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बिहार में BJP ड्राइविंग सीट पर बैठेगी, सवाल- क्या दिल्ली नतीजे ने भाजपा का प्रेशर कम कर दिया?, विस्तार से समझिए

दिल्ली चुनाव के परिणाम से बिहार की सियासत पर असर पड़ेगा, ये और बात है कि 'दिल्ली' ने बिहार बीजेपी का प्रेशर कम कर दिया-

Bihar Assembly Election
दिल्ली नतीजे ने बीजेपी का प्रेशर कम कर दिया? (ETV Bharat)
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By ETV Bharat Bihar Team

Published : February 8, 2025 at 9:55 PM IST

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Updated : February 8, 2025 at 10:13 PM IST

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पटना : दिल्ली विधानसभा चुनाव के परिणाम का असर बिहार विधानसभा चुनाव और यहां के सियासी समीकरण पर देखने को मिलेगा. जिस मजबूती से बीजेपी ने दिल्ली में वापसी की है, उसके बाद जिन-जिन राज्यों में बीजेपी के सहयोग से सरकार चल रही है, वहां भारतीय जनता पार्टी का वर्चस्व बढ़ेगा.

दिल्ली चुनाव का बिहार पर असर : 2025 अक्टूबर-नवंबर में बिहार विधानसभा चुनाव होना है. इससे पहले सभी बीजेपी की सहयोगी पार्टियां अपनी रणनीतियों को मजबूत कर रही थीं. लेकिन दिल्ली चुनाव परिणाम के बाद बीजेपी अब मोल-भाव करने की स्थिति में नहीं रहेगी और यही वजह है कि 2025 के बिहार विधानसभा चुनाव में दिल्ली चुनाव का प्रभाव देखा जाएगा.

दिल्ली चुनाव के परिणाम का असर (ETV Bharat)

दिल्ली चुनाव के परिणाम से जदयू पर असर : बिहार में बीजेपी की सबसे मजबूत सहयोगी पार्टी जदयू है, भले ही जदयू के कोटे से मुख्यमंत्री नीतीश कुमार बने हों, लेकिन सच्चाई यह है कि बीजेपी के पास अधिक विधायकों की संख्या है और वह एनडीए में बराबरी का हिस्सा है. दिल्ली विधानसभा चुनाव से पहले जदयू के अंदर यह चर्चा थी कि वे लोकसभा और विधानसभा चुनाव के पुराने फॉर्मूले पर बीजेपी के साथ सीटों का बंटवारा करेंगे. लेकिन दिल्ली के चुनाव परिणामों ने इस दबाव को कम कर दिया है, खासकर जदयू की बुराड़ी सीट पर करारी हार के बाद. इस पर बीजेपी ने बढ़त बना ली है.

चिराग पासवान की हार और बीजेपी का पलड़ा भारी : लोजपा (रामविलास) के राष्ट्रीय अध्यक्ष चिराग पासवान ने दिल्ली की देवली सीट पर पूरी ताकत लगाई, लेकिन उनकी पार्टी की हार हुई. इससे चिराग पासवान के बिहार में बड़े पैमाने पर चुनाव लड़ने की योजनाओं पर भी सवाल उठ सकते हैं. एलजेपी-आर के नेता अब भी 40 से अधिक सीटों पर चुनाव लड़ने की बात कर रहे हैं, लेकिन दिल्ली चुनाव के बाद बीजेपी बिहार में अपनी सरकार बनाने के लिए सहयोगियों के साथ काम करने का मन बना सकती है.

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जीतन राम मांझी का भाजपा के प्रति समर्थन : दिल्ली विधानसभा चुनाव के परिणाम के बाद, केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी ने बीजेपी को बधाई दी और कहा कि दिल्ली तो झांकी है, बिहार अभी बाकी है. वह भी अब बीजेपी के साथ मजबूती से खड़े हैं. मांझी ने हमेशा अपने दलित वोटबैंक को लेकर बीजेपी पर दबाव डाला, लेकिन दिल्ली चुनाव के बाद उन्होंने अपना सुर बदल लिया और एनडीए के साथ अपनी स्थिति मजबूत की.

भाजपा का आत्मविश्वास बढ़ा : दिल्ली चुनाव के परिणाम के बाद बीजेपी नेताओं में उत्साह है. बीजेपी के प्रदेश महामंत्री मिथिलेश तिवारी ने दिल्ली में जीत पर प्रसन्नता जाहिर की और कहा कि बिहार और पूर्वांचल के लोग बीजेपी के पक्ष में वोट करेंगे. उनका मानना है कि बिहार में एनडीए की सरकार बनेगी और नरेंद्र मोदी की नीतियों पर विश्वास जताया जाएगा.

