रुद्रम-2 ने बढ़ाई भारत की ताकत; अमेरिका-चीन, रूस के पास भी नहीं ऐसी तकनीक, हवा से सतह तक पाकिस्तान पर कहर बरपाएगी देसी मिसाइल
Rudram-II: हवा से सतह पर सटीक वार करने वाली रुद्रम-2 का DRDO और भारतीय वायु सेना ने हाल ही में सफल परीक्षण किया है.
Published : June 3, 2026 at 4:41 PM IST
|Updated : June 4, 2026 at 11:36 AM IST
Rudram-2 Missile Test: मौजूदा दौर में वैश्विक स्तर पर जो तनावपूर्ण हालात चल रहे हैं, उनको देखते हुए हर देश अपनी रक्षा प्रणाली और मारक क्षमता को विकसित करने में लगा है. इसी कड़ी में भारत ने एंटी रेडिएशन मिसाइल रुद्रम-2 का सफल परीक्षण करके खुद को अमेरिका-चीन और रूस से ज्यादा ताकतवर बना लिया है. मारक क्षमता, गति, तकनीक और वॉरहेड में रुद्रम-2 अमेरिका-चीन और रूस के मिसाइल सिस्टम से कहीं बेहतर साबित हुई है.
अमेरिका, चीन-रूस से कैसे अलग है रुद्रम-2: देसी हवा से सतह पर मार करने वाली रुद्रम-2 मिसाइल अपनी रफ्तार और मारक क्षमता में चीन-रूस और अमेरिका जैसी वैश्विक महाशक्तियों को कड़ी टक्कर दे रही है. अमेरिका की HARM और चीन की YJ-91 जैसी मिसाइलों की गति जहां सुपरसोनिक (मार्क 2 से 4) तक सीमित है वहीं, रुद्रम-2 हाइपरसोनिक रेंज (मार्क 5+) की है.
हालांकि, रूस की Kh-31P मिसाइल एक दमदार हथियार है, लेकिन रुद्रम-2 का 200 किलोग्राम पेलोड/वॉरहेड इसे काफी घातक बना रहा है. साथ ही स्वदेशी NavIC गाइडेंस सिस्टम इसे दुनिया के सबसे घातक और अचूक रडार डिस्ट्रॉयर हथियारों में शुमार करता है.
रुद्रम-2 की बेमिसाल तकनीक: रुद्रम-2 को DRDO ने भारतीय वायुसेना के लड़ाकू विमान सुखोई के लिए विशेष रूप से डिजाइन किया है. इसकी मारक क्षमता 300 किलोमीटर तक की है. वहीं, गति हाइपरसोनिक मार्क 5 प्लस है, जो इसे दुनिया की सबसे तेज एंटी-रेडिएशन मिसाइल बनाती है. यही नहीं, 600 से 700 किलोग्राम वजनी रुद्रम-2, 200 किग्रा तक वॉरहेड (विस्फोटक) लेकर हमला करने में सक्षम है जो कंक्रीट बंकरों को भी नष्ट कर सकता है.
रुद्रम-2 की ताकत: रुद्रम-2 मिसाइल दुश्मन के रडार और जैमर्स से निकलने वाले रेडियो सिग्नलों को खुद-ब-खुद ट्रैक करती है. यदि दुश्मन को मिसाइल के आने का पता चल जाए और वह अपना रडार सिस्टम बंद भी कर दे, तब भी रुद्रम-2 अपनी मेमोरी के आधार पर उसकी आखिरी लोकेशन के आधार पर उसे उड़ा सकता है.
रुद्रम-2 न केवल रडार सिस्टम को नष्ट करती है बल्कि एयर-टू-सरफेस (हवा से सतह) मोड में दुश्मन के एयरस्ट्रिप्स, कमांड सेंटर्स और बंकरों पर भी सटीक निशाना लगा सकती है. इसमें अमेरिकी जीपीएस के अलावा भारत का अपना नेविगेशन सैटेलाइट सिस्टम (NavIC) लगाया गया, जिससे हर परिस्थिति में इसकी सटीकता बनी रहती है.
चीन-अमेरिका से सीधी टक्कर लेगी रुद्रम-2: स्वदेशी रुद्रम-2 मिसाइल अमेरिका और चीन को सीधी टक्कर दे रही है. दरअसल, चीन ने वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर जो रडार और एयर डिफेंस सिस्टम लगा रखे हैं, उनको निष्क्रिय करने का पूरा दमखम रुद्रम-2 रखती है. इसके साथ ही अमेरिका की प्रसिद्ध AGM-88 HARM मिसाइल को रुद्रम-2 गति में मात देती है.
HARM की गति जहां मार्क 2 से 4 के बीच है, वहीं रुद्रम-2 मार्क 5+ की रफ्तार से हमला करती है. लेकिन, अमेरिकी मिसाइलों का वॉरहेड हल्का होता है. वहीं, रुद्रम-2 का 200 किलो का पेलोड पूरे रडार स्टेशन को जमींदोज कर सकता है.
दुश्मन देश की एयर रेंज में घुसे बिना रुद्रम-2 बरपाएगी कहर: रुद्रम-2 की स्टैंड-ऑफ रेंज 300 किमी की है. इसके चलते यह पाकिस्तान जैसे दुश्मन देश की एयर रेंज में घुसे बिना वहां के ठिकानों पर सटीक वार कर सकती है. यानी रुद्रम-2 को लांच करने के लिए भारतीय लड़ाकू विमानों को दुश्मन देश की एयर सीमा में नहीं जाना होगा और वे अपने क्षेत्र में रहकर ही तबाही मचा सकते हैं. इस मिसाइल के आने से भारत की विदेशी हथियारों पर निर्भरता काफी हद तक कम हो गई है, जिससे देश रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनने की ओर अग्रसर है.
रुद्रम-2 के सफल परीक्षण पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने क्या कहा: रक्षा मंत्रालय के X पर किए गए पोस्ट के अनुसार रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इस परियोजना में शामिल DRDO, IAF, रक्षा क्षेत्र के सार्वजनिक उपक्रमों, औद्योगिक भागीदारों और अन्य हितधारकों के प्रयासों की सराहना की है. उन्होंने कहा कि इन परीक्षणों ने स्वदेशी रक्षा प्रौद्योगिकियों की बढ़ती परिपक्वता को प्रदर्शित किया है, जिससे उन्नत हथियार प्रणालियों के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने में योगदान मिला है. DRDO के अध्यक्ष और रक्षा अनुसंधान एवं विकास विभाग के सचिव ने भी इस उपलब्धि के लिए कार्यक्रम से जुड़ी सभी टीमों को बधाई दी है.
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