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भारत में खो रहा बचपन! जानिए बालश्रम से कितने बच्चे बचाए गए यूपी, बिहार, एमपी, राजस्थान और तेलंगाना से

भारत के लिए बालश्रम मुद्दा बड़ी चुनौती है. बालश्रम गरीबी, अशिक्षा और आवश्यक सेवाओं तक अपर्याप्त पहुंच सहित कई सामाजिक-आर्थिक मुद्दों का परिणाम है.

Lost Childhoods In India
प्रतीकात्मक तस्वीर (ETV Bharat)
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By ETV Bharat Hindi Team

Published : June 24, 2025 at 5:16 PM IST

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नई दिल्ली: बालश्रम का मुद्दा भारत देश के लिए एक बड़ी चुनौती बना हुआ है. बाल श्रम गरीबी, अशिक्षा और आवश्यक सेवाओं तक अपर्याप्त पहुंच सहित कई सामाजिक-आर्थिक मुद्दों का परिणाम है.

बालश्रम के खिलाफ देशभर में अभियान चलाया जा रहा है. इसके तहत सबसे ज़्यादा 11,063 बच्चे तेलंगाना से बचाए गए. उसके बाद बिहार और राजस्थान में क्रमशः 3,974 और 3,847 बच्चे बचाए गए. इसी तरह से उत्तर प्रदेश (3,804), मध्य प्रदेश (2,377) और दिल्ली (2,588) से बालश्रम के दलदल से बच्चों को उबारा गया.

सरकार इस मुद्दे को संबोधित करने के लिए विभिन्न सक्रिय उपायों को लागू कर रही है. यह बालश्रम को खत्म करने के लिए एक बहुआयामी दृष्टिकोण को लागू कर रही है और इसने व्यापक उपाय अपनाए हैं. इसमें विधायी उपाय, पुनर्वास रणनीति, मुफ्त शिक्षा के अधिकार का प्रावधान और समग्र सामाजिक-आर्थिक उन्नति शामिल है.

बाल श्रम (निषेध और विनियमन) संशोधन अधिनियम, 2016, 14 वर्ष से कम उम्र के बच्चों को किसी भी व्यवसाय या प्रक्रिया में रोजगार देने से रोकता है. साथ ही 14 से 18 वर्ष की आयु के किशोरों को खतरनाक व्यवसायों और प्रक्रियाओं में शामिल होने से रोकता है.

गौर करें तो दुनिया भर में 138 मिलियन बच्चे बाल श्रम में लगे हुए हैं. अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन (ILO) के नवीनतम बाल श्रम अनुमानों के मुताबिक, इनमें से 54 मिलियन बच्चे खतरनाक कामों में लगे हुए हैं.

1 अप्रैल 2024 से 31 मार्च 2025 तक देश भर से लगभग 45,000 बच्चों को बाल श्रम, बाल भीख मांगने और यौन शोषण से बचाया गया.

जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रन (जेआरसी) पार्टनर इंडिया चाइल्ड प्रोटेक्शन द्वारा जारी एक रिपोर्ट के मुताबिक, कुल बचाए गए बच्चों में से 40,000 से अधिक बच्चे बाल श्रम से संबंधित थे. इस तरह से ये आंकड़ा दर्शाता है कि यह बच्चों के सामने सबसे बड़े जोखिमों में से ये एक है.

गौर करें तो जेआरसी देश भर में 250 से ज़्यादा एनजीओ का एक नेटवर्क है, जो बाल संरक्षण के लिए काम कर रहा है. सबसे ज़्यादा 11,063 बच्चे तेलंगाना से बचाए गए. उसके बाद बिहार और राजस्थान में क्रमशः 3,974 और 3,847 बच्चे बचाए गए.

रिपोर्ट में दावा किया गया है कि अन्य उच्च बोझ वाले राज्यों में उत्तर प्रदेश (3,804), मध्य प्रदेश (2,377) और दिल्ली (2,588) शामिल हैं.

रिपोर्ट में बालश्रम के खिलाफ लड़ाई में कानूनी उपायों, शिक्षा और पुनर्वास के महत्व पर प्रकाश डाला गया है. इसके साथ ही विभिन्न सिफारिशें प्रस्तुत की गई हैं. इसने रेखांकित किया कि उल्लंघनकर्ताओं के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई के बिना बालश्रम को कम करना चुनौतीपूर्ण होगा.

इस मामले पर चिंता व्यक्त करते हुए जेआरसी के राष्ट्रीय संयोजक रविकांत ने ईटीवी भारत से कहा, "हमारे पास दुनिया के सबसे मजबूत बाल संरक्षण कानून हैं, लेकिन हमें अपने बच्चों की सुरक्षा के लिए पारिस्थितिकी तंत्र को और मजबूत करने की जरूरत है. बालश्रम को समाप्त करने का हमारा राष्ट्रीय संकल्प अभी तक ठोस, स्थायी परिणामों में तब्दील नहीं हुआ है."

बाल अधिकार विशेषज्ञ ने जोर देकर कहा कि आईएलओ कन्वेंशन 182 पर हस्ताक्षर करने वाले देश के रूप में भारत बालश्रम के सभी खतरनाक रूपों को खत्म करने के लिए प्रतिबद्ध है.

उन्होंने कहा, "हालांकि कानून प्रवर्तन एजेंसियों के सहयोग से बचाव अभियान प्रभावशाली और व्यापक हैं, लेकिन नीति प्रवर्तन और कार्यान्वयन में खामियां बनी हुई हैं. यह रिपोर्ट इस बात की पुष्टि करती है कि केवल बचाव ही पर्याप्त नहीं है. अभियोजन और कानूनी जवाबदेही किसी भी स्थायी प्रतिक्रिया का आधार होनी चाहिए."

रविकांत ने कहा कि सरकार को अभियोजन तंत्र को मजबूत करना चाहिए, एक समर्पित बाल श्रम पुनर्वास कोष की स्थापना करनी चाहिए. साथ ही बचाए गए बच्चों को वास्तव में सशक्त बनाने और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने के लिए एक व्यापक पुनर्वास नीति अपनानी चाहिए.

रिपोर्ट में बताया गया है कि बाल अधिकारों की रक्षा के मामले में तेलंगाना शीर्ष पर है. इस पर टिप्पणी करते हुए बाल अधिकार विशेषज्ञ ने कहा, "यह तथ्य कि तेलंगाना ने पिछले वर्ष सबसे अधिक संख्या में बच्चों को बचाया, यह साबित करता है कि राज्य सरकार की प्रतिबद्धता और सक्रिय दृष्टिकोण द्वारा समर्थित सभी हितधारकों के बीच सहयोग, बच्चों के खिलाफ इस अपराध को समाप्त करने की कुंजी है.

कांत ने कहा, "बच्चों को बचाने में पुलिस और अन्य एजेंसियों की त्वरित कार्रवाई से लेकर यह सुनिश्चित करना कि प्रत्येक सामान्य डायरी (जीडी) प्रविष्टि को एफआईआर में बदल दिया जाए और प्रत्येक अपराधी को गिरफ्तार किया जाए, ऐसी सफलता प्राप्त करने के लिए सभी स्तरों पर इच्छाशक्ति और समन्वित प्रयास दोनों की आवश्यकता होती है. भारत में दुनिया के कुछ सबसे मजबूत बाल संरक्षण कानून हैं; अब हमें तेलंगाना द्वारा प्रदर्शित मजबूत कार्यान्वयन की आवश्यकता है, ताकि हमारे बच्चों की सुरक्षा के लिए पारिस्थितिकी तंत्र को और मजबूत किया जा सके."

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