अंबेडकर जयंती: खूब हुई राजनीति, 'संविधान बचाओ' का नारा भी जोर-शोर से गूंजा
बाबा साहेब अंबेडकर की जयंती के दिन की राजनीति केवल श्रद्धांजलि तक सीमित नहीं रही, 'संविधान बचाओ' का नारा भी जोर-शोर से गूंजा. जिसमें बीजेपी की रणनीति और विपक्ष के आरोपों का टकराव साफ दिखा. ईटीवी भारत की वरिष्ठ संवाददाता अनामिका रत्ना की रिपोर्ट.

Published : April 14, 2025 at 8:27 PM IST
नई दिल्ली: संविधान निर्माता बाबा साहेब अंबेडकर पर राजनीति पिछले लोकसभा चुनाव से ही गरमाई हुई है, लेकिन 14 अप्रैल को डॉ. भीमराव अंबेडकर की 135वीं जयंती पर भी सियासत जमकर हुई. इस अवसर पर भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने बाबा साहेब के योगदान को श्रद्धांजलि देते हुए देशभर में कई कार्यक्रम आयोजित किए.
बीजेपी ने अंबेडकर जयंती अभियान की घोषणा पहले ही कर दी थी और इसी क्रम में सोमवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दिल्ली के प्रेरणा स्थल पर बाबा साहेब को पुष्पांजलि अर्पित की. इसके बाद हरियाणा के हिसार में विकास परियोजनाओं का शुभारंभ भी किया. अपने भाषण में उन्होंने कहा, "बाबा साहेब का संविधान हमारी ताकत है. हमारी सरकार ने उनके सपनों को साकार करने के लिए दलितों, पिछड़ों और अल्पसंख्यकों के कल्याण को प्राथमिकता दी."
पीएम मोदी ने वक्फ संशोधन अधिनियम का बचाव करते हुए कांग्रेस पर वोट बैंक की राजनीति का आरोप लगाया. यही नहीं, प्रधानमंत्री ने ये भी दावा किया कि उनकी सरकार ने गरीब मुसलमानों को लाभ पहुंचाया है.
देखा जाए तो यह दिवस ना सिर्फ भाजपा बल्कि विपक्षी पार्टियों के लिए भी बहुत खास था क्योंकि पिछले लोकसभा चुनाव से ही लगातार संविधान बचाओ अभियान में सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों ही लगे हुए हैं और एक-दूसरे पर आरोप प्रत्यारोप लगा रहे हैं.
वैसे तो भारतीय जनता पार्टी ने सोशल मीडिया पर भी संविधान बचाने और अंबेडकर के संविधान पर चलने का अभियान पहले से ही चला रखा है. यही वजह है कि विपक्षी दलों की तरफ से भी इस दिन काफी कार्यक्रम आयोजित किए गए, क्योंकि आरक्षण और संविधान खत्म करने के मुद्दे पर विपक्ष लगातार भाजपा को लोकसभा चुनाव से ही घेर रहा है. यही वजह है कि इस मौके का फायदा विपक्ष ने भी खूब उठाया.
कांग्रेस पर बाबा साहेब के अपमान का आरोप
बहरहाल बीजेपी ने सोशल मीडिया पर भी बाबा साहेब की जयंती पर आक्रामक रुख अपनाते हुए #AmbedkarJayanti2025 के साथ पार्टी की तरफ से एक वीडियो साझा किया गया, जिसमें दावा किया गया कि कांग्रेस ने बाबा साहेब का अपमान किया और उनकी विरासत को दबाने की कोशिश की.
बीजेपी प्रवक्ता गोपाल कृष्ण अग्रवाल ने कहा, "विपक्ष ने संविधान को लेकर झूठा भय फैलाया है और हमारा हर कदम बाबा साहेब के विचारों को मजबूत करता है."
बीजेपी की तरफ से देशभर में स्वच्छता अभियान, मैराथन और सामुदायिक भोज जैसे कार्यक्रमों का आयोजन भी किया गया, खासकर यूपी के प्रयागराज, शाहजहांपुर और लखनऊ के अलावा चुनावी राज्य बिहार में भी कई कार्यक्रम पार्टी की तरफ से आयोजित किए गए.
हालांकि 'संविधान बचाओ' का नारा इस बार विपक्ष की ओर से काफी प्रचारित किया गया, जिसके तहत कांग्रेस, समाजवादी पार्टी और अन्य दलों ने आरोप लगाया कि बीजेपी संविधान को कमजोर करने की कोशिश कर रही है.
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने एक पत्र का हवाला देते हुए भी बीजेपी सरकार पर आरोप लगाया था. यही वजह है कि आरक्षण के खिलाफ बन रहे पार्टी के नैरेटिव को देखते हुए भारतीय जनता पार्टी ने इस बार अंबेडकर जयंती पर अपने सारे प्रदेश कार्यालयों में पहले ही सर्कुलर जारी कर ये आदेश दे दिया था कि राज्य के कार्यालयों में पार्टी नेता इस दिन पर बाबा साहेब से संबंधित कार्यक्रमों का आयोजन करेंगे और दलित जरूरतमंद बस्तियों में जाकर सेवा कार्यक्रम और उपयोगी वस्तुओं के वितरण कार्यक्रम का भी संचालन करेंगे.
इस मुद्दे पर बोलते हुए बीजेपी के राष्ट्रीय महासचिव दुष्यंत गौतम ने कहा कि बाबा साहेब अंबेडकर के संविधान और उनकी आरक्षण नीतियों पर शुरू से ही मोदी सरकार चलती आई है और इस सरकार ने बाबा साहेब को जितना सम्मान दिया, इतिहास गवाह है कि कांग्रेस ने ऐसा कभी नहीं किया. इसके उलट अगर इतिहास में जाकर देखा जाए तो कांग्रेस के पूर्व नेताओं ने बाबा साहेब का अपमान ही किया था. कांग्रेस की सरकार में इतने साल तक उन्हें भारत रत्न तक नहीं दिया गया और आज उन्हें बाबा साहेब याद आ रहे हैं.
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