कांग्रेस नेता तारिक अनवर ने फिर दोहराई बात, कहा- 'आला कमान तय करें करना क्या है?'
कांग्रेस सांसद तारिक अनवर का सुझाव बगावत के संकेत हैं या सुधार का इशारा? या फिर बिहार में कुछ नया होने वाला है? पढ़ें-

Published : February 12, 2025 at 7:13 PM IST
पटना : कांग्रेस के कटिहार सांसद तारिक अनवर के एक बयान ने एक साथ कई निशाना साधा है. तारिक अनवर ने अपने ही संगठन पर सवाल उठाते हुए कहा है कि कांग्रेस को तय करना है कि आगे की राजनीति वह गठबंधन के साथ करेगी या फिर अपने दम पर अकेली चुनाव लड़ेगी. राजनीतिक पंडित इस बयान को दिल्ली विधानसभा चुनाव के परिणाम से जोड़कर देख रहे हैं लेकिन, तारिक अनवर का यह बयान सिर्फ दिल्ली विधानसभा चुनाव के परिणाम के तहत नहीं था.
सीमांचल में पक रही खिचड़ी? : दरअसल, तारिक अनवर का यह बयान बिहार में होने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर भी था. उनका यह बयान बिहार में होने वाली आगे की राजनीतिक दशा और दिशा को भी तय करने वाला है. तारिक अनवर का बयान महज एक कांग्रेसी नेता का नहीं था. तारिक अनवर बिहार के सीमांचल के बड़े नेता माने जाते हैं. अपने जीवन के चार दशक तक संसदीय अनुभव रखने वाले तारिक अनवर यह बात अपने ऑफिशियल अकाउंट से यूं ही नहीं कही है. इसके पीछे कई ऐसी ऐसी राजनीतिक गतिविधियां होनी है, जिससे बिहार की राजनीति बदलेगी या यूं कहें इस बयान से महागठबंधन के दलों की राजनीति उलटफेर होगी.
'अपनी बात वापस नहीं लूंगा' : ईटीवी भारत ने जब कटिहार के कांग्रेस सांसद तारिक अनवर से इस बाबत बात की तो, उन्होंने स्पष्ट कहा कि वह अपने बयान पर कायम हैं.और वह अपने बयान को वापस नहीं लेंगे. फोन पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि जो बयान दे दिया है, वो दे दिया है. उसे वापस नही लेंगे. जब तारिक अनवर ने ये बयान अपने सोशल मीडिया पर साझा किया था तो कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अखिलेश प्रसाद सिंह का बयान आया था कि उन्होंने किस सन्दर्भ में ये बाते कही पता नहीं, लेकिन बिहार में कांग्रेस गठबंधन के साथ ही चुनाव लड़ेगी. ये बातें अखिलेश ने एक न्यूज एजेंसी से कही थी.
'तारिक अनवर का बयान सही नहीं' : तारिक अनवर के बयान पर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व प्रदेश अध्यक्ष प्रो रामजतन सिन्हा ने ईटीवी भारत से फोन पर हुई बातचीत में बताया कि तारिक अनवर पार्टी के वरिष्ठ नेता हैं, साथ ही वे पार्टी के CWC के सदस्य भी हैं. उनके मन में कोई सवाल है तो वो CWC की बैठक में रख सकते हैं. पार्टी के हित में बात रखने का यह उचित फोरम है. प्रो रामजतन सिन्हा ने तारिक अनवर के बयान पर कहा कि यह बयान पार्टी के लिए सही नहीं है. जहाँ तक गठबंधन की बात है तो बिहार विधानसभा चुनाव में गठबंधन का फैसला पार्टी का शीर्ष नेतृत्व इस पर अंतिम फैसला लेगा.
