ETV Bharat / advertorial

भारतीयों के लिए सही हेल्थ इंश्योरेंस प्लान कैसे चुनें?

आज का ज़माना लाइफस्टाइल डिसॉर्डर का है। आजकल ज्यादा देर तक बैठे रहने से स्पाइन प्रॉब्लम, या हार्ट डिज़ीज़ का खतरा होने लगा है।

Image
Image (Growthify)
author img

By Advertorial Team

Published : September 30, 2025 at 5:11 PM IST

6 Min Read
Choose ETV Bharat

आज का ज़माना लाइफस्टाइल डिसॉर्डर का है। आजकल ज्यादा देर तक बैठे रहने से स्पाइन प्रॉब्लम, या हार्ट डिज़ीज़ का खतरा होने लगा है। नींद की कमी से डिप्रेशन, हार्मोनल इम्बैलेंस और इम्युनिटी कमज़ोर होने लगी है। स्वास्थ्य को बचाने के लिए जेब पर बोझ बढ़ता जाता है। इसलिए इंश्योरेंस ज़रूरी है ताकि अस्पताल के खर्चें आपके बाकी ज़रूरतों पर भारी ना पड़ जाए।

हेल्थ इंश्योरेंस क्या है?

एक हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी ऐसा सुरक्षा कवच है जो आपके और आपके परिवार के मेडिकल खर्चों को कवर करता है। जब कभी किसी दुर्घटना या बीमारी के कारण आपको अस्पताल में भर्ती होना पड़े तो उसके इलाज में लगने वाले खर्च को बीमा कंपनी उठाती है। इसमें हॉस्पिटलाइजेशन, सर्जरी, दवाइयाँ, डॉक्टर की फीस, टेस्ट और डे-केयर ट्रीटमेंट जैसे खर्चें शामिल होते है।

हेल्थ इंश्योरेंस का महत्व

जब स्वास्थ्य अच्छा होता है तब हेल्थ इंश्योरेंस की ज़रूरत महसूस नहीं होती। लेकिन हेल्थ पर बढ़ती उम्र और बदलती लाइफस्टाइल का असर काफ़ी देर बाद नज़र आता है। इसलिए इंश्योरेंस लीजिए क्योंकि-

बड़े खर्च- हर साल हेल्थकेयर महंगा होते जा रहा है। बढ़ती टेक्नॉलजी, महंगी दवाइयाँ, प्राइवेट हॉस्पिटल के खर्चें, डॉक्टर की फीस, टेस्ट्स, एम्बुलेंस ये सभी जेब पर भारी पड़ने वाले है। इंश्योरेंस ना होने पर आपकी फाइनेंशियल प्लानिंग बिगड़ सकती है।

लाइफस्टाइल डिजीज- शराब नहीं पीने वाले को भी कैंसर जैसी बीमारी होने लगी है। इसका मतलब बीमारियाँ किसी को भी हो सकती है क्योंकि ये सभी खराब जीवनशैली का नतीजा है। डायबिटीज, ब्लड प्रेशर, हार्ट अटैक, PCOS, ये सभी सर्दी-जुकाम की तरह कॉमन होते जा रहे है। इनका इलाज काफ़ी लंबा और महंगा होता है। इंश्योरेंस ना होने पर आपको लंबे समायी तक इनका खर्च उठाना पड़ेगा।

टैक्स बेनेफिट- हेल्थ इंश्योरेंस लेने पर आपको टैक्स में भी राहत मिलती है। इनकम टैक्स ऐक्ट, 1961 की धारा 80D के तहत आप प्रीमियम पर ₹25,000 तक की छूट का फायदा ले सकते हैं।

भारत में हेल्थ इंश्योरेंस की प्रकार

भारत में हेल्थ इंश्योरेंस की कई पॉलिसी उपलब्ध हैं। उसके मुख्य प्रकार है-

  1. इंडिविजुअल / व्यक्तिगत पॉलिसी- ये पॉलिसी सिर्फ़ एक व्यक्ति को कवर करता है। इस प्रकार की हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी आपके अस्पताल में भर्ती होने, सर्जरी, रूम रेंट, डे-केयर प्रक्रियाओं और अन्य मेडिकल खर्चों को कवर करती है।
  2. फॅमिली फ्लोटर प्लान- इस पॉलिसी में पूरा परिवार कवर होता है। इस पॉलिसी की राशि पूरे परिवार के लिए इस्तेमाल होती है।
  3. सीनियर सिटिज़न प्लान- यह 60 वर्ष के ऊपर के लोगों के लिए खास प्लान है। सीनियर सिटिज़न हेल्थ इंश्योरेंस प्लान में वरिष्ठ नागरिकों की लगभग सभी जरूरतों को कवर किया जाता है।
  4. क्रिटिकल इलनेस इंश्योरेंस- कैंसर, हार्ट अटैक, किडनी फेल्योर जैसी गंभीर बीमारियों के लिए ये प्लान है।
  5. मटर्निटी हेल्थ इंश्योरेंस- ये अक्सर राइडर के तौर पर लिया जाता है। इसमें गर्भावस्था से जुड़े सभी खर्चें कवर किए जाते है।
  6. ग्रुप इंश्योरेंस प्लान- ये इंश्योरेंस कोई एम्प्लॉयर या ऑर्गनाइजेशन अपने कर्मचारियों के लिए लेते है। इसमें एक ही प्लान में सभी लोग कवर किए जाते हैं।
  7. टॉप -अप और सुपर टॉप -अप प्लान- ये प्लान बेसिक हेल्थ इंश्योरेंस से ज़्यादा कवरेज देता है। इसका प्रीमियम बेसिक हेल्थ प्लान से ज़्यादा होता है।

सही हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी कैसे चुनें?

