झारखंड में बन रहा ब्राउन शुगर, तस्करों के फारवर्ड-बैकवर्ड लिंक खंगालने में जुटी पुलिस
झारखंड में ब्राउन शुगर निर्माण एक गंभीर चुनौती बन रहा है. कई जिलों में अफीम की खेती नशे के कारोबार को बढ़ावा दे रही हैं.

Published : July 22, 2025 at 5:00 PM IST
रांची: झारखंड के कुछ जिलों, विशेषकर रांची, खूंटी और चतरा में ब्राउन शुगर के निर्माण और तस्करी की सूचना ने पुलिस विभाग और नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) को सतर्क कर दिया है. खासकर चतरा जिला ब्राउन शुगर के उत्पादन और तस्करी का हॉटस्पॉट बनकर उभरा है. झारखंड पुलिस और प्रशासन इस खतरे से निपटने के लिए लगातार कार्रवाई कर रहे हैं.
ब्राउन शुगर: झारखंड के लिए नई चुनौती
झारखंड के रांची, खूंटी और चतरा जिले लंबे समय से अफीम की खेती के लिए बदनाम रहे हैं. इस वर्ष अफीम की खेती पर काफी हद तक अंकुश लगाया गया है, लेकिन अब एक नई समस्या सामने आई है, झारखंड में ही ब्राउन शुगर का निर्माण. पुलिस को खुफिया सूचनाओं से पता चला है कि राज्य के कुछ दुर्गम इलाकों में मिनी ब्राउन शुगर फैक्ट्रियां स्थापित की गई हैं. यह न केवल स्थानीय स्तर पर नशे के कारोबार को बढ़ावा दे रहा है, बल्कि पड़ोसी राज्यों और नेपाल तक तस्करी के नेटवर्क को भी मजबूत कर रहा है.
चतरा में भारी मात्रा में ब्राउन शुगर बरामद
पुलिस ने पहले रांची के बुंडू में एक मिनी ब्राउन शुगर फैक्ट्री का भंडाफोड़ किया था, जिसके बाद तस्करों ने कुछ समय के लिए इस गतिविधि को कम कर दिया था. हालांकि, 12 जून 2025 को चतरा के पत्थलगड्डा में चतरा पुलिस ने एसपी सुमित अग्रवाल के नेतृत्व में एक बड़ी कार्रवाई की. इस छापेमारी में संगठित गिरोह के तीन अभियुक्तों को 68,18,050 रुपये नकद, 13.9 किलोग्राम अफीम, 4.1 ग्राम ब्राउन शुगर, 1 किलोग्राम सफेद पाउडर, 4 बोतल एसिटाइल क्लोराइड, और ब्राउन शुगर निर्माण में उपयोग होने वाली लोहे की संरचना के साथ गिरफ्तार किया गया. इस बरामदगी ने पुष्टि की कि चतरा में ब्राउन शुगर का निर्माण हो रहा है.
सूत्रों के अनुसार, तस्कर दुर्गम इलाकों में अफीम की खेती करने में सफल रहे और पुलिस की नजरों से बचकर अफीम को सुरक्षित स्थानों पर डंप कर रहे थे. अब इस डंप अफीम को ब्राउन शुगर में बदलकर छोटे वाहनों के जरिए तस्करी की जा रही है, ताकि बड़े ट्रकों की तुलना में पकड़े जाने का जोखिम कम हो.
अफीम से पाउडर और ब्राउन शुगर की तस्करी
तस्करों ने नई रणनीति अपनाई है, जिसमें डंप अफीम को पाउडर के रूप में बदलकर तस्करी की जा रही है. अफीम से ब्राउन शुगर बनाया जाता है, और तस्कर इसे छोटी-छोटी पुड़ियों में पैक कर रांची, हजारीबाग, चतरा जैसे शहरों के साथ-साथ उत्तर प्रदेश, पंजाब, राजस्थान, पश्चिम बंगाल और नेपाल तक पहुंचा रहे हैं. यह रणनीति बड़े पैमाने पर ट्रक से डोडा ले जाने की तुलना में कम जोखिम वाली मानी जा रही है.
अंतरराज्यीय और अंतरराष्ट्रीय तस्करी के तार
झारखंड के अफीम और ब्राउन शुगर तस्करों के नेटवर्क का दायरा पड़ोसी देश नेपाल और कई भारतीय राज्यों तक फैला हुआ है. जांच में सामने आया है कि:
- जमशेदपुर: 6 अगस्त 2020 को मानगो पुलिस ने गोलमुरी निवासी गौतम कुमार और रांची के हैदर अली को 150 ग्राम अफीम डोडा और 250 ग्राम अफीम के साथ गिरफ्तार किया. गौतम ने कबूल किया कि वह तमाड़ से अफीम खरीदकर खड़गपुर और नेपाल ले जा रहा था.
- तमाड़: पुलिस ने लालपुर निवासी बबलू लोहरा, जितेंद्र कुमार सोनी और कोकर निवासी आशीष रंजन को भुवनेश्वर ले जाई जा रही अफीम के साथ गिरफ्तार किया.
- रनिया: सिलवंती कोंगाड़ी, एब्रेसियास कोंगाड़ी समेत सात तस्करों को गिरफ्तार किया गया, जिन्होंने पीएलएफआई उग्रवादियों के साथ तस्करी में शामिल होने की बात कबूली.
- खूंटी: मारंगहादा से अफीम की तस्करी के लिए रंजीत और मनीष मुंडा को गिरफ्तार किया गया.
