AICC अधिवेशन: कांग्रेस ने भाजपा से लड़ने का संकल्प लिया, INDIA गठबंधन को मजबूत करने का दिया संदेश
कांग्रेस कार्यसमिति ने संगठन को नया रूप देने का संकल्प लिया गया, जिसमें भविष्य में जिला इकाइयां अधिक सक्रिय भूमिका निभाएंगी.

Published : April 9, 2025 at 10:23 PM IST
नई दिल्ली : कांग्रेस ने भाजपा के छद्म राष्ट्रवाद से लड़ने के लिए खुद को फिर से संगठित करने का संकल्प लिया. साथ ही इस पुरानी पार्टी को संविधान का रक्षक बताया और दो दिनों तक अहमदाबाद में एआईसीसी के अधिवेशन में भविष्य की रणनीति पर विचार-विमर्श के बाद विपक्षी एकता को मजबूत करने के लिए खुद को प्रतिबद्ध किया.
सत्र के पहले दिन 8 अप्रैल को कांग्रेस कार्यसमिति ने देश के समक्ष प्रमुख राजनीतिक चुनौतियों पर चर्चा की, जबकि 9 अप्रैल को करीब 2000 वरिष्ठ नेताओं ने विस्तृत रणनीति पर चर्चा की और उसका अनुमोदन किया.
कांग्रेस बनाम भाजपा की लड़ाई दशकों से चली आ रही है, लेकिन 2014 के बाद से यह और तेज हो गई है, जब भाजपा केंद्र में सत्ता में आई और पिछले 10 वर्षों के यूपीए शासन को समाप्त कर दिया. कांग्रेस 2019 और 2024 के राष्ट्रीय चुनावों के अलावा कई राज्य चुनावों में भी हार चुकी है, जिससे कार्यकर्ताओं में निराशा है.
पार्टी 2029 में स्थिति बदलने के लिए कृतसंकल्प है, लेकिन उसे एहसास है कि ऐसा करने के लिए कांग्रेस को कुछ बड़े और साहसिक कदम उठाने की जरूरत है.
2025 में देश भर में संगठन को नया रूप देने का संकल्प लिया गया, जिसमें भविष्य में जिला इकाइयां अधिक सक्रिय भूमिका निभाएंगी और केंद्र की नीतियों का मुकाबला करने के लिए सड़कों पर लड़ेंगी. यह वह सामूहिक समाधान था जिसे पार्टी के वरिष्ठ नेता लेकर आए.
इस बारे में उत्तर प्रदेश के एआईसीसी प्रभारी अविनाश पांडे ने ईटीवी भारत से कहा, "हमारा राष्ट्रवाद लोगों को एक साथ बांधता है, लेकिन भाजपा का छद्म राष्ट्रवाद विभाजनकारी और पूर्वाग्रही है.यह एक विडंबना है कि जिन लोगों की देश के स्वतंत्रता आंदोलन में कोई भूमिका नहीं थी, वे आज खुद को देशभक्त के रूप में पेश कर रहे हैं. उन्होंने कहा, "हम अपनी पूरी ताकत से विभाजनकारी ताकतों से लड़ेंगे."
पांडे ने हाल ही में राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण राज्य के सभी 80 जिलों के लिए जिला इकाई प्रमुखों को अंतिम रूप दिया, जहां 2027 में विधानसभा चुनाव होने हैं.
पार्टी के अंदरूनी सूत्रों के अनुसार, कांग्रेस ने न केवल संविधान के निर्माण में निर्णायक भूमिका निभाई बल्कि पार्टी ने पिछले 75 वर्षों से इसका बचाव भी किया है. पांडे ने कहा, ‘‘हमने शपथ ली है कि हम संविधान विरोधी ताकतों को उनके विनाशकारी मंसूबों में कभी सफल नहीं होने देंगे.’’
लोगों के अधिकारों के लिए लड़ने की अपनी प्रतिबद्धता को दोहराने के अलावा अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के अधिवेशन ने समान विचारधारा वाले दलों को जो सबसे महत्वपूर्ण संदेश दिया, वह विपक्षी एकता को मजबूत करने की उसकी प्रतिबद्धता थी.
2024 के राष्ट्रीय चुनावों में, कांग्रेस-सपा गठबंधन ने उत्तर प्रदेश की 80 लोकसभा सीटों में से 43 सीटें जीतकर भाजपा को करारा झटका दिया था. जिसने भाजपा को 543 सीटों में से 240 तक सीमित करने में अहम भूमिका निभाई थी.
पांडे ने कहा, "कांग्रेस पार्टी ने रचनात्मक सहयोग और सामूहिक प्रयासों की भावना से काम किया है, न केवल हमारे समय-परीक्षणित राजनीतिक सहयोगियों के साथ बल्कि लोगों के मुद्दों की समानता पर इंडिया गठबंधन की संरचना बनाई और उसे बनाए रखा है. हम भविष्य में भी इस प्रयास को जारी रखने के लिए प्रतिबद्ध हैं."
महाराष्ट्र के प्रभारी एआईसीसी सचिव बीएम संदीप के अनुसार, भाजपा विभाजनकारी राजनीति खेल रही है, क्योंकि वह हर कीमत पर चुनाव जीतना चाहती है."
उन्होंने कहा, ‘‘भाजपा सरकार और उसके सहयोगी राजनीतिक लाभ और सत्ता की लालसा के लिए इस मूल राष्ट्रीय भावना को खंडित करने पर तुले हुए हैं.
वे बांटना और विभाजन करना चाहते हैं - धर्म के आधार पर विभाजन को बढ़ावा देना, भाषाई विभाजन पैदा करना. इसके अलावा उत्तर बनाम दक्षिण भारत के बीच कृत्रिम मतभेद पैदा करना या जाति-आधारित दरारें पैदा करना.
सच्चाई यह है कि मुसलमानों और ईसाइयों को निशाना बनाए जाने से आज उनमें से एक बड़ा वर्ग भय में जी रहा है, जो न केवल अपमानजनक है बल्कि संविधान के विरुद्ध अपराध भी है.
संदीप ने ईटीवी भारत से कहा, "वक्फ बोर्ड पर कानून में संशोधन, चर्च की जमीन को निशाना बनाना, धार्मिक स्थलों के बाहर प्रदर्शन करना ये सब ध्रुवीकरण की रणनीति का हिस्सा है."
उन्होंने कहा, "कांग्रेस धार्मिक, भाषाई, जाति-आधारित और क्षेत्रीय विभाजन की राजनीति से आखिरी सांस तक लड़ने के लिए प्रतिबद्ध है. हम भारत को विभाजित नहीं होने देंगे - न ही हम उन लोगों को उनके शैतानी इरादों में सफल होने देंगे जो इसे विभाजित करना चाहते हैं. हमारा रास्ता साफ है."
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