सही हेल्थ इंश्योरेंस चुनना एक अहम फैसला है। ऐसा इसलिए क्योंकि जब आपको इलाज के लिए पैसों की ज़रूरत पड़ेगी यही पॉलिसी आपके काम आने वाली है। सही पॉलिसी चुनने के लिए इन बातों पर ध्यान दें।

  • कवरेज राशि- आप किस शहर में रहते हैं, कितना खर्च आ सकता है, पूरे परिवार की ज़रूरत, ,ये सब देखते हुए कवरेज राशि चुने।
  • प्लान- हेल्थ इंश्योरेंस के कई प्रकार है। आपके और आपके परिवार के लिए कौनसा प्लान सही रहेगा ये देखते हुए प्लान का चुनाव करें।
  • पहले से मौजूद बीमारी- अगर आपको पहले से कोई बीमारी है तो उसके लिए वेटिंग पीरियड होता है। उस पॉलिसी का चयन करें जहां कम से कम वेटिंग पीरियड हो ताकि इलाज जल्दी हो सके।
  • जेनेटिक बीमारी- अगर आपके परिवार में कोई बीमारी पीढ़ी दर पीढ़ी चली आ रही है तो कोशिश करें ऐसी पॉलिसी लें जो इन बीमारियों को भी कवर करें।
  • एक्सक्लूजन- हर पॉलिसी में कुछ खर्चे शामिल नहीं होते। इन्हें पहले से ही अपनी बीमा कंपनी से समझ लें ताकि बाद में परेशानी न हो।
  • नेटवर्क हॉस्पिटल- उस पॉलिसी को चुने जहां ज़्यादा से ज़्यादा अच्छे हॉस्पिटल्स जुड़े हो जिससे आपको कैशलेस सुविधा मिलती रहें। ये हॉस्पिटल आपके आसपास के हो तो और भी बेहतर है।
  • प्रीमियम और बजट- प्रीमियम हमेशा अपनी आर्थिक क्षमता और ज़रूरत के अनुसार ही चुनें।
  • एड-ऑन या राइडर- एड-ऑन या राइडर जोड़कर आप पॉलिसी को कस्टमाइज़ कर सकते है। इससे आपकी पॉलिसी और मज़बूत हो जाती है, मतलब बड़ा कवरेज मिलता है।

ध्यान देने योग्य बातें

इंश्योरेंस सिर्फ़ कम प्रीमियम या बड़ा कवरेज देखकर नहीं लेना चाहिए। अपनी ज़रूरत और आर्थिक स्थिति देखते हुए सही चुनाव करना चाहिए। इसके अलावा भी कुछ बातें है जिन्हें ध्यान में रखना ज़रूरी है जैसे-

  • समय पर प्रीमियम भरें। अगर आपकी पॉलिसी लैप्स हो जाती है तो आपके कई सारे बेनेफिट भी खत्म हो सकते हैं।
  • पॉलिसी के सभी नियम और शर्तें ध्यान से पढ़ें। कई बार इनकी वजह से क्लेम रद्द भी हो सकता है।
  • बीमा कंपनी से कोई भी बात या बीमारी छुपाएं नहीं। ज़रूरत पड़ने पर कंपनी दावा खारिज कर सकती है।
  • उस बीमा कंपनी का चुनाव करें जिसका क्लेम सेटलमेंट रेशियो ज़्यादा हो।
  • अलग- अलग पॉलिसी और बीमा कंपनी की तुलना करके सही पॉलिसी खरीदें।
  • ऑनलाइन कैलकुलेटर की मदद से आप अलग- अलग कवरेज और प्रीमियम चेक कर सकते हैं।

हमारी अच्छी हेल्थ हमें ज़िंदा रखती है। अगर आप स्वस्थ है तो खुश हो जाइए क्योंकि आप भाग्यशाली है। अगर किसी भी कारण से आपके स्वास्थ्य में गिरावट होती है तो कहीं ना कहीं पैसे खर्च करने पड़ते हैं। ऐसे में आर्थिक बोझ आपको परेशान कर सकता है क्योंकि अन्य खर्चों पर इस बोझ का असर पड़ता है। इसलिए खुद को और अपने परिवार को सही सुरक्षा कवच देने के लिए हेल्थ इंश्योरेंस ज़रूर खरीदें।