कांग्रेस को अपनी राजनीतिक रणनीति को स्पष्ट करने की जरूरत है। उन्हें तय करना होगा कि वे गठबंधन की राजनीति करेंगे या अकेले चलेंगे।
— Tariq Anwar (@itariqanwar) February 10, 2025
साथ ही, पार्टी के संगठन में मूलभूत परिवर्तन करना भी जरूरी हो गया है।@INCIndia @INCSandesh
"तारिक अनवर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता हैं. साथ ही CWC के सदस्य हैं. उनके मन में कोई सवाल है तो उन्हें CWC की बैठक में भी रख सकते थे. पार्टी के हित में रखने का यह उचित फोरम है. तारिक अनवर का यह बयान पार्टी के लिए सही नहीं है. जहां तक गठबंधन की बात है इसका फैसला शीर्ष नेतृत्व लेगा."- प्रो. रामजतन सिन्हा, पूर्व प्रदेश अध्यक्ष, कांग्रेस
पुराने बॉस तारिक के गढ़ में आने वाले हैं : तारिक अनवर का यह बयान उस समय आया है, जब तारिक अनवर के पुराने बॉस शरद पवार बिहार में एंट्री ले रहे हैं. 20 सालों के बाद शरद पवार बिहार के सीमांचल में सभा करने वाले हैं. इस महीने के 27 तारीख को शरद पवार पूर्णिया में सभा करेंगे. यह पूरा क्षेत्र सीमांचल का माना जाता है और सीमांचल के नेता तारीख अनवर हैं. सीमांचल में लगभग 24 विधानसभा क्षेत्र हैं जहां मुस्लिम वोटरों का ठीक-ठाक असर रहा है.
शरद पवार पहली दफा तारिक अनवर के बगैर यह सब भाग करने जा रहे हैं. इससे पहले जब भी शरद पवार बिहार पहुंचे थे तो उनके साथ तारिक अनवर जरूर होते थे लेकिन, यह पहली दफा होगा शरद पवार बगैर तारिक अनवर के होंगे. बताया यह जा रहा है कि शरद पवार अपनी पार्टी को मजबूत करने के लिए बिहार में लगभग डेढ़ सौ सीटों पर चुनाव लड़ने की योजना बना रहे हैं.
कांग्रेस के हरफनमौला नेता थे तारिक : अब जरा इस बात को समझना होगा की तारिक अनवर और शरद पवार की दोस्ती कैसे हुई? वरिष्ठ पत्रकार कुमार राघवेन्द्र बताते हैं कि तारिक अनवर छात्र नेता के तौर पर 1972 से ही कांग्रेस से जुड़ गए थे. मुस्लिम चेहरा होने के साथ-साथ तारिक अनवर संगठन में भी काफी एक्टिव रहे. पार्टी ने युवा चेहरा के तौर पर उन्हें 1977 में लोकसभा का चुनाव लड़ा दिया. हालांकि तारिक अनवर चुनाव हार गए लेकिन, पार्टी को उन पर भरोसा कहीं ज्यादा था. तारिक अनवर संगठन तो आगे बढ़ ही रहे थे, 1980 में पहली दफा लोकसभा चुनाव जीतकर संसद में भी पहुंच गए.
तारिक अनवर एक दमदार नेता : उसके बाद तारिक अनवर ने पीछे मुड़कर नहीं देखा. हालांकि बीच कुछ चुनाव में उनको हार का मुंह देखना पड़ा. 1999 का वह दौर आया जब सोनिया गांधी के विदेशी मूल होने के मुद्दे को लेकर शरद पवार ने जब कांग्रेस छोड़ा तो उनके साथ तारिक अनवर भी हो लिए और दोनों ने मिलकर एनसीपी की स्थापना की. इसके बाद तारिक अनवर लगातार दो बार राज्यसभा से सांसद बने और 2014 में एनसीपी के ही टिकट पर लोकसभा का चुनाव भी जीता.

तारिक अनवर का मन फिर डोल रहा? : तारिक अनवर कुल छह बार लोकसभा का चुनाव जीते और दो बार राज्यसभा से मनोनीत हुए. लेकिन, तारिक अनवर ने 2018 में राफेल के सवाल पर शरद पवार से नाराज होकर कांग्रेस में वापस आ गए. 20 साल के बाद कांग्रेस ने उन्हें एक बार फिर से 2019 में कटिहार से लोकसभा का प्रत्याशी बनाया लेकिन, इस बार तारिक अनवर चुनाव हार गए. लगातार तारिक अनवर कांग्रेस के साथ बने रहे. 2024 में तारिक अनवर ने कटिहार लोकसभा से जीत हासिल की. लेकिन, एक बार फिर तारीख अनवर का मन डोल रहा है.