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ड्राइविंग सीट पर मोदी : मिथिलेश तिवारी ने कहा कि ''पूरे देश में ड्राइविंग सीट पर नरेंद्र मोदी हैं और बिहार में भी नरेंद्र मोदी ड्राइविंग सीट पर हैं.'' मुख्यमंत्री के सवाल पर भाजपा नेता ने कहा कि अभी मुख्यमंत्री नीतीश कुमार हैं 2025 के सवाल को मिथिलेश तिवारी ने टाल दिया.

बुराड़ी से मायूस जदयू : वहीं, दिल्ली परिणाम के बाद जेडीयू में कुछ खास उत्साह दिखाया नहीं. वजह ये भी है कि जदयू की बुराड़ी सीट पर करारी हार हुई है. लेकिन जदयू को नीतीश कुमार पर अब भी भरोसा है. जदयू प्रवक्ता हिमराज राम ने कहा है कि ''दिल्ली में एनडीए की बड़ी जीत हुई है और उसी तर्ज पर बिहार में भी हम जीत हासिल करने जा रहे हैं. बिहार में नीतीश कुमार के नेतृत्व में सरकार चल रही है. 2025 का चुनाव भी नीतीश कुमार के नेतृत्व में लड़ा जाएगा और नीतीश कुमार ही मुख्यमंत्री होंगे.''

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भाजपा का बढ़ता दबदबा : राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भले ही जदयू विधानसभा चुनाव में बीजेपी पर दबाव बनाकर अधिक सीटें हासिल करने की कोशिश करें, लेकिन इस बार यह उनके लिए आसान नहीं होगा. बीजेपी की हालिया जीतों को देखते हुए, वह बिहार में भी अपनी स्थिति मजबूत करना चाहेगी. इस बार बीजेपी को विधानसभा चुनावों में सहयोगी दलों के प्रदर्शन को ध्यान में रखते हुए सीटों का बंटवारा करना होगा.

''भले ही जदयू विधानसभा चुनाव में भाजपा पर दबाव बनाकर अधिक सीटे ले लेती है लेकिन, इस बार जदयू के लिए ऐसा करना आसान नहीं होगा. दो राज्यों में भाजपा को बड़ी जीत मिली है जाहिर तौर पर बिहार में भी भाजपा दोनों राज्यों के नतीजे को दोहराना चाहेगी. भाजपा के पास सबसे अधिक विधायक हैं और ऐसे में वह सबसे अधिक सीटों पर लड़ना भी चाहेगी. दिल्ली चुनाव में सहयोगी दलों के परफॉर्मेंस का भी विधानसभा चुनाव के दौरान टिकट बंटवारे में दिया जाएगा.'' - संजय कुमार, राजनीतिक विश्लेषक

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'कमल छाप पर भरोसा' : राजनीतिक विश्लेषक रवि उपाध्याय का कहना है कि दिल्ली विधानसभा का चुनाव परिणाम बीजेपी के मनोबल को और ज्यादा मजबूत करेगी. उन्होंने कहा कि इस चुनाव में बड़ी क्लियेरिटी के साथ दिखाई दे रहा है कि पूर्वांचल और यूपी के लोगों की पसंद कमल छाप है. क्योंकि देवली और बुराड़ी सीट पर वहां की जनता ने वोट नहीं किया.

'जनता को कमल छाप पर भरोसा' (ETV Bharat)

''भारतीय जनता पार्टी के सहयोगी दल वहां बुराड़ी और देवली सुरक्षित सीट पर चुनाव लड़ रही थी. बुराड़ी से जेडीयू और देवली से लोजपा (रामविलास) के एक उम्मीदवार थे. दोनों सीट पर वहां की जनता ने इन प्रत्याशियों को वोट नहीं किया. इस चुनाव में यह क्लेरिटी के साथ दिखाई पड़ता है कि दिल्ली में कमल छाप पर ही मतदाताओं ने विश्वास किया. सरकार में भ्रष्टाचार की बात कहीं जा रही थी अरविंद केजरीवाल और उनकी पार्टी आम आदमी पार्टी पर भ्रष्टाचार की बात कही जा रही थी जेल के अंदर से आना और जाना यह लगातार उनके कैबिनेट के सहयोगी और इंक्लूडिंग अरविंद केजरीवाल भी. अब जनता भ्रष्टाचार को पसंद नहीं करती है.''- रवि उपाध्याय, राजनीतिक विश्लेषक

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Last Updated : February 8, 2025 at 10:13 PM IST