सीएम नीतीश के आवास का घेराव करने पहुंचे हजारों किसान, बैरिकेडिंग पर चढ़े
पटना में भूमि अधिग्रहण के खिलाफ संयुक्त किसान मोर्चा का प्रदर्शन चल रहा है. भूमि अधिग्रहण पॉलिसी में सुधार की मांग जा रही है.

Published : August 25, 2025 at 2:49 PM IST
पटना: भूमि अधिग्रहण और किसानों की समस्याओं को लेकर संयुक्त किसान मोर्चा के बैनर तले हजारों की संख्या में किसान सोमवार (25 अगस्त) को पटना की सड़कों पर निकले. संयुक्त किसान मोर्चा के नेतृत्व में 11 किसान संगठनों ने बुद्ध स्मृति पार्क से मार्च निकाला. प्रदर्शन कर रहे किसान मुख्यमंत्री आवास का घेराव करने निकले थे, लेकिन पुलिस ने उन्हें डाक बंगला चौराहे पर रोक दिया.
भूमि अधिग्रहण के खिलाफ गुस्सा: संयुक्त मोर्चा के बैनर तले प्रदर्शन कर किसानों का आरोप है कि राज्य सरकार भूमि अधिग्रहण के नाम पर किसानों की उपजाऊ जमीन को जबरन हथियाना चाहती है. कई जिलों में अधिग्रहण प्रक्रिया चल रही है लेकिन मुआवजे की दर बेहद कम तय की गई है. किसानों का कहना है कि जमीन उनकी जीवनरेखा है, जिसके सहारे वे अपने परिवार का भरण-पोषण करते हैं. यदि जमीन छिन जाएगी तो उनके पास रोज़गार का कोई साधन नहीं बचेगा.
'अपने हक के लिए सड़क पर किसान': हरियाणा से आए संयुक्त किसान मोर्चा के नेता प्रदीप हुड्डा का कहना है कि सरकार से अपने भविष्य की सुरक्षा की मांग कर रहे हैं. किसानों की मांग है कि कोयल नहर परियोजना, जहां पानी नहीं पहुंच रहा है, वहीं बिहार के कई इलाकों में बाढ़ से पानी भरा हुआ है. बाढ़ के पानी का सही सदुपयोग हो तो पूरा बिहार हरा भरा हो जाएगा.
"बाढ़ का पानी है, उस पानी को यदि कोयल नहर डैम में डाल दिया जाए तो दोनों क्षेत्र हरे भरे हो जाएंगे. तमाम परेशानियों के बाद भी किसान खेती करता है तो उसे अपने फसल का भाव नहीं मिलता. किसानों की जमीन जब सरकार को चाहिए तो वह उस जमीन पर कब्जा कर लेती है और उसे उचित मुआवजा नहीं मिलता. किसान कुछ नहीं मांग रहा केवल अपना हक मांगने के लिए सड़क पर उतरा है."- प्रदीप हुड्डा, नेता, संयुक्त किसान मोर्चा
किसानों के सामने रोजी-रोटी की समस्या: संयुक्त किसान मोर्चा के बैनर तले आए किसान संतोष कुमार भारती का कहना है कि हम लोग तो मजदूर हैं जो अपनी जमीन पर खेती करते हैं. सरकार उद्योग एवं फैक्ट्री के नाम पर किसानों की जमीन ले रही है. किसानों को इसका उचित मुआवजा नहीं मिल रहा और ना ही नौकरी मिल रही है.

"हमारी रोजी-रोटी इस जमीन पर निर्भर रहती है, इसीलिए लोग सड़कों पर उतरे हैं. भूमि अधिग्रहण का पूरा खेल उद्योगपतियों और बड़े पूंजीपतियों को फायदा पहुंचाने के लिए किया जा रहा है."- संतोष कुमार भारती, किसान
सुधाकर सिंह की सरकार को चेतावनी: प्रदर्शन में बक्सर से राजद के सांसद सुधाकर सिंह भी शामिल हुए. उन्होंने किसानों के पक्ष में आवाज बुलंद करते हुए कहा कि आज संयुक्त किसान मोर्चा के बैनर तले बिहार के सभी किसान संगठन आज मुख्यमंत्री को किसानों की समस्या को समझने के लिए आए हैं. अगर किसानों के साथ सरकार ने न्याय नहीं किया तो भूमि अधिग्रहण कानून के हिसाब से बाजार मूल्य का चार गुना पैसा किसानों को मिले.
"पैसा मिलने के बाद ही किसानों की जमीन का अधिग्रहण हो. अभी सरकार की तरफ से जो भी जमीन का अधिग्रहण हो रहा है वह बिना पैसा भुगतान के ही हो रहा है. किसान अपने मुआवजा के लिए मुकदमा करते हैं, तब उनका पैसा मिलता है इसलिए सरकार के तमाम षड्यंत्रों के नकाब को उतारने के लिए पटना की सड़कों पर उतरे हैं."- सुधाकर सिंह, आरजेडी सांसद