कांग्रेस के कद्दावर मुस्लिम चेहरा : वरिष्ठ पत्रकार कुमार राघवेंद्र बताते हैं कि तारिक अनवर बिहार कांग्रेस के लिए एक महत्वपूर्ण नेता हैं. सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि तारिक अनवर जैसे ही कांग्रेस में वापस आए उन्हें तुरंत 2019 में कटिहार से लोकसभा का चुनाव लड़ाया गया. हालांकि वह चुनाव हार गए. उसके तुरंत बाद कांग्रेस ने उन्हें बिहार विधान परिषद का उम्मीदवार बनाया लेकिन तारिक अनवर का पता बिहार होने के बजाय दिल्ली था, इसलिए तकनीकी परेशानियों की वजह से उनकी जगह समीर कुमार सिंह को एमएलसी बनाया गया.
सीमांचल में खासा असर : अब इस बात से सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि तारिक अनवर कांग्रेस के लिए कितने महत्वपूर्ण हैं. पहली बात, तारिक अनवर मुस्लिम राजनीति के बड़े चेहरे हैं. तारिक अनवर जिस इलाके से चुनाव जीतकर आते हैं वह सीमांचल है. जहां के लगभग 24 सीटों पर तारिक अनवर का असर रह सकता है. इसके अलावा तारिक अनवर सांगठनिक नेता है. अपने राजनीतिक कैरियर में तारिक अनवर पर एक भी दाग नहीं है. ऐसे में उन्होंने जो सुझाव दिया है वह आने वाले राज्यों के चुनाव के मद्देनजर चाहिए. कांग्रेस आला कमान को यह तय करना होगा कि तारिक अनवर के बयान के बाद आगे का क्या फैसला लेती है?

तारिक कांग्रेस के साथ रहेंगे या फिर छोड़ेंगे साथ? : अपने तीन दशक के पत्रकारिता के अनुभव आधार पर कुमार राघवेंद्र यह भी कहते हैं कि तारिक अलवर एनसीपी में शामिल नहीं होंगे. जाहिर सी बात है तारिक अनवर को कांग्रेस ने जो मान सम्मान दिया है दोबारा लौटने के बाद वह दूसरी पार्टियों में ऐसा महत्व नहीं दिया जाता है.
''तारिक अनवर एक सांगठनिक एक व्यक्ति होने के साथ-साथ बिहार में किसी भी गठबंधन के नेता से उनका संबंध एक दायरे में है, जिससे यह आरोप नहीं लगाया जा सकता है कि वह कांग्रेस के लिए नुकसान कर सकते हैं. यह चर्चा होती रही है बिहार के संगठन की जिम्मेदारी तारिक अनवर जैसे अनुभवी हाथों में दी जा सकती है तो, ऐसे में तारीख अनवर का यह बयान आने वाली राजनीति फिर से बदलने में सपोर्ट करेगी.''- राघवेन्द्र कुमार, वरिष्ठ पत्रकार
राजद में बेचैनी : तारिक अनवर की बयान के बाद बिहार की पार्टी आरजेडी में खलबली मची हुई है. पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता एजाज अहमद कहते हैं कि ''कांग्रेस सांसद ने किस संदर्भ में इस बात को कहा है, यह वही जान सकते हैं.'' अगले ही पल एजाज अहमद यह भी कहते हैं कि ''यह नहीं भूलना चाहिए कि भाजपा को रोकने के लिए और उनके दूसरे संगठनों को रोकने के लिए, जो नफरत की राजनीति करते हैं उनको रोकने के लिए, जो देश के अंदर धर्म और भरम की राजनीति फैलाते हैं, उनको रोकने के लिए, मिलकर गठबंधन में चुनाव लड़ना होगा, तभी भाजपा को रोका जा सकता है.''
भाजपा गदगद : उधर, भारतीय जनता पार्टी इस बात से गदगद है कि धीरे-धीरे कांग्रेस तमाम क्षेत्रीय दलों को छोड़ रही है. जिस तरीके से हरियाणा-दिल्ली में कांग्रेस ने अकेले चुनाव लड़ा उसके बाद बिहार की बारी है. भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता सुरेश रुंगटा कहते हैं कि ''कांग्रेस समझ चुकी है कि क्षेत्रीय पार्टियों के साथ उनके आगे का तालमेल नहीं हो सकता है. वह सरवाइव नहीं कर सकते हैं. इसलिए तारिक अनवर ने स्पष्ट आला कमान से पूछ लिया है कि आखिर करना क्या है?''
ये भी पढ़ें-

