बाल सुधार गृह में चल रहा समर कैंप... म्यूजिक, आर्ट और स्पोर्ट सहित कई एक्टिविटी की ट्रेनिंग
छत्रपति संभाजीनगर के बाल सुधार गृह में इस बार समर कैंप का आयोजन किया गया है. कैंप का उद्देश्य बच्चों के हुनर को निखारना है.

Published : April 27, 2025 at 11:55 AM IST
छत्रपति संभाजीनगर: महाराष्ट्र के मराठवाड़ा में पहली बार, रिमांड होम में रहने वाले बच्चों के लिए 'कलारंग' संस्था ने एक अनूठी पहल करते हुए निःशुल्क समर कैंप का आयोजन किया है. बाल गृह के उपाध्यक्ष अवधूत गुप्ता और समन्वयक सुनीता तगारे ने विश्वास व्यक्त किया है कि तीन दिनों तक चलने वाला यह रचनात्मक शिविर समाज से अलग-थलग पड़े इन बच्चों को नई प्रेरणा देगा और उनके जीवन में सकारात्मक बदलाव लाएगा. समर कैंप में बच्चों को सिर्फ मज़ा ही नहीं, बल्कि सीखने का मौका भी मिल रहा है.
गर्मियों में, जब शहरी परिवार अपने बच्चों को विभिन्न मनोरंजक और विकासशील गतिविधियों से भरपूर समर कैंप में भेजते हैं, अनाथालयों में रहने वाले बच्चों के लिए ऐसे अवसर दुर्लभ होते हैं. इसी कमी को महसूस करते हुए संभाजीनगर स्थित बाल सुधार गृह में 38 बच्चों के लिए यह विशेष शिविर आयोजित किया गया है. जिला परिवीक्षा एवं अनुरक्षण संगठन द्वारा संचालित संप्रेक्षण गृह/बालक गृह के उपाध्यक्ष अवधूत जगताप का मानना है कि यह शिविर बच्चों की प्रतिभा को निखारने और उनके जीवन को एक नई दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा.
इस तीन दिवसीय समर कैंप में म्यूजिक, आर्ट और स्पोर्ट सहित कई एक्टिविटी की ट्रेनिंग दी जा रही है. बच्चे भी इस समर कैंप का भरपूर आनंद ले रहे है. कलारंग संस्था की सारिका कुलकर्णी ने बताया कि यदि वे अपने काम के माध्यम से अपने जीवन के लक्ष्य को प्राप्त कर लेते हैं, तो वे अपने भविष्य को बेहतर बनाने के लिए प्रेरित होंगे.
ऐसी गतिविधियां क्यों हैं महत्वपूर्ण?
अनाथालयों में रहने वाले बच्चों को अक्सर यह महसूस होता है कि बाहरी दुनिया उनसे अलग है. कई बच्चे तो यह भी नहीं जानते कि परिवार क्या होता है. इस दुनिया में बेसहारा बच्चों का कोई सहारा नहीं होता, जबकि कुछ बच्चे परिस्थितियों के कारण अपराध कर बैठते हैं. नाबालिग होने के कारण उन्हें सुधार गृह भेज दिया जाता है. वे प्राथमिक शिक्षा तो प्राप्त करते हैं, लेकिन अन्य रचनात्मक गतिविधियों में भाग लेने में असमर्थ होते हैं. सामान्य परिवारों में माता-पिता अपने बच्चों को समर कैंप में भेजने के लिए बड़ी रकम खर्च करते हैं, लेकिन चूंकि इन बच्चों के माता-पिता नहीं होते, इसलिए उनके लिए शिविर की व्यवस्था कौन करेगा, यह एक बड़ा सवाल होता है. इसीलिए ऐसे बच्चों के लिए निःशुल्क शिविर का आयोजन किया गया है.
समन्वयक एवं वरिष्ठ समाजसेवी सुनीता तगारे ने विश्वास व्यक्त किया कि इस तरह के शिविरों से न केवल बच्चों में सकारात्मक बदलाव आएगा, बल्कि यहां काम कर रहे समाजसेवियों में भी सकारात्मक बदलाव देखने को मिलेगा. ‘कलारंग’ की यह पहल निश्चित रूप से सराहनीय है और समाज के अन्य लोगों को भी ऐसे बच्चों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए प्रेरित करेगी.
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