किसान संगठनों की मांग: इस प्रदर्शन में शामिल 11 किसान संगठनों ने सरकार से किसानों की समस्या को लेकर एक संयुक्त मांग की है, इसमें प्रमुख मांग है-
- किसानों की जमीन का अधिग्रहण केवल उनकी सहमति से हो.
- अधिग्रहित जमीन का मुआवजा बाजार भाव से 4 गुना ज्यादा दिया जाए.
- भूमि अधिग्रहण से प्रभावित परिवारों के लिए रोजगार और पुनर्वास की ठोस गारंटी की जाए.
- जबरन अधिग्रहण की प्रक्रिया पर तत्काल रोक लगाई जाए.
- अधिग्रहण होने वाले जमीन का उचित वर्गीकरण किया जाए ताकि बाजार रेट पर मुआवजा मिले.
- मुआवजा की राशि मिलने के बाद ही जमीन का अधिग्रहण हो.
- उत्तर कोयल नहर परियोजना के कूटकू डैम में फाटक लगाया जाए.
- MSP को कानूनी गारंटी मिले
- बिहार के तमाम अधूरे पर एक सिंचाई परियोजनाओं को अविलंब शुरू किया जाए.
- कृषि कार्य हेतु किसानों को मुफ्त बिजली उपलब्ध हो,.
उग्र आंदोलन की चेतावनी: अपनी मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे किसान नेताओं का कहना है कि पिछले वर्षों में कई बार सरकार से मांगें रखी गईं, लेकिन ठोस कार्रवाई नहीं हुई. अब सड़कों पर उतरने के अलावा किसानों के पास और कोई विकल्प नहीं बचा है. संयुक्त किसान मोर्चा ने ऐलान किया है कि अगर सरकार ने उनकी मांगें नहीं मानीं तो आने वाले दिनों में राज्यव्यापी आंदोलन की रूपरेखा तैयार की जाएगी.
सरकार ने की है ये व्यवस्था: केंद्र एवं राज्य सरकार की योजनाओं के लिए भूमि अधिग्रहण करने को लेकर बिहार सरकार ने एक शुरुआत की है. जमीन के मुआवजे की राशि तय करने के लिए राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने जिला स्तर पर पांच सदस्यीय समिति का गठन किया है. यह समिति जमीन के मुआवजे का दर के अलावा जमीन के कटैगरी का निर्धारण करती है.

गांव की जमीन सात कटैगरी की: राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने गांव की जमीन को 7 श्रेणियां में बांटा है. व्यवसायिक भूमि, औद्योगिक भूमि, आवासीय भूमि, उच्च मार्ग तथा मुख्य सड़क के दोनों किनारे की भूमि, सिंचित भूमि, असिंचित भूमि, एवं बलुआही,पथरीली,और चंवर की भूमि.
शहरी जमीन छह कटैगरी की: शहर की जमीन को 6 कैटेगरी में बांटा गया है. जिसमें मेन रोड की व्यवसायिक और आवासीय भूमि, मुख्य सड़क की भूमि, औद्योगिक भूमि, ब्रांच रोड की भूमि, अन्य सड़क की भूमि, कृषि एवं गैर-आवासीय भूमि.

समिति के सदस्य: जमीन के अधिग्रहण के बाद मुआवजे की राशि तय करने के लिए जो कमेटी बनाई गई है, उसमें अपर समाहर्ता (राजस्व) इस समिति के अध्यक्ष होंगे. इसके अलावे जिला भू अर्जन पदाधिकारी सदस्य सचिव, जिला अवर निबंधक उप विकास आयुक्त एवं जिस क्षेत्र में जमीन का अधिग्रहण हो रहा है, उसके भूमि सुधार उप समाहर्ता सदस्य होते हैं.
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