां 2 वट वृक्ष और ब्रह्म चरण में रखे जाते हैं, जिसे पितृपक्ष के बाद दफना दिया जाता है. वैसे यहां अकाल मौत को प्रेत योनि से मुक्ति दिलाने के लिए देशभर से सालों भर लोग प्रेतशिला आते हैं.

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इस तरह लगायी जाती है तस्वीर (ETV Bharat)

'पूर्वजों से हो रहा है ये काम': अकाल मौत वाले फोटो से पटे वृक्ष के पास खड़े 44 वर्षीय पुजारी संतोष गिरी कहते हैं कि पिंड व फोटो को दफनाने का काम कई पीढियां से उनका परिवार करता आ रहा है. प्रेतशिला पहाड़ी के पास गांव कोरमा के रहने वाले पुजारी कहते हैं कि उनसे पहले उनके पिता और उनके दादा चंद्रिका गिरी ने भी यही काम किया था, उससे पहले उनके पूर्वज भी यही करते थे.

शाम में नहीं जाता है कोई: स्थानीय लोग बताते हैं कि देर संध्या होते ही इस पहाड़ पर कोई नहीं जाता है. अकाल मृत्यु वाले पितर जो यहां वास करते हैं, उनकी तरह-तरह की आवाज सुनाई पड़ती है.

स्थानीय पंडित मुन्ना गिरी के अनुसार यहां पर शीला के चट्टानों के छिद्रों में अकाल मृत्यु के शिकार पितरों का वास होता है. मृत्यु दो तरीके से होती है, एक प्राकृतिक और दूसरी अप्राकृतिक जिसे अकाल मृत्यु भी कहा जाता है. अकाल मृत्यु के शिकार होने वाले पितरों का प्रेत पर्वत पर वास होता है.

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पूजा करके लगाई जाती है तस्वीर (ETV Bharat)

ब्रह्म जी ने खींची थी लकीर: माना जाता है कि यही वो पिंडवेदी है जहां ब्रह्मा जी ने अपने अंगूठे से तीन लकीरें खींची थीं. यहां ब्रह्मा जी के चरण चिन्ह है और यह धर्मशिला के रूप में जाना जाता है. इसी चरण चिन्ह के पास भी अकाल मृत्यु वाले व्यक्तियों की फोटो रखी जाती है. यहां सत्तू उड़ाने का भी विधान है.

Pretshila mountain
प्रेतशिला में सत्तू उड़ाने की प्रथा (ETV Bharat)

उड़ाया जाता है सत्तू: यहां सत्तू उड़ा कर पिंडदान का अति महत्व होता है. बताया जाता है कि अकाल मृत्यु जिनके यहां हुई है उनके यहां सूतक काल लगा रहता है. सूतक काल में सत्तू का सेवन वर्जित माना गया है, इसी वजह से यहां परिक्रमा कर सत्तू उड़ाया जाता है.

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गया पितृपक्ष में पिंडदान (ETV Bharat)

वेदी पर पिंडदानी तिल मिश्रित सत्तू उड़ाते हैं और पितर आत्माओं से आशीर्वाद और मंगल कामनाएं मांगते हैं, जिसकी वजह से उनके पितृ प्रसन्न हो जाते हैं और प्रेत योनि से मुक्ति होकर मोक्ष की प्राप्ति हो जाती है. असल में प्रेतशिला पहाड़ पर पिंडदान करने का विधान है. इस प्रेत वेदी में एक दरार है जिसमें माना जाता है कि यहां सत्तू उड़ाने से पितर स्वर्ग को पहुंच जाते हैं.

सड़क दुर्घटना के मामले अधिक: पंडा शिवा कहते हैं कि यहां जो अकाल मृत्यु वाले व्यक्तियों की फोटो लगी है, उसमें अधिक संख्या सड़क दुर्घटना वालों की होती है. इसमें युवाओं की संख्या ज्यादा है. वो कहते हैं कि बड़ा भावुक पल तब होता है जब पिता अपने बेटे का फोटो यहां पर लगाते हैं. पिता की आंखें भरी होती हैं और जब वो घटना की जिक्र करते हैं तो उनका दर्द फिर से उभर जाता है.

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