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उत्तराखंड बीजेपी विधायक को CBI कोर्ट ने सुनाई सजा, भांजी समेत तीन पुलिसकर्मियों को भी माना दोषी, बेल भी मिली

उत्तराखंड से बड़ी खबर सामने आई है. हरिद्वार जिले की रानीपुर सीट से बीजेपी विधायक आदेश चौहान को सीबीआई कोर्ट ने सजा सुनाई है.

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उत्तराखंड बीजेपी विधायक को CBI कोर्ट ने सुनाई सजा (ETV BHARAT)
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By ETV Bharat Uttarakhand Team

Published : May 26, 2025 at 5:09 PM IST

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Updated : May 26, 2025 at 8:46 PM IST

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देहरादून: उत्तराखंड में हरिद्वार जिले की रानीपुर विधानसभा सीट से बीजेपी विधायक को सीबीआई कोर्ट ने सजा सुनाई है. बीजेपी विधायक के अलावा उनकी भांजी दीपिका चौहान और तीन पुलिसकर्मिंयों सहित कुल पांच लोगों की सजा सुनाई गई है. मामला साल 2009 का है. दीपिका सिंह के ससुर धीर सिंह चौहान और उनके बेटे मनीष को अवैध रूप से बंधक बनाने और हिरासत में रखे जाने के मामले में पांच लोगों को दोषी ठहराया गया है. सोमवार 26 मई को सीबीआई कोर्ट ने फैसला सुनाया है. हालांकि, विधायक, उनकी भांजी और बाकी दोषियों को भी कोर्ट से बेल भी मिल गई है.

उत्तराखंड की राजनीति में उस समय हलचल मच गई जब खबर आई कि सीबीआई स्पेशल कोर्ट के जज सुरेंद्र सिंह भंडारी ने भाजपा के विधायक आदेश चौहान और उनकी भांजी दीपिका को 6-6 महीने की सजा सुनाई है. जबकि पुलिसकर्मियों को एक-एक साल की सजा सुनाई गई है. मामला अवैध हिरासत में रखने, दहेज उत्पीड़न के मुकदमे में झूठे सबूत गढ़ने व आपराधिक षड्यंत्र से जुड़ा था. सीबीआई कोर्ट में इस केस की काफी समय से सुनवाई चल रही थी.

उत्तराखंड बीजेपी विधायक को CBI कोर्ट ने सुनाई सजा (ETV BHARAT)

इसी मामले में तीन पुलिसकर्मियों को भी सजा सुनाई गई है. हालांकि, इसमें से एक पुलिसकर्मी की पूर्व में मौत हो चुकी है. इसमें तत्कालीन गंगनहर थानाध्यक्ष आरके चमोली, सब-इंस्पेक्टर दिनेश कुमार और राजेंद्र सिंह रौतेला शामिल हैं. आरके चमोली की मौत हो चुकी है. रौतेला रिटायर हो चुके हैं. अभी केवल दिनेश कुमार सेवा में हैं.

जानिए पूरा मामला: ये मामला साल 2009 का है. तब आदेश चौहान विधायक नहीं थे. तत्कालीन बीजेपी उपाध्यक्ष आदेश चौहान की भांजी दीपिका की शादी 2004 में रिटायर्ड लेक्चरर धीर सिंह चौहान के बेटे मनीष चौहान से हुई थी. याचिकाकर्ता धीर सिंह चौहान के मुताबिक, साल 2009 में दीपिका और उसके पति मनीष के बीच पारिवारिक कारणों से अनबन हो गई थी. इसके बाद यह मामला गंगनगर पुलिस चौकी पहुंचा और दीपिका की शिकायत के बाद मनीष और उनके पिता धीर सिंह चौहान को पुलिस ने हिरासत में लिया. कोतवाली में उनसे पांच लाख रुपये, रुड़की का घर, कृषि भूमि दीपिका के नाम करने का दबाव बनाया गया.

BJP MLA ADESH CHAUHAN
CBI द्वारा दर्ज शिकायत. (ETV BHARAT)

धीर सिंह चौहान की शिकायत के अनुसार, ये सब मना करने पर उनको 42 घंटों तक गैरकानूनी तौर पर कोतवाली में रखा गया. इस दौरान किसी से मिलने दिया, न ही कुछ खाने-पीने को दिया गया. उनको हिरासत में लेते समय अपराध के संबंध में भी नहीं बताया गया. फिर कोर्ट में पेश कर उनके साथ बेटे व परिवार के बाकी सदस्यों को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया था. कुछ दिन बाद सभी जमानत पर रिहा हो गए.

मनीष और दीपिका का आपसी सहमति के बाद 2011 में तलाक भी हो गया था. लेकिन साल 2019 में तब यह मामला फिर सामने आया जब दीपिका के ससुर धीर सिंह चौहान ने उत्तराखंड हाईकोर्ट में याचिका दायर की. कोर्ट ने सीबीआई को मामले की जांच करने का आदेश दिया. इसी कड़ी में अक्टूबर 2019 में तत्कालीन गंगनगर थानाध्यक्ष आरके चमोली, तत्कालीन सब-इंस्पेक्टर दिनेश कुमार, राजेंद्र सिंह रौतेला के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई.

BJP MLA ADESH CHAUHAN
सीबीआई कोर्ट का आदेश. (Credit- dehradun.dcourts.gov.in)

हालांकि, शुरुआती जांच में आदेश चौहान का नाम नहीं था, लेकिन साल 2022 में उनका और भांजी दीपिका का नाम भी मुकदमे में जोड़ लिया गया. सीबीआई ने IPC की धारा 109, 120B, 166A, 193, 220, 323, 342, 365, 385, 511, 465 और 506 में केस दर्ज किया. इसमें जानबूझकर किसी को चोट पहुंचाना, बंधक बनाना, आपराधिक षड्यंत्र रचना, झूठे साक्ष्य के जरिए फंसाना, आपराधिक धमकी देना, अपराध के लिए उकसाना व जबरन वसूली के लिए किसी को क्षति पहुंचाना शामिल है.

BJP MLA ADESH CHAUHAN
सीबीआई कोर्ट का आदेश. (Credit- dehradun.dcourts.gov.in)

अपनी जांच में सीबीआई ने केस को झूठा पाया. अब कई सुनवाई के बाद आखिरकार सीबीआई कोर्ट ने मामले में विधायक व भांजी दीपिका को मारपीट, झूठे सबूत गढ़ने का दोषी पाया. दोनों को 6-6 महीने की सजा सुनाई गई. वहीं, अवैध हिरासत में रखने और कानून का दुरुपयोग करने के दोषी पाए गए पुलिसकर्मी दिनेश कुमार और राजेंद्र सिंह रौतेला (अब रिटायर्ड) को एक-एक साल की सजा सुनाई है. दहेज उत्पीड़न के केस को रद्द कर दिया गया है.

ये हमारा पारिवारिक मैटर था. मेरी भांजी दीपिका चौहान के ससुराल वालों ने इसको प्रताड़ित करके रात को घर से निकाल दिया था. 2009 की बात है. मैं उनका मामा हूं तो जब बड़ी बहन का फोन मेरे पास गया तो मैं इसके लिए थाने में गया. थाने वालों ने जो भी कार्यवाही की उसके बाद लगातार इस पर जांच होती रही. कुल मिलाकर कोर्ट ने उस पर अपना निर्णय दिया है. हम लोग सामाजिक और राजनीतिक जीवन में काम करने वाले लोग हैं. हमें तो आम जनता के लिए भी कितनी बार कोर्ट कचहरी व थाने चौकी में जाना पड़ता है. ये तो मेरी भांजी का मैटर था तो मुझे जाना ही पड़ता. उसके बाद जो भी कोर्ट ने फैसला दिया है हम आगे अपील में जाएंगे.
- आदेश चौहान, भाजपा विधायक -

BJP MLA ADESH CHAUHAN
सीबीआई कोर्ट का आदेश. (Credit- dehradun.dcourts.gov.in)

वकील का बयान: विधायक के वकील नीरज कांबोज ने बताया कि इस मामले में कुछ पांच आरोपी थे. सबसे पहला नाम आरके चमोली का था, जिनकी कुछ समय पहले मौत हो गई. दो पुलिस वाले हैं. विधायक और उनकी भांजी दीपिका है. इस केस में कुछ सेक्शन में तो आरोपियों को दोष मुक्त किया गया है और कुछ में सजा सुनाई गई है.

2009 का मामला है. पारिवारिक मैटर है. कोई ऐसा मैटर नहीं है. उत्पीड़न का मैटर था. आदेश जी तब विधायक नहीं थे. अब जाकर कोर्ट ने निर्णय लिया है. इसमें कुछ सेक्शन में सजा दी गई है और कुछ में दोष मुक्त कर दिया. इसमें टोटल पांच आरोपी थे. एक की मृत्यु कुछ समय पहले हुई है. इस मामले में विधायक और उनकी भांजी को 6 महीने की सजा हुई है जबकि पुलिसकर्मियों को एक-एक साल की सजा कोर्ट ने सुनाई है.
- नीरज कांबोज, विधायक के वकील -

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Last Updated : May 26, 2025 at 8:46 PM IST