नशे के खिलाफ देवघर एम्स की पहल: एडिक्टेड युवाओं का हो रहा मुफ्त इलाज, ATF और TCC की भी शुरुआत
देवघर एम्स नशे की लत से मुक्ति दिलाने के लिए प्रयासरत है. इसके लिए एम्स में एटीएफ और टीसीसी की शुरूआत की गई है.


Published : August 31, 2025 at 7:36 PM IST
देवघर: झारखंड के कई जिलों में लोगों के बीच नशा एक गंभीर समस्या बन गई है. देवघर स्थित एम्स लोगों को इस लत से छुटकारा दिलाने में मदद कर रहा है. इलाज के साथ-साथ जागरूकता भी फैलाई जा रही है. लोगों को नशे की लत से छुटकारा दिलाने के लिए एम्स परिसर में एडिक्शन ट्रीटमेंट फैसिलिटी (एटीएफ) की भी शुरुआत की गई है. इसके जरिए अब तक सैकड़ों मरीजों का इलाज किया जा चुका है.
दरअसल, झारखंड के संथाल परगना के इलाकों में लोगों में नशे की लत बढ़ती जा रही है. नशे की लत पर लगाम लगाने के लिए पुलिस की ओर से कई कार्रवाई भी की जाती है, लेकिन इसके बावजूद देवघर और आसपास के जिलों में नशे का कारोबार फल-फूल रहा है.
संथाल क्षेत्र में कितने प्रतिशत लोग नशे की लत के शिकार हैं? जिला प्रशासन के पास फिलहाल आंकड़े उपलब्ध नहीं हैं, लेकिन संथाल क्षेत्र में नशाखोरी लोगों के विकास में एक बड़ी बाधा बनी हुई है. इसी को देखते हुए, देवघर के देवीपुर में खुला एम्स अपनी सामाजिक जिम्मेदारी निभाते हुए लोगों को नशे के खिलाफ जागरूक कर रहा है. एम्स निदेशक डॉ. सौरभ वार्ष्णेय बताते हैं कि एम्स एक राष्ट्रीय संस्थान है. लेकिन जिस राज्य में एम्स स्थापित है, उसकी विशेष जरूरतों को ध्यान में रखते हुए काम करना एम्स प्रबंधन की जिम्मेदारी है.
ATF और TCC की शुरुआत
उन्होंने बताया कि संस्थान ने जब पूरे इलाके में सर्वे किया, तो पाया कि आसपास के आधे से ज्यादा लोग खास तरह की शराब और तंबाकू की लत के शिकार हैं. ऐसे लोगों को नशे की लत से छुटकारा दिलाने के लिए एम्स परिसर में एडिक्शन ट्रीटमेंट फैसिलिटी (ATF) शुरू की गई है. जो सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय के तहत संचालित है. इसके अलावा, तंबाकू, खैनी या ज़र्दा जैसे पदार्थों के सेवन की बुरी आदतों के शिकार लोगों के लिए एक तंबाकू निषेध केंद्र (Tobacco Cessation Center) भी शुरू किया गया है.
उन्होंने बताया कि एटीएफ पिछले दो वर्षों से काम कर रहा है, जबकि टीसीसी (Tobacco Cessation Center) पिछले छह महीनों से एम्स में कार्यरत है. शराब, गांजा, चरस, बीड़ी, तंबाकू जैसी बुरी आदतों के शिकार लोग इन दोनों केंद्रों पर पहुंच रहे हैं. जहां उनका मुफ्त इलाज किया जाता है.
300 मरीजों को हो चुका है इलाज
एम्स प्रबंधन से मिली जानकारी के अनुसार, अब तक लगभग 300 मरीजों का इलाज किया जा चुका है. कई मरीजों का इलाज अभी भी जारी है. एटीएफ और टीसीसी केंद्रों के अलावा, मनोरोग विभाग के डॉक्टर भी नशा मुक्ति के लिए मरीजों का इलाज करते हैं, ताकि नशे की आदत को जड़ से खत्म किया जा सके. उन्होंने कहा कि नशा मुक्ति के साथ-साथ, कुपोषण, आदिवासी और मूलनिवासी समुदायों में पाई जाने वाली विशेष बीमारियों सहित अन्य समस्याओं पर भी शोध किया जा रहा है.
संथाल को नशा मुक्त बनाने का लक्ष्य
एम्स निदेशक डॉ. सौरव वार्ष्णेय ने कहा कि एम्स संस्थान की यह विशेषता रही है कि यह जिस राज्य में स्थापित है, वहां की बहुसंख्यक आबादी के लिए अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करता है. झारखंड में भी 28% से अधिक आदिवासी आबादी है. इसीलिए एम्स अपनी सामाजिक जिम्मेदारी निभाते हुए इन दिनों देवघर के आसपास के ग्रामीण इलाकों में नशे की लत में फंसे युवाओं को उनके परिजनों की शिकायत पर चिन्हित करता है. फिर उन सभी को केंद्र में लाकर नशा मुक्ति के लिए इलाज कराया जाता है ताकि आने वाले समय में संथाल क्षेत्र को पूर्ण रूप से नशा मुक्त क्षेत्र में शामिल किया जा सके.
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