हर्षिल में भागीरथी में बनी झील, गंगोत्री एनएच और हेलीपैड डूबे, जानें क्या है खतरा
हर्षिल के गदेरा से आई आपदा अपने साथ हजारों लाखों टन मलबा लेकर आई, ये मलबा भागीरथी के प्रवाह क्षेत्र में बाधा बन गया है

By ETV Bharat Uttarakhand Team
Published : August 9, 2025 at 12:19 PM IST
|Updated : August 10, 2025 at 1:17 PM IST
नवीन उनियाल, हर्षिल: धराली में 5 अगस्त को जिस दिन जल प्रलय आई, उस दिन हर्षिल में भी हजारों टन मलबा आर्मी कैंप को अपने साथ बहा ले गया. इसमें सेना का कैंप भी इसी मलबे में बह गया. चिंता की बात ये है कि इसके बाद से ही आर्मी कैंप में मौजूद कई जवान लापता हैं. बड़ी बात ये है कि भागीरथी में आए इस मलबे ने नदी को झील में तब्दील कर दिया है. करीब 4 किलोमीटर लंबी झील बनने से अब हर्षिल भी खतरे की जद में आ गया है.
भागीरथी नदी में झील का स्वरूप बनने से न केवल गंगोत्री नेशनल हाईवे का एक हिस्सा पानी में डूब गया है. बल्कि, यहां मौजूद आर्मी का हेलीपैड भी पानी के भीतर समा गया है. धराली में आई आपदा के बाद सबसे पहले आइटीबीपी ने राहत एवं बचाव कार्य शुरू किया और करीब 400 लोगों को बाहर निकाला.
"जिस जगह पर झील बनी है, वहां पर सामान्य दिनों में नदी बहती थी और इसका हिस्सा काफी कम था. जबकि, अब झील बनने से कई फीट ऊपर पानी पहुंच चुका है. इसमें गंगोत्री नेशनल हाईवे से लेकर हेलीपैड भी पानी में डूब चुका है."- सुरेश यादव, असिस्टेंट कमांडेंट, आईटीबीपी
"हर्षिल में जो झील बनी है, वो हर्षिल के लिए खतरनाक साबित हो सकती है. इसलिए इस नदी के पानी को रोकने वाले मलबे को नहीं हटाया जा रहा है. यदि इसे आगे से हटाया जाता है तो भारी मात्रा में पानी आगे बढ़कर आगे के कस्बों को नुकसान पहुंचा सकता है. हालांकि, इसमें भारी मात्रा में पानी जमा होने के बाद ओवरफ्लो पानी बाहर निकल रहा है, लेकिन जिस तरह एक बड़ी झील की शक्ल नदी ने ली है, उसके बाद एक खतरा तो इससे हो ही रहा है."- सुरेश यादव, असिस्टेंट कमांडेंट, आईटीबीपी
हर्षिल में भागीरथी में बनी झील: हर्षिल आपदा प्रभावित इलाके में जहां से भागीरथी नदी बहती है, वहां मलबे के कारण उसका प्रवाह क्षेत्र सिमट गया है. इस कारण भागीरथी नदी में एक झील बन गई है. इस झील में धीरे-धीरे पानी इकट्ठा हो रहा है. अगर मलबा नहीं हटाया गया तो झील का ये बढ़ता पानी खतरा बन सकता है. दरअसल यहां स्थानीय गदेरे से भी खीर गंगा जैसा ही जलजला आया था.

झील बन सकती है खतरा: जहां हर्षिल घाटी का हैलीपैड था वहां पर भागीरथी में झील बनी है. हालांकि राहत की बात ये है कि झील से धीरे-धीरे पानी बाहर निकल रहा है. इस कारण पानी एकदम से ब्लॉक नहीं हुआ है. तत्काल खतरे की बात नहीं है. अगर नदी के प्रवाह क्षेत्र में और मलबा जमा होता रहा तो फिर खतरे की आशंका है.
पहाड़ी नदी पर झील बनना खतरनाक: पहाड़ी क्षेत्रों में नदियों का गाड़-गदेरों में झील बनना हमेशा ही खतरनाक होता है. क्योंकि मैदानी इलाकों में तो समतल भूमि से पानी निकल जाता है, लेकिन पहाड़ी इलाके जल प्रवाह के दोनों ओर पहाड़ से ढके होते हैं. यानी नदी या गाड़-गदेरे पहाड़ी के बीच से बहते हैं. ऐसे में झील बनती है और उसमें से जल निकासी नहीं होती है, तो धीरे-धीरे पानी एक बड़े डैम का आकार ले लेता है. अगर ये पानी उस झील के टूटने के बाद डिस्चार्ज होता है तो उसकी मात्रा बहुत ज्यादा होती है. ऐसे में वो अपने सामान्य प्रवाह क्षेत्र से ज्यादा एरिया को कवर करते हुए बाढ़ का रूप लेकर तूफानी गति से आगे बढ़ता है.

झील फटने पर बाढ़ का खतरा: ऐसे में नदी के किनारे बसे शहरों और कस्बों को खतरा बढ़ जाता है. जैसे धराली में खीर गंगा में बाढ़ आई और उस विशाल जल सैलाब के रास्ते में जो भी अवरोध आया वो उसको जमींदोज करते हुए आगे बढ़ा, वैसा ही नदी पर बनने वाली झील भी कर सकती है. ऐसे में हर्षिल में भागीरथी नदी पर बनी झील से भी सतर्क रहने की जरूरत है. आपदा राहत के साथ भागीरथी में बन रही झील के पानी का समय से डिस्चार्च होना सुनिश्चित करने की जरूरत है.

बताते चलें कि उत्तरकाशी के धराली में 5 अगस्त 2025 को भयंकर प्राकृतिक आपदा आई थी. खीर गंगा नदी में फ्लैश फ्लड के कारण धराली गांव का कुछ हिस्सा और पूरा मार्केट तबाह हो गया था. बड़ी संख्या में लोग अभी लापता हैं, जिन्हें ढूंढा जा रहा है. 5 अगस्त से ही यहां रेस्क्यू ऑपरेशन चल रहा है. इसी दिन हर्षिल में गदेरे से प्राकृतिक आपदा आई थी. उस आपदा का मलबा भी भागीरथी के प्रवाह क्षेत्र पर अतिक्रमण कर चुका है.
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