- रामगढ़: पश्चिम बंगाल के तस्कर मो. करीमुद्दीन शेख को चतरा के तस्करों विशाल और विकास के साथ गिरफ्तार किया गया.
- हजारीबाग: यूपी के बदायूं के गौरव सिंह, रवि हसन और स्थानीय तस्करों को अफीम तस्करी के आरोप में पकड़ा गया.
- चतरा: राजस्थान के तस्कर जाबाता राम और बाबू विश्नोई को चतरा पुलिस ने गिरफ्तार किया.
ये मामले दर्शाते हैं कि झारखंड न केवल अफीम उत्पादन का केंद्र है, बल्कि एक प्रमुख ट्रांजिट और वितरण हब भी है.
अफीम से बनने वाले मादक पदार्थ
अफीम के पौधे (पैपावर सोम्नीफेरम) से निकलने वाले दूध को सुखाकर नशीले पदार्थ बनाए जाते हैं. इनमें प्रमुख हैं
- ब्राउन शुगर: अफीम को रासायनिक प्रक्रिया (एसिटाइल क्लोराइड जैसे पदार्थों के साथ) द्वारा ब्राउन शुगर में बदला जाता है.
- हेरोइन: उच्च शुद्धता वाला नशीला पदार्थ, जो अफीम से बनता है.
- अन्य मादक पदार्थ जैसे डोडा और पाउडर भी अफीम से तैयार किए जाते हैं.
पुलिस और प्रशासन की कार्रवाई
झारखंड के डीजीपी अनुराग गुप्ता ने बताया कि पुलिस ने इस वर्ष अफीम की खेती पर व्यापक कार्रवाई की है, जिसकी पूरे भारत में सराहना हुई. हालांकि, ब्राउन शुगर के स्थानीय निर्माण ने नई चुनौती पेश की है.
- चतरा में कार्रवाई: चतरा के एसपी सुमित अग्रवाल ने नशे के तस्करों के खिलाफ कठोर कदम उठाए हैं. 2025 में चतरा में 10 करोड़ रुपये से अधिक कीमत की अफीम और ब्राउन शुगर बरामद किया गया.
- संपत्ति जब्ती: नारकोटिक्स ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस (NDPS) एक्ट की धारा 68 के तहत, दो बार जेल जा चुके तस्करों की संपत्ति जब्त करने की प्रक्रिया शुरू की गई है. चतरा पुलिस ने ऐसे एक दर्जन तस्करों को चिह्नित किया है.
- जागरूकता अभियान: रांची, चतरा, और खूंटी में स्कूल-कॉलेजों में नशे के खिलाफ जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं. डीजीपी के निर्देश पर पुलिस कॉलेजों में युवाओं को नशे के दुष्प्रभावों के बारे में बता रही है.
2025 में बरामदगी, मई 2025 तक झारखंड पुलिस ने 389 मामले दर्ज किए, जिसमें 393 अभियुक्त गिरफ्तार हुए.
बरामद सामग्री में शामिल हैं.
- 553.856 किलोग्राम गांजा (कीमत: 2.76 करोड़)
- 66.566 किलोग्राम अफीम (कीमत: 3.32 करोड़)
- 2.49 किलोग्राम ब्राउन शुगर (कीमत: 24.90 लाख)
- 9950.94 किलोग्राम डोडा (कीमत: 14.92 करोड़)
- 7925 टैबलेट (कीमत: 31.70 लाख)
- कुल अनुमानित कीमत: 20.44 करोड़ रुपये
- इसके अलावा, 2301 बोतल सिरप और 1100 इंजेक्शन भी बरामद किए गए.
फॉरवर्ड और बैकवर्ड लिंक की जांच
डीजीपी अनुराग गुप्ता ने बताया कि पहले तस्करों को केवल कुरियर के रूप में पकड़ा जाता था, लेकिन अब फॉरवर्ड और बैकवर्ड लिंक (उत्पादन से वितरण तक की पूरी श्रृंखला) की जांच की जा रही है. इससे अन्य राज्यों के तस्कर भी पकड़े जा रहे हैं. सैटेलाइट इमेज के जरिए अफीम की खेती की निगरानी की जा रही है, और दोषी थाना प्रभारियों पर भी कार्रवाई की जा रही है.
झारखंड: उत्पादन और ट्रांजिट हब
- डीजीपी के अनुसार, झारखंड में नशे का कारोबार चार स्तरों पर काम करता है:
- कृषि (कल्टीवेशन): चतरा, खूंटी, रांची, हजारीबाग, लातेहार जैसे जिलों में अफीम की खेती.
- परिवहन (ट्रांजिट): आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, और ओडिशा से गांजा झारखंड के रास्ते बिहार, यूपी, और नेपाल जाता है.
- वितरण: छोटी पुड़ियों में ब्राउन शुगर का शहरी क्षेत्रों में वितरण.
- निर्माण: मेडिकल ड्रग्स और ब्राउन शुगर जैसे मादक पदार्थों का स्थानीय स्तर पर निर्माण.
चतरा में हाल की कार्रवाइयों, संपत्ति जब्ती, और जागरूकता अभियानों से सकारात्मक परिणाम मिल रहे हैं. डीजीपी अनुराग गुप्ता और चतरा एसपी सुमित अग्रवाल के नेतृत्व में तस्करों के खिलाफ कठोर कार्रवाई जारी है, और फॉरवर्ड-बैकवर्ड लिंक की जांच से इस कारोबार को जड़ से उखाड़ने की उम्मीद